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अरविंद सुब्रमण्यन के जीडीपी आंकड़ों को आर्थिक सलाहकार समिति ने किया पूरी तरह ख़ारिज

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2019, 9:12 IST

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) ने भारत के जीडीपी आंकड़ों पर पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के आंकड़ों को ख़ारिज कर एक विस्तृत नोट जारी किया है. इस नोट में कई आपत्तियां दर्ज की गई हैं. नोट में कहा गया है कि उनके द्वारा जारी किया गया पेपर शैक्षणिक जांच के लिए खरा नहीं उतर सकता है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय में जारी किए गए पेपर ने माना कि 2011-17 के बीच जीडीपी की वृद्धि आधिकारिक आंकड़े 7% से काफी कम थी.इससे पहले समिति ने कहा था कि जीडीपी के आंकड़ों पर सुब्रमण्यम के आरोपों का सिलसिलेवार तरीके से से जवाब दिया जायेगा.

पीएमईएसी के नोट के अनुसार, '' 19 जून 2019 तक उपलब्ध कागजों को बारीकी से पढ़ने के बाद इस नोट के प्राथमिक योगदानकर्ताओं ने लेखक की कार्यप्रणाली, तर्क और निष्कर्ष को खारिज कर दिया. इस नोट में कहा गया है कि उनके कागज में विशिष्ट डेटा स्रोतो, विवरण, वैकल्पिक परिकल्पना आदि का अभाव है. यह अकादमिक या नीति अनुसंधान मानकों की जांच के लिए स्टैंड नहीं करता है.

 

हालांकि काउंसिल ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं था कि पेपर को गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए लेकिन इसे सच भी नहीं मानना चाहिए. नोट में कहा गया है कि 'आने वाले वक़्त में भारतीय राष्ट्रीय आय के लेखांकन को सुधारने के लिए बदलाव होगा. कहा गया हैए कि केवल सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने और नकारात्मकता फैलाने से हितों की पूर्ति नहीं होती है.'

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने निष्कर्ष निकाला था कि 2011-12 और 2016-17 के बीच देश की जीडीपी को 2.5 प्रतिशत बढाकर बताया गया था. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रकाशित उनके एक शोध पत्र में कहा गया था कि अनुमानों में औसत वार्षिक वृद्धि लगभग 7 प्रतिशत आंकी गई थी, जबकि वास्तविक जीडीपी विकास दर लगभग 4.5 प्रतिशत कम थी.

पूर्व आर्थिक सलाहकार का खुलासा- 2.5 फीसदी बढाकर बताई गई देश की जीडीपी

First published: 20 June 2019, 9:12 IST
 
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