Home » इंडिया » PMO holds its first meeting on affirmative action in private sector on 22 September
 

मोदी सरकार ने अपने खिलाफ बढ़ते प्रदर्शनों के चलते चार साल में पहली बार बुलाई ये बैठक

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 September 2018, 10:22 IST

मोदी सरकार के कार्यकाल के ख़त्म होने में अब सिर्फ एक साल बचा है, लेकिन सरकार इन चार सालों में रोजगार को लेकर प्राइवेट सेक्टर से कभी बातचीत नहीं की. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट की माने तो प्रधानमंत्री कार्यालय ने 22 सितम्बर को निजी क्षेत्र में रोजगार को लेकर पहली बार बैठक आयोजित की है.

रिपोर्ट के अनुसार बैठक में भाग लेने वाले एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को रोजगार प्रदान करने के लिए निजी क्षेत्र की प्रतिबद्धता पर सवाल थे और उद्योग के प्रयासों में मजबूती नहीं दिखाई दे रही थी.

देशभर में दलितों, जाटों, मराठों और अन्य जातियों के कई समूहों द्वारा राष्ट्रव्यापी विरोधों के चलते यह बैठक हुई है.
यूपीए -1 सरकार के दौर में इस तरह की बैठक अक्टूबर 2006 में हुई थी. इस विषय पर चर्चा करने के लिए प्रधान मंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समन्वय समिति गठित की गई थी और मई 2014 तक इस तरह की सात बैठकें आयोजित की गई थी.

हालांकि समिति की आठवीं बैठक पीएमओ के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में इस सरकार के तहत पहली बार 22 सितंबर को आयोजित की गई थी. सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में देरी के लिए सरकार पर सवाल उठाये जा रहे थे. निजी क्षेत्र में एससी / एसटी के लिए सकारात्मक कार्रवाई पर औपचारिक रूप से समन्वय समिति नामक समिति में उद्योग जगत के प्रमुख शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार बैठक में डिपार्टमेंट ऑफ़ इंडस्ट्रियल पॉलिसी एंड प्रमोशन ने भारतीय उद्योग द्वारा कौशल विकास, छात्रवृत्ति और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए रोजगार के क्षेत्र में औद्योगिक प्रगति पर एक प्रस्तुति दी गई.

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First published: 25 September 2018, 10:20 IST
 
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