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बड़ा सवाल: क्या POCSO एक्ट में बदलाव से रुक जाएंगी रेप की बढ़ती घटनाएं

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 21 April 2018, 15:25 IST

कठुआ और उन्नाव रेप केस के बाद पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ है. कठुआ की मासूम के साथ हुई रेप की घटना और हैवानियत ने पूरे देश को हिला कर रख दिया. पूरे देश में महिलाओं के रेप और उनके खिलाफ होती हिंसा के विरोध में प्रदर्शन किये गए. लंदन में आयोजित 'भारत की बात सबके साथ' कार्यक्रम से पीएम मोदी भी इस मुद्दे पर बोले. यहां तक की रेप की ये हैवानियत UN और IMF तक पहुंच गई. UN ने इन घटनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.

इन घटनाओं के बाद सरकार भी कुछ सख्त होती नजर आयी है. केबिनेट ने आज POCSO एक्ट में बदलाव को मंजूरी दे दी है. जिसके तहत 12 साल से कम की उम्र से रेप करने पर मौत की सजा दी जाएगी. पहले इस कानून के तहत न्यनतम सजा 7 साल की और अधिकतम सजा उम्र कैद थी.

पहले भी हुआ है रेप लॉ में संशोधन

2012 में हुए निर्भया केस ने भी देश को पूरी तरह से हिला कर रख दिया था. उस दर्दनाक हादसे में दोषियों ने जो हैवानियत दिखाई थी उसके लिए दी जाने वाली सजा में बदलाव की जरूरत महसूस की गयी.

इस कानून में लिए जस्टिस वर्मा की अगुवाई में बनाई गई तीन सदस्यों की कमेटी ने 29 दिनों में 631 पेज की रिपोर्ट 22 जनवरी 2013 में सरकार को सौंप दी थी. वर्मा कमेटी की सिफारिश के बाद सरकार ने ऑर्डिनेंस जारी किया.

इसके तहत कानून को लागू कर दिया गया. बाद में संसद में बिल पास किया गया और 2 अप्रैल 2013 को नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया. रेप और छेड़छाड़ के मामले में जो कानूनी प्रावधान है, उसके तहत रेप के कारण अगर कोई महिला मरणासन्न अवस्था में पहुंच जाती है या फिर मौत हो जाती है, तो उस स्थिति में दोषियों को फांसी तक की सजा हो सकती है.

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बदल दी गयी रेप की परिभाषा 

आईपीसी की धारा-375 में रेप मामले में विस्तार से परिभाषित किया गया है. इसके तहत बताया गया है कि अगर किसी महिला के साथ कोई पुरुष जबरन शारीरिक संबंध बनाता है, तो वह रेप होगा. साथ ही मौजूदा प्रावधान के तहत महिला के साथ किया गया यौनाचार या दुराचार दोनों ही रेप के दायरे में होगा. इतना ही नहीं महिला के प्राइवेट पार्ट में अगर पुरुष कोई भी ऑब्जेक्ट डालता है, तो वह भी रेप के लिए दोषी होगा.

रेप में उम्रकैद तक की सजा 

महिला की उम्र अगर 18 साल से कम है और उसकी सहमति भी है, तो भी वह रेप होगा. रेप मामले में 7 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है. आईपीसी की धारा-376 के तहत कम से कम 7 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया. इसके अलावा आईपीसी की धारा-376 ए के तहत प्रावधान किया गया कि अगर रेप के कारण महिला विजिटेटिव स्टेज (मरने जैसी स्थिति) में चली जाए, तो दोषी को अधिकतम फांसी की सजा हो सकती है.

साथ ही गैंगरेप के लिए 376 डी के तहत सजा का प्रावधान किया गया, जिसके तहत कम से कम 20 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रभर के लिए जेल (नेचरल लाइफ तक के लिए जेल) का प्रावधान किया गया.

दोबारा दोषी होने पर फांसी तक की सजा 

साथ ही 376 ई के तहत प्रावधान किया गया कि अगर कोई शख्स रेप के लिए पहले दोषी करार दिया गया हो और वह दोबारा अगर रेप या गैंगरेप के लिए दोषी पाया जाता है, तो उसे उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा होगी.

छेड़छाड़ के लिए भी सख्त सजा का प्रावधान

पहले छेड़छाड़ के मामले में आईपीसी की धारा-354 के तहत केस दर्ज किए जाते थे और वैसे मामलों में दोषी पाए जाने पर 2 साल तक कैद की सजा का प्रावधान था. अब के प्रावधान के तहत 354 के तहत छेड़छाड़ के मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम 5 साल कैद की सजा का प्रावधान किया गया है. साथ ही कम से कम एक साल कैद की सजा का प्रावधान किया गया है और इसे गैर-जमानती अपराध माना गया है. एंटी रेप लॉ में धारा-354 के कई सब सेक्शन बनाए गए हैं.

स्टॉकिंग के लिए भी सख्त सजा

अगर कोई शख्स महिला का पीछा करता है या फिर उससे कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करता है और यह सब महिला की मर्जी के खिलाफ किया जाता है, तो इसे स्टॉकिंग माना जाएगा. ऐसे मामले में आईपीसी की धारा-354 डी के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है. इसमें दोषी पाए जाने पर 3 साल तक कैद हो सकती है.

इतना ही नहीं महिलाओं के प्रति होने वाली किसी भी तरह के उत्पीड़न से बचने के लिए सेक्सुअल रिमार्क्स पर भी सजा का प्रावधान है. कानूनी प्रावधान के तहत अगर कोई शख्स किसी महिला को अशोभनीय और सेक्सुअल नेचर का कंडक्ट करता है, तो उस मामले में आईपीसी की धारा-354 ए पार्ट-1 के तहत केस दर्ज किया जाएगा.

कोई शख्स महिला से सेक्सुअल डिमांड या फिर आग्रह करता है, तो उस मामले में आईपीसी की धारा-354 ए पार्ट-2 के तहत केस दर्ज किया जाएगा. वहीं कोई शख्स किसी महिला को उसकी मर्जी के खिलाफ पोर्नोग्राफी दिखाता है, तो ऐसे मामले में आईपीसी की धारा-354 ए पार्ट-3 के तहत केस दर्ज किए जाने का प्रावधान है.

First published: 21 April 2018, 15:25 IST
 
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