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मुंबई: झुग्गियों को बचाने के लिए धरने पर बैठी जसोदाबेन

अश्विन अघोर | Updated on: 14 February 2016, 22:30 IST

13 फरवरी, शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुम्बई में थे. वे यहां बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में मेक इन इंडिया वीक का उद्घाटन करने आए थे.

इससे ठीक एक दिन पहले एक और मोदी मुम्बई में थीं, लेकिन पूर्णतया विपरीत मकसद से थीं.

शुक्रवार 12 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदाबेन प्रत्यक्षदर्शियों को हैरान करते हुए यहां मुम्बई के आजाद मैदान में एक विरोध-प्रदर्शन में भागीदार बनीं.

बड़ा जनसमूह

दिल्ली के जंतर-मंतर की तरह मुम्बई का आजाद मैदान भी विरोध प्रदर्शनों की मेजबानी के लिए प्रसिद्ध है. बृह्नमुम्बई म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के मुख्यालय और छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के ठीक विपरीत दिशा में स्थापित होने के कारण यह हर रोज लाखों लोगों की निगाहों में आता है.

अधिकारियों ने मैदान के बड़े हिस्से को तारों से घेरकर प्रदर्शनकारियों के लिए आरक्षित कर दिया है. जसोदाबेन जिस प्रदर्शन में शामिल हुईं वह मुम्बई के गुड स्मैरिटन मिशन द्वारा आयोजित था.

प्रदर्शन मानसून के दौरान झुग्गियों को गिराने के खिलाफ था. उनके पोस्टरों पर जसोदाबेन का चेहरा भी था और नाम भी, जिसने स्वाभाविक रूप से लोगों का खासा ध्यानाकर्षित किया.

हालांकि प्रदर्शनकारियों की संख्या 150 से अधिक नहीं रही होगी, लेकिन इनको देखने वालों की संख्या हजारों में थी. इनमें से अधिकांश सिर्फ जसोदाबेन की यह दुर्लभ जन-उपस्थिति देखने आए थे और उन्हें निराशा का सामना नहीं करना पड़ा क्योंकि जसोदाबेन खुद मंच के बीच में बैठी थीं, गुलाबी साड़ी पहने. इसी ने दर्शकों की संख्या बहुत बढ़ा दी थी.

मिशन

प्रदर्शन के आयोजन मिशन के मैनेजर फ्रांसिस कार्मेलो ने कहा कि मिशन के सदस्यों ने कुछ महीने पहले जसोदाबेन से संपर्क किया था और उनको विरोध का एजेंडा बताया था.

कार्मेलो ने कहा, "हमने उनसे निवेदन किया था कि वे प्रदर्शन में भाग लेकर मिशन को अपना समर्थन दें, जिस पर वे तुरंत सहमत हो गईं”

Jasodaben

गुड स्मैरिटन मिशन के संस्थान ब्रदर पीटर पॉल राज के अनुसार, “हमने देखा था कि स्थानीय प्रशासन मानसून के दौरान झुग्गी-झोपडि़यों को ध्वस्त कर देता था और वहां रह रहे लोग बेघर और खुले में रहने को मजबूर हो जाते थे. इसी कारण वे संक्रमण के शिकार हो जाते थे जो समय पर और सही उपचार न मिलने की स्थिति में प्राणघातक भी साबित हो जाता था. जब भी ऐसी कोई झुग्गी-झोपड़ी ध्वस्त की जाती, मानो धरती पर नरक उतर आता. हम इसे रोकना चाहते हैं और लोगों को बचाना चाहते हैं.”

First published: 14 February 2016, 22:30 IST
 
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