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भाजपा स्थापना दिवस या मोदी स्थापना दिवस

पाणिनि आनंद | Updated on: 7 April 2016, 8:42 IST

भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस समारोह में बोलते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि नरेंद्र मोदी विश्व के महानतम नेता है और इस बात का गर्व सभी को महसूस करना चाहिए, उनके नेतृत्व में देश को आगे ले जाने की तैयारी में जुट जाना चाहिए. अमित शाह का बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर और बाहर यह चर्चा हो रही है कि क्या मोदी का करिश्मा अब भी बरकरार है या लोगों का मोहभंग होता जा रहा है.

साथ ही उन्होंने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संकेत दिया कि सरकार से उम्मीद करने का रोना लेकर बैठने के बजाय पार्टी के काम को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी में लग जाना चाहिेए. 

उनका इशारा साफ था कि पहले खुद कुछ करके दिखाएं और फिर उम्मीद लगाएं. इस वक्त सरकार और पार्टी के कामकाज को लोगों तक ले जाना पार्टी कार्यकर्ता की ज़िम्मेदारी है और इसे ईमानदारी से किया जाना ज़रूरी है.

पार्टी मोदी की गिरती साख से चिंतित है और विपक्ष इससे उत्साहित है. राज्यों में हो रहे चुनाव भी पार्टी के पक्ष में जाते नहीं दिख रहे हैं. मोदी स्थानीय नेताओं और प्रदेश पदाधिकारियों की तरह प्रचार करके भी राज्यों में भाजपा का झंडा नहीं गाड़ पा रहे हैं. 

narendra modi

ऐसे में पार्टी अध्यक्ष ने संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा के कार्यकर्ताओं को अपना मनोबल और मोदी के प्रति अपनी आस्था को मजबूत रखना चाहिए.

अमित शाह स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए अपने पुराने तेवर में दिखे. उग्र और मजबूत शब्दों के साथ वो पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे. लेकिन कार्यकर्ताओं से लेकर मंच तक उत्साह की कमी भी दिख रही थी. 

सबकुछ होते हुए भी माहौल रिक्तता लिए हुए था. पार्टी की स्थापना दिवस के उत्साह के बजाय केवल एक ही उत्साह देखने लायक था और वो था पार्टी अध्यक्ष से मिलने की कोशिश.

ऐसे समय में जबकि पार्टी सत्ता और संगठन के बीच की दूरियों के बढ़ते जाने का रोना रो रही है, अमित शाह ने उल्टे कार्यकर्ताओं को ही नसीहत दे डाली. उन्होंने कहा, “हम जब सत्ता में आते हैं, आलसी हो जाते हैं. यह आलस्य करके बैठने का समय नहीं है, यह कमर कसकर देश को आगे ले जाने का समय है.”

सरकार बनाम कार्यकर्ता

अमित शाह की यह बात पार्टी कार्यकर्ताओं को कितना गले उतरेगी, यह कह पाना कठिन है. कार्यक्रम में मौजूद दिल्ली के एक भाजपा नेता ने कैच को बताया, “जब कार्यकर्ता को महसूस होगा कि वो सत्ता में भागीदार है, उसकी सुनी जा रही है, उसकी राय अहमियत रखती है, तभी वो सरकार के कामकाज और फैसलों पर लोगों के बीच मज़बूती से पक्ष रखेगा. जब भागीदारी नहीं होगी तो कौन अपने ऊपर ज़िम्मेदारी लेगा.”

सरकार की केंद्रीकृत कार्यप्रणाली में कार्यकर्ताओं से भी ज़्यादा उपेक्षित भाजपा के अपने नेता हैं. मंत्रियों तक को कई बार उनके मंत्रालयों से संबंधित फैसलों की जानकारी नहीं होती. हाल ही में पठानकोट को लेकर पाकिस्तान की टीम के दौरे के बारे में खुद गृहमंत्री राजनाथ सिंह अनभिज्ञ थे. 

उन्होंने इस बात को स्वीकारा भी कि पाकिस्तान की जांच टीम की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली. ऐसी ही शिकायत भाजपा के अपने सांसद भी करते रहे हैं. उन्होंने पार्टी और सरकार में उपेक्षा और सुनवाई न होने का आरोप लगाया है.

लेकिन अमित शाह इन सवालों से हटकर पार्टी के विस्तार का आह्वान अपने कार्यकर्ताओं से कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “हमारे पास एक साल का समय है. इस समयावधि में पार्टी का विस्तार करना है और इसका संकल्प लेकर हर कार्यकर्ता को जुट जाना चाहिए.” उनका इशारा उत्तर प्रदेश का चुनाव था.

उम्मीद नहीं, योगदान दें

अमित शाह ने पार्टी अध्यक्ष के तौर पर जो खाका पार्टी के लिए बनाया था उसमें कुछ चीज़ें नई थीं. कई बातें वामपंथी दलों से सीखी हुई भी थीं. एक अहम फैसला यह था कि पार्टी सभी ज़िलों में अपने कार्यालय भवनों का निर्माण करवाएगी. 

इससे किसी व्यक्ति विशेष पर पार्टी कार्यालय चलाने की और उसके वर्चस्व के आगे झुकने की निर्भरता खत्म होगी. साथ साथ पार्टी के लिए ज़मीन पर अपनी संपत्ति तैयार होगी. यह सोच वामदलों की कार्यशैली से प्रभावित है.

ऐसा ही दूसरा बड़ा इरादा था बूथ के स्तर पर पार्टी को मजबूत करना और वहां पर कार्यकर्ता खड़ा करना. इसी सोच को दोहराते हुए अमित शाह ने कहा, “बूथ को मज़बूत करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. हम चाहते हैं कि प्रत्येक बूथ पर वर्ष में कम से कम 6 कार्यक्रम आयोजित किए जाएं. इससे बूथ पर कार्यकर्ता मजबूत होंगे. बूथ स्तर के कार्यकर्ता को अपनी सबसे मजबूत कड़ी बनाना होगा.”

अमित शाह ने कहा कि 11 करोड़ पार्टी सदस्य बनाना कोई छोटी उपलब्धि नहीं है लेकिन सफलता तब मानी जाएगी जब इन सदस्यों को हम पार्टी का कार्यकर्ता बना पाने में सफल हो पाएं. 

इसके लिए भी जुट जाने की ज़रूरत है. दरअसल, अमित शाह पार्टी के ढांचे को सुधारना चाहते हैं और उनका कार्यकर्ताओं के लिए संकेत स्पष्ट है कि आपको सवाल उठाने से पहले खुद कुछ करके और खड़े होकर दिखाना होगा. सत्ता तो मोदी के दम पर हासिल हुई है लेकिन इसे आगे ले जाना कार्यकर्ता की ज़िम्मेदारी है.

First published: 7 April 2016, 8:42 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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