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यूपी का पोस्टर वार: हास्य कम, उपहास ज्यादा

पत्रिका ब्यूरो | Updated on: 29 July 2016, 8:34 IST

न चुनाव की अधिसूचना जारी हुई है, न कोई तारीख आई है, समय भी कम से कम छह महीना बाकी है लेकिन उत्तर प्रदेश में सियासी पार्टियों और कार्यकर्ताओं ने माहौल को सरगर्म कर रखा है. कह सकते हैं कि सूत-कपास के बिना ही जुलाहों में लट्ठ चल रही है.

बीते एक अरसे से प्रदेश में चुनावों के साथ और मोर्चे पर राजनीतिक कार्यकर्ता लड़ाई लड़ रहे हैं. यह लड़ाई पोस्टरों के जरिए लड़ी जा रही है. मिथकीय, धार्मिक चरित्रों के माध्यम से कार्यकर्ता चुनावी चर्चा को धार दे रहे हैं. अक्सर ये पोस्टर खिल्ली उड़ाने वाले, कभी-कभी अपमानजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले होते हैं.

2017 के लिए हर राजनीतिक पार्टी उत्तर प्रदेश में चुनावी बिसात बिछाने में लगी है. सपा, बसपा, बीजेपी या कांग्रेस, सभी पार्टियां पोस्टरों के जरिए अपनी बात कभी जनता तक और अधिकतर पार्टी हाईकमान तक पहुंचाने की जुगत लगा रहे हैं. इस होड़ में अक्सर भाषा का स्तर और सार्वजनिक शिष्टाचार का दायरा संकुचित हो जाता है. मीडिया में इसकी निंदा भी होती है.

भारतीय लोकतंत्र का एक नया चेहरा है पोस्टर वार. पोस्टर सियासी दलों द्वारा एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का जरिया बन गए हैं साथ ही राजनीतिक आकाओं को खुश करने का भी. पिछले कुछ सालों के दौरान हर शुक्रवार को सिनेमाघरों में बदलती पिक्चरों की तरह ही यूपी के चुनावी दंगल में पोस्टर बदल रहे हैं. यह सियासी ड्रामा निरंतर चल रहा है. अक्सर ये पोस्टर बड़े सियासी घमासान का कारण बन जाते हैं. यहां हम ऐसे ही कुछ बड़े पोस्टर विवादों का जिक्र करने जा रहे हैं.

यहां एकबात और अहम है कि ज्यादातर पोस्टरों की जन्मस्थली इलाहाबाद शहर होता है. हालांकि यह अंतिम सत्य नहीं है.

मायावती सूर्पनखा, स्वाति सिंह दुर्गा

इलाहाबाद की रचनात्मक क्षमता का सबसे ताजा उदाहरण है मायावती का सूर्पनखा वाला पोस्टर. अपने मूल में ही किसी व्यक्ति से घृणा और जातिगत श्रेष्ठता के बोध में बनाया गया यह पोस्टर रामायण के एक कुख्यात चरित्र सूर्पनखा से बसपा सुप्रीमो मायावती की तुलना करता है.

यूपी में दयाशंकर और मायावती के बीच चल रहे सियासी संग्राम के बीच यह पोस्टर सामने आया जिसमें बीजेपी के पूर्व नेता दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह को दुर्गा के रुप में दिखाया गया है.

इलाहाबाद के सिविल लाइन में लगे इस पोस्टर में लिखा था ‘बेटी के सम्मान में, समाज उतरा मैदान में’. दरअसल ये पोस्टर आरक्षण मुक्त महासंग्राम नाम के एक संगठन की तरफ से अनुराग शुक्ला नाम के छात्र नेता ने लगाया था जो भाजपा के नजदीक हैं. इस पोस्टर से मायावती, नसीमुद्दीन सिद्दिकी पूर्व बसपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य पर निशाना साधा गया.

नरेंद्र मोदी पर कार्टून के जरिये हमला

कानपुर में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला करने के लिए कार्टून को हथियार बनाया था. शहर में जगह-जगह कार्टून वाले पोस्टर के साथ 'पोल-खोल' रैली निकाली गई थी. इस दौरान बिठूर के युवा कांग्रेस नेता के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था. इस रैली में पीएम के कामों और योजनाओं को लेकर बैनर-पोस्टर शामिल किए गए थे.

कांग्रेस ने दिखाया 'चाल, चरित्र और चेहरा'

कानपुर के दौरे पर गए केशव मौर्य के स्वागत के लिए बीजेपी ने तैयारी की थी, तो वहीं कांग्रेस ने भी शहर में पोस्टर टांग दिए. इस पोस्टर में पीएम मोदी, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और केशव प्रसाद मौर्या की तस्वीरें थीं. इन तीनों की तस्‍वीरों के ऊपर चाल, चरित्र और चेहरा लिखा हुआ था. इस पोस्टर के बाद तीखी नोकझोंक हुई.

केशव प्रसाद मौर्या का 'अर्जुन' रूप

इलाहाबाद में ही कुछ दिन पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्या से संबंधित एक विवादित पोस्टर सामने आया था. इसे पार्टी नेता डॉ. विक्रम ने बनवाया था. इसमें केशव मौर्या को महाभारत का अर्जुन, तो खुद को भगवान कृष्ण के तौर पर दिखाया गया था. हालांकि, मामला तूल पकड़ता देख केशव प्रसाद मौर्या ने खुद को इस विवाद से अलग करते हुए कहा था कि इस पोस्टर से पार्टी और उनका कोई लेना-देना नहीं है.

केशव बने पोस्टर ब्वाय

इलाहाबाद में ही एक और पोस्टर सामने आया जिसमें केशव मौर्या के ऊपर तंज कसा गया था. इसमें तुकबंदी के जरिए पूछा गया था कि चाय बेचने वाले केशव भइया रहस्य से पर्दा हटाओ, करोड़पति बनने का राज तो बताओ. इसी पोस्टर में बीजेपी पर भी निशाना साधा गया था. हालांकि पोस्टर को लेकर काफी विवाद पैदा हो गया था और बीजेपी ने प्रदर्शन के साथ ही इस पोस्टर के लिए के केस भी दर्ज करवाया था.

प्रियंका गांधी इज़ कमिंग सून इन यूपी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले गांधी परिवार के पैतृक शहर इलाहाबाद में कांग्रेस की कमान प्रियंका गांधी को दिए जाने को लेकर फेसबुक पर बाकायदा अभियान चलाया गया था. कार्यकर्ताओं ने ऐलान कर दिया था कि दीदी इज़ कमिंग सून इन यूपी.

कांग्रेस कार्यकर्ता हसीब अहमद ने प्रियंका गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी को लेकर कई पोस्टर सोशल नेटवर्किंग साइट पर डाले थे. सोशल मीडिया पर इसका प्रचार जोर-शोर से शुरू हुआ था. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के इलाहाबाद पहुंचने पर उनके सामने भी कार्यकर्ताओं ने प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारने की गुजारिश की थी.

गोरखपुर में दिखा था राहुल गांधी का दबंग अवतार

उत्तर प्रदेश में पोस्टर वार के क्रम में एक पोस्टर राहुल गांधी का गोरखपुर में लगाया गया था. जिसमें राहुल को दबंग के रूप में दिखाया गया था. इस पोस्टर में राहुल को जन रक्षक बताया गया था. पोस्टर में लिखा था- उत्तर प्रदेश को 27 सालों से लूटने वालों सावधान हो जाओ, अब हम आ रहे हैं.

इस पोस्टर में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार को दंगाइयों और बाहुबलियों की सरकार बताया गया था. पोस्टर में बीएसपी, बीजेपी और ओवैसी पर भी निशाना साधा गया था.

योगी को शेर तो अखिलेश को गधे पर बैठाया

कांग्रेस और बीजेपी के बीच पोस्टरवार को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने एक और पोस्टर कुछ दिन पहले लगाया था. बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा ने राहुल गांधी के दबंग अवतार वाले पोस्टर के जवाब में बीजेपी के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ का पोस्टर लगाया था. पोस्टर में शेर पर बैठे बीजेपी सांसद को नायक के रूप में पेश किया गया था. जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सहित अन्य पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को गधे पर सवार दिखाया गया था.

पोस्टर पर लिखा गया था- अबकी बार योगी सरकार. पोस्टर में अखिलेश-माया पर जमकर निशाना साधा गया था. वहीं, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को देश को बांटने वाला और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को मुसलमानों को गुमराह करने वाला बताया गया था. ये विवादित पोस्टर पोस्टर इलाहाबाद और वाराणसी में लगे थे.

मायावती को दिया था 'मां काली' का रूप

एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश में जारी पोस्टर वार में बीएसपी प्रमुख मायावती का एक पोस्टर काफी विवादों में रहा था. हाथरस के थाना सादावाद क्षेत्र के बाजार में अंबेडकर शोभा यात्रा के समय मायावती को एक पोस्टर में मां काली का रूप दिया गया था. इस पोस्टर में मायावती के हाथ में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी का कटा हुआ सिर लटका दिखाया गया था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाथ जोड़कर बसपा सुप्रीमो से याचना करते हुए दिखाए गए थे.

First published: 29 July 2016, 8:34 IST
 
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