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मुलुंड बम धमाकों पर पोटा अदालत ने 10 को ठहराया दोषी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:51 IST

महाराष्ट्र की विशेष पोटा अदालत ने मंगलवार को 2002 और 2003 में मुंबई में हुए तीन बम धमाकों के मामले में 13 आरोपियों में से 10 को दोषी करार दिया है. बाकी तीन आरोपियों को अदालत द्वारा बरी कर दिया गया. तीन स्थानों पर हुए इन धमाकों में 12 लोगों की जान गई थीं जबकि 130 से ज्यादा लोग घायल हुए थे.

अदालत ने फिलहाल अभी दोषियों को सजा नहीं सुनाई है. लेकिन द प्रीवेंशन ऑफ टेररिज्म एक्ट 2002 (पोटा) की विशेष अदालत में न्यायाधीश पीआर देशमुख बुधवार को इस संबंध में सजा सुना सकते हैं. दिसंबर 2002 से लेकर मार्च 2003 तक महाराष्ट्र के मुलुंड, मुंबई सेंट्रल और विले पार्ले स्टेशन समेत आसपास के इलाकों में तीन धमाके हुए थे. 

Court Hammer/Live/Patrika

अदालत ने इस मामले में सुनवाई करने के बाद आरोपी मोहम्मद कामिल, नूर मोहम्मद अंसारी, अनवर अली को केवल आर्म्स एक्ट में दोषी पाया. जबकि आरोपी गुलाम अकबर को पोटा और एक्सप्लोसिव में दोषी पाया. वहीं, फरहान मलिक को पोटा समेत पांच अन्य आरोप में, डॉ. वाहिद जब्बार अंसारी पोटा समेत चार धाराओं में और मुजम्मिल अख्तर अब्दुल अंसारी पोटा समेत 18 धाराओं में दोषी पाए गए.

जबकि तीन आरोपी नदीम पलवा, हारुन रशीद लोहार और अदनान बिलाल मुल्ला को बरी कर दिया गया. 

कब हुए थे धमाके

मालूम हो कि पहला धमाका 6 दिसंबर 2002 को मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन स्थित मैक डोनॉल्ड में हुआ था जिसमें 22 लोग घायल हुए थे. 

जबकि दूसरा धमाका 27 जनवरी 2003 को विले पार्ले रेलवे स्टेशन के बाहर स्थित सब्जी मार्केट में हुआ था. इसमें 30 लोग घायल हुए थे. 

वहीं, तीसरा धमाका 13 मार्च 2003 को मुलुंड स्टेशन पर लोकल ट्रेन में हुआ था. इसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी और 50 से ज्यादा घायल हो गए थे.

सिमी का हाथ था

इन धमाकों की जांच में पुलिस को पता चला था कि तीनों अलग-अलग तारीखों और स्थानों पर तो हुए लेकिन इनका संबंध सिमी मॉड्यूल से ही था. इसके बाद तीनों मामलों को एक साथ जोड़कर मुकदमा शुरू किया गया. 

उस वक्त मौजूद पोटा कानून के तहत दर्ज मुकदमे में 16 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दायर किए गए. बाद में एक आरोपी को अदालत ने छोड़ दिया जबकि राशिद अहमद अब्दुल मलिक अंसारी और मोहम्मद सैयद सादिक तुराब अली नामक दो आरोपियों की मौत हो गई. बाकी बचे 13 में से 12 फिलहाल जमानत पर हैं. 

पुलिस द्वारा पकड़े गए अधिकांश आरोपियों द्वारा आठ साल की सजा काटी जा चुकी है. 

First published: 29 March 2016, 3:52 IST
 
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