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दूसरे ही साल में क्यों असफल सिद्ध हो रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना?

स्कंद विवेक धर | Updated on: 21 September 2016, 7:42 IST
(माइ गव डॉट इन)
QUICK PILL
  • केंद्र सरकार द्वारा जोश-खरोश के साथ पेश की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) पर फ्लॉप होने का खतरा मंडराने लगा है. 
  • केंद्रीय कृषि मंत्रालय से मिले कुछ एक्सक्लूसिव आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक कुल 2.53 करोड़ किसानों ने ही कृषि बीमा करवाया है, जबकि वर्ष 2014-15 में यह संख्या 3.69 करोड़ थी.

केंद्र सरकार द्वारा जोश-खरोश के साथ पेश की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) पर फ्लॉप होने का खतरा मंडराने लगा है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय से मिले कुछ एक्सक्लूसिव आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक कुल 2.53 करोड़ किसानों ने ही कृषि बीमा करवाया है, जबकि वर्ष 2014-15 में यह संख्या 3.69 करोड़ थी.

इन 2.53 करोड़ किसानों में भी बड़ी संख्या उन किसानों की है, जिन्होंने कृषि ऋण लिया हुआ है. मालूम हो, कृषि ऋण लेने वाले किसानों के लिए कृषि बीमा लेना अनिवार्य है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर केंद्र सरकार ने पिछले साल नई फसल बीमा योजना की योजना पेश की थी. इस साल जनवरी में राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना को हटाकर पीएमएफबीवाई को लागू कर दिया गया.

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार ने इस योजना के बूते अगले तीन वर्षों में कृषि बीमा का दायरा वर्तमान के 26 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने लक्ष्य बनाया था. हालांकि, पहले ही सीजन में योजना का हश्र देखकर कृषि मंत्रालय में हड़कंप मच गया है.

आठ सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 2.53 करोड़ किसानों ने ही अपनी फसलों का बीमा करवाया है. इसमें पीएमएफबीवाई के अलावा मौसम आधारित कृषि बीमा योजना के आंकड़े भी शामिल हैं.

इन आंकड़ों में अभी थोड़ा सुधार होने की उम्मीद है, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि ये 2014-15 में राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के तहत हुए 3.69 करोड़ के करीब भी नहीं पहुंचेगा.

किसानों का अविश्वास तो दूर करें पहले

पीएमएफबीवाई के इस हश्र पर टिप्पणी करते हुए कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा बताते हैं कि कोई भी किसान खुशी से बीमा लेना नहीं चाहता. उसे पता है कि प्रीमियम उसकी जेब से तो चला जाएगा, पर मुअावजा मिलेगा या नहीं? या कब मिलेगा? कितना मिलेगा? ये बीमा कंपनियों की मर्जी पर निर्भर है.

2.53 करोड़ किसानों में भी अधिकतर किसानों ने बीमा खुद नहीं लिया है, उन पर बैंकों ने जबरन थोप दिया है. उन्होंने कहा कि कोई भी कृषि बीमा योजना किसानों के हक में नहीं, बल्कि बीमा कंपनियों के हक में बनाई जाती है. जब तक इसे किसानों के हक में नहीं बनाया जाता और किसानों का विश्वास नहीं जीता जाता, तब तक कोई भी कृषि बीमा सफल होने वाली नहीं है.

अधिकतर किसानों ने 'मजबूरी' में लिया बीमा

पीएमएफबीवाई उन किसानों के लिए अनिवार्य है, जिन्होंने कृषि ऋण ले रखा हो. अब तक के आंकड़े बताते हैं कि पीएमएफबीवाई लेने वाले अधिकतर किसान वहीं हैं, जिनके ऊपर ऋण है. दूसरे शब्दों में उन्होंने मजबूरी में बीमा कराया है.

First published: 21 September 2016, 7:42 IST
 
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