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जाट आरक्षण: खट्टर सरकार में दो फाड़

राजीव खन्ना | Updated on: 23 February 2016, 20:37 IST
QUICK PILL
  • कांग्रेस का कहना है कि मनोहर लाल खट्टर सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ना चाहती है क्योंकि राज्य सरकार जनता को किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है.
  • खट्टर की स्थिति हास्यास्पद हो गई है. जाटों को आरक्षण दिए जाने की घोषणा के बाद अब हरियामा की गैर जाट जातियां नाराज हो गई हैं. गैरतलब है कि जाटों के वर्चस्व से आजिज आकर ही गैर जाटों ने बीजेपी को अपना वोट दिया था.
  • सरकार के मुताबिक अभी तक कुल 19 लोगों की मौत हुई है जबकि 183 लोग घायल हुए हैं. हरियाणा रोडवेज को करीब 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. आंदोलन के दौरान कुल 34,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

हरियाणा में स्थिति के पटरी पर लौटने की संभावनाओं के बीच जाट आरक्षण को लेकर राजनीति तेज हो गई है. अभी तक के आंदोलन से राज्य में जहां लोगों की जानें गई हैं वहीं राज्य के सामाजिक ताने-बाने पर भी बुरा असर पड़ा है. इसके अलावा कई हजार करोड़ रुपये की संपत्ति का भी नुकसान होने की खबर है.

शुरू से ही इस बात का अंदेशा था कि जाट वोट बैंक में मजबूत दखल रखने वाले विपक्षी दल के नेता आंदोलन को भड़का रहे हैं. पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा के सहयोगी बीरेंदर सिंह की ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई है. सिंह ने कथित तौर पर आंदोलनकारियों को भड़काया. 

हालांकि बीरेंदर सिंह का कहना है कि क्लिप में छेड़छाड़ की गई है वहीं कांग्रेस प्रेसिडेंट अशोक तंवर ने बीरेंदर सिंह को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है.

कांग्रेस और भारतीय राष्ट्रीय लोक दल यह कहते रहे हैं कि उनका दंगाइयों से कोई लेना देना नहीं है. दोनों दलों ने राज्य में शांति की अपील की है. वहीं राज्य के संसदीय मामलों के मंत्री राम विलास शर्मा ने कहा कि हरियाणा सरकार ऑडियो क्लिप की जांच कराएगी.

विफलता छिपा रही कांग्रेस

कांग्रेसी पार्टी ने कहा कि मनोहर लाल खट्टर सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरे पर फोड़ना चाहती है. उन्होंने कहा, 'सरकार अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में विफल रही है. हरियाणा तीन दिनों से भगवान की दया पर है. हमने हरियाणा को नंबर एक राज्य बनाया था लेकिन बीजेपी ने सभी सफलताओं को मिट्टी में मिला दिया.'

तीसरी बड़ी राजनीतिक पार्टी इनेलोद ने वहीं कांग्रेस और राज्य सरकार दोनों पर निशाना साधा है. पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी से मिलकर खट्टर सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की मांग की.

पार्टी नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि स्थिति बद से बदतर हो चुकी है. बीजेपी सांसद राज कुमार सैनी जाटों के खिलाफ बयान दे रहे थे और ऐसा कर वह दूसरे समुदाय को भड़का रहे थे. उन्होंने कहा कि सरकार ने अपनी हरकतों से गृह युद्ध जैसी स्थिति बना दी है.

चौटाला ने कहा कि ऑडियो क्लिप यह दिखाता है कि कांग्रेस किस तरह से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को भड़काने की कोशिश कर रही थी.

जाट वोट बैंक पर नजर

यहां समझना जरूरी है कि कांग्रेस और  इनेलोद का जाट बहुल इलाकों में वर्चस्व है. हरियाणा में जाट मतदाताओं की हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी है जबकि विधानसभा की 90 सीटों में से 30 सीटों पर जाटों का कब्जा है. बीजेपी की विधानसभा में 47 सीटें हैं लेकिन वह जाट बहुल विधानसभा क्षेत्रों में वह अपनी पैठ नहीं बना सकी. वहां अभी भी कांग्रेस और इनेलोद का कब्जा है.

विश्लेषकों का कहना है कि हरियाणा की राजनीति में जाटों के वर्चस्व के खिलाफ गैर जाटों के ध्रुवीकरण से बीजेपी को सत्ता में आने की मदद मिली. हालांकि गैर जाट होने के बावजूद खट्टर जाटों को स्वीकार्य है. इसके कारण उन्हें रोहतक में विरोध का सामना करना पड़ा है.

गैर जाट नेता और हरियाणा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने मारे गए जाटों को मुआजवा देने के फैसले पर नाराजगी जताई है

जाट आरक्षण को लेकर अगले विधानसभा में बिल पेश किए जाने के वादे के बावजूद सरकार की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही है. गैर जाटों को लगता है कि जाट आंदोलन कर अपनी मांग मनवाने में सफल रहे हैं. इसका अंदाजा स्वास्थ्य मंत्री अनिज विज की नाराजगी से भी लगाया जा सकता है जिन्होंने खट्टर सरकार की तरफ से मारे गए लोगों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआजवा और एक परिचित को नौकरी देने के फैसले के खिलाफ  नाराजगी जाहिर की है. 

विज का मानना है कि जो लोग हिंसा में शामिल रहे हैं उन्हें मुआवाज नहीं दिया जाना चाहिए. विज गैर जाट नेता हैं.

वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस और इनेलोद ने राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर उन पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. कांग्रेस प्रवक्ता कृष्णमूर्ति हुडा ने कहा, 'वह बयान देने का एक भी मौका नहीं चूकते. जब हरियाणा जल रहा था तब वह चुप क्यों थे?' 

वहीं चौटाला ने कहा कि मोदी हरियाणा को दूसरा घर बताते हैं लेकिन जब हरियाणा जल रहा था तब उन्होंने कोई आश्वसान नहीं दिया. इस बीच मंगलवार को राज्य पूरी तरह से शांत रहा और इस दौरान कहीं भी हिंसा नहीं हुई. ट्रेन सेवाएं बहाल नहीं हो पाई है. इसके अलावा चंडीगढ़ से दिल्ली के बीच विशेष रेल सेवा शुरू की गई है.

सरकार के मुताबिक अभी तक कुल 16 लोगों की मौत हुई है जबकि 183 लोग घायल हुए हैं. हरियाणा रोडवेज को करीब 15 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. आंदोलन के दौरान कुल 34,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

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First published: 23 February 2016, 20:37 IST
 
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