Home » इंडिया » Poser for 'graft-free' NDA: did Gadkari give Rs 10,000 cr contract to an old friend?
 

क्या गडकरी गलत तरीके से अपने दोस्त को फायदा पहुंचा रहे हैं?

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • दिग्वजय सिंह का आरोप है कि राजमार्ग मंत्रालय ने नितिन गडकरी के पुराने कारोबारी सहयोगी को 10,050 करोड़ रुपये का ठेका दिया है.
  • मंत्रालय का यह ठेका जम्मू-कश्मीर में जोजिला दर्रे में सुरंग बनाने से संबंधित है जिसे आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर्स को दिया गया है.
  • गडकरी पर 1995-99 में महाराष्ट्र का पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर होते हुए आईआरबी को फायदा पहुंचाने का आरोप है. इसके बदले में आईआरबी ने कथित तौर पर पूर्ति ग्रुप में डमी कंपनियों की मदद से निवेश किया.

डीडीसीए घोटाले में अरुण जेटली के बहाने भाजपा पर निशाना साधने के बाद कांग्रेस ने एक बार फिर से नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है. पार्टी नेता दिग्विजय सिंह का आरोप है कि राजमार्ग मंत्रालय ने नितिन गडकरी के पुराने कारोबारी सहयोगी को 10,050 करोड़ रुपये का ठेका दिया है. मंत्रालय का यह ठेका जम्मू-कश्मीर में जोजिला दर्रे में सुरंग बनाने से संबंधित है जिसे आईआरबी इंफ्रास्ट्रक्चर डिवेलपर्स को दिया गया है.

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सिंह के मुताबिक आईआरबी ग्रुप के प्रोमोटर्स के साथ परिवहन और राजमार्ग मंत्री 'गडकरी के रिश्ते को छिपाया गया.' आईआरबी ग्रुप का प्रोमोटर महिष्कर परिवार है. खबरों के मुताबिक लागत के लिहाज से जोजिला पास टनल देश का सबसे बड़ा हाईवे प्रोजेक्ट है. आईआरबी चेयरमैन और प्रबंध निदेशक वीरेंद्र महिष्कर ने इस महीने की शुरुआत में घोषणा करते हुए बताया था कि प्रोजेक्ट का कंसेशन पीरियड 22 सालों का है.

दोस्तों पर मेहरबान?

दिग्विजय सिंह का आरोप है कि कॉन्ट्रैक्ट को 'इस तरह से डिजाइन किया गया जिसके तहत सीवीसी दिशानिर्देशों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया.'

हालांकि आईएलएफएस इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन कंपनी, हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी और लार्सन एंड टुब्रो ने शुरुआती चरण में इस प्रोजेक्ट के लिए बोली लगाई थी लेकिन आखिरी चरण में आईआरबी कॉन्ट्रैक्ट पाने में सफल रही.

आईआरबी को कॉन्ट्रैक्ट दिलाने के लिए अन्य बिडर्स को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देकर डराया गया: सिंह

सिंह का आरोप है कि 'अन्य बिडर्स को दूसरे प्रोजेक्ट में गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देकर बाहर किया गया.' लेकिन क्यों?

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सिंह का आरोप है कि महिष्कर इससे पहले गडकरी के कारोबार में करोड़ों रुपये का निवेश कर चुके हैं. गडकरी के बेटे निखिल नितिन आइडियल एनर्जी प्रोजेक्ट्स लिमिटेड में शेयरधारक होने के साथ प्रोमोटर डायरेक्टर भी रह चुके हैं. यह कंपनी महिष्कर की थी लेकिन वह सीधे तौर पर आईआरबी ग्रुप से जुड़ी नहीं थी.

अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज पेश करते हुए सिंह ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट में 'हितों के टकराव और फायदे के बदले फायदा पहुंचाने' की बात साबित होती है. सिंह ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त केवी चौधरी और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर ' जांच होने तक 981 करोड़ रुपये की पहली किस्त रोके जाने की अपील की है.' इसके अलावा सिंह ने मोदी से गडकरी को तत्काल बर्खास्त किए जाने की अपील करते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.

खराब अतीत

दिग्विजय सिंह ने अपने दावे के समर्थन में जो दस्तावेज पेश किए हैं उससे गडकरी और उनके बेटे का आईआरबी के साथ किसी संबंध की पुष्टि नहीं होती है. इससे बस यह साबित होता है कि गडकरी के बेटे महिष्कर परिवार की प्रोमोटेड कंपनी में शामिल थे.

नवंबर 2012 में आईईपीएल का पावर प्रोजेक्ट गडकरी, उनके बेटे और महिष्कर परिवार के संबंधों की वजह से विवादों में आ गया था. उस वक्त गडकरी बीजेपी के प्रेसिडेंट थे और यह पावर प्रोजेक्ट भी महाराष्ट्र में चल रहा था.

आईईपीएल 2011 के बाद से अपने प्लांट को बेचने की कोशिश कर रही थी लेकिन राजनीतिक संबंधों की वजह से कोई भी इसे खरीदने को तैयार नहीं था. आईईपीएल में दत्तात्रेय महिष्कर की 53.3 फीसदी की हिस्सेदारी थी जो आईआरबी के फाउंडर हैं. कंपनी ने हालांकि आईआरबी के साथ किसी तरह का संबंध होने से इनकार किया है.

गडकरी पर 1995-99 में महाराष्ट्र का पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर होते हुए आईआरबी को फायदा पहुंचाने का आरोप है. इसके बदले में आईआरबी ने कथित तौर पर पूर्ति ग्रुप में डमी कंपनियों की मदद से निवेश किया. बाद में हालांकि गडकरी और आईआरबी दोनों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया.

1995-99 में आईआरबी को 500 करोड़ रुपये के पांच कॉन्ट्रैक्ट मिले और इस वक्त गडकरी महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी मिनिस्टर थे

1995 में आईआरबी को कथित तौर पर 104 करोड़ रुपये का ठेका मिला था और इसके तहत भिवंडी और ठाणे के बीच 25 किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण और उसका रख रखाव किया जाना था. यह उन पांच कॉन्ट्रैक्ट्स में से एक था जो गडकरी के पीडब्ल्यूडी मिनिस्ट रहते हुए आईआरबी को दिया गया था.

उस वक्त यह सवाल पूछा गया था कि क्या कॉन्ट्रैक्ट से हुए फायदों की वजह से गडकरी के बेटे को आईआरबी ने डायरेक्टर बनाया था. 2012 में महिष्कर के बेटे जयंत और वीरेंद्र उस वक्त रडार पर आ गए थे जब उन पर कथित रूप से कर्ज देने और गडकरी से फेवर लेने का आरोप लगा था.

First published: 12 January 2016, 11:15 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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