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कांग्रेस के कुकर्म या खुद की करनी भोग रही है एनसीपी

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 September 2016, 7:48 IST

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता प्रफुल्ल पटेल ने सोमवार को कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए आरोप लगाया है कि राज्य में कांग्रेस की वजह से उनकी पार्टी को नुकसान हुआ. उन्होंने कांग्रेस को एनसीपी को बदनाम करने का भी दोषी ठहराया. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में राज्य में भाजपा-शिवसेना गठबंधन सरकार के सत्तारूढ़ होने से पहले राज्य विधानसभा में कांग्रेस-एनसीपी की गठबंधन सरकार थी.

राज्य के पूर्व कांग्रेसी मुख्य मंत्री पृथ्वीराज चव्हाण पर सीधा हमला करते हुए पटेल ने कहा कि दोनों दलों की जब राज्य की सत्ता में हिस्सेदारी थी, उस समय एनसीपी की बदनामी के लिए वह ही जिम्मेदार हैं. पूर्व केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि पिछले पांच सालों में कांग्रेस पार्टी, उसके कार्यकर्ताओं, समर्थकों और एनसीपी ने बहुत कुछ सहा है.

अप्रत्यक्ष रूप से एनसीपी नेता छगन भुजबल की गिरफ्तारी को लेकर पटेल ने कहा कि ये सभी घोटाले वास्तव में घोटाले थे ही नहीं. यह तो षडयंत्र था जिसे खुद कांग्रेस और पृथ्वीराज चव्हाण जैसे नेताओं ने हमें बदनाम करने के लिए रचा था. उन्हें अपने कई विरोधी भाजपा में नहीं, एनसीपी में दिखते थे. उनका ध्यान हमारा नुकसान करने पर केंद्रित था. वे समझदार थे और उन्होंने हमें नीचे गिरा दिया.

उनका यह बयान अकोला में होने जा रहे स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले आया है. उन्होंने अपनी बात जारी रखते हुए कहा कि एनसीपी का महाराष्ट्र में किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई गठबंधन नहीं है. उनकी टिप्पणियों से लगता है कि दोनों दलों में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. एनसीपी को नहीं लगता कि लम्बे समय तक कांग्रेस के साथ रहना उसके लिए लाभकारी रहेगा.

आरोप लगाए जाने के लिए जो समय तय किया गया, उससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं

उन्होंने यह भी कहा कि हम सब तरह से कांग्रेस का समर्थन नहीं करेंगे. यदि क्षेत्रीय स्तर पर लोगों को लगता है कि कांग्रेस के साथ सम्बंध बनाए रखना उचित होगा तो वे अपनी इच्छा से ऐसा कर सकते हैं. लेकिन अब से हमारी पार्टी का महाराष्ट्र अथवा देश की किसी भी पार्टी से कोई गठबंधन नहीं है.

हालांकि, आरोप लगाए जाने के लिए जो समय तय किया गया, उससे कई तरह के सवाल खड़े होते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद से दो साल से एनसीपी चुप्पी साधे हुए थी. राजनीतिक विश्लेषक इस बयान को अगले साल की शुरुआत में होने जा रहे बॉम्बे नगर निगम समेत अनेक स्थानीय निकाय चुनाव में तुरन्त राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति के रूप में देखते हैं.

एनसीपी के रुख की व्याख्या करते हुए वरिष्ठ पार्टी नेता तारिक अनवर कहते हैं कि यह हमला मुख्यतः चव्हाण पर था. जिनकी मुख्य मंत्री के रूप में कार्यशैली निरंकुश और मनमाने तरीके की थी. उन्होंने यह भी कहा कि हालांकि, कांग्रेस ने भी बाद में यह महसूस किया. उन्होंने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया. उन्होंने अपने निशाने पर सीधे एनसीपी को रखा न कि भाजपा या शिवसेना को.

अनवर ने इस बात पर बल दिया कि राष्ट्रीय स्तर पर एनसीपी के कांग्रेस के साथ सम्बंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा कि चव्हाण को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पराजय के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है. अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ उनका जो बर्ताव था, वह सभी को स्वीकार्य नहीं था. उन्होंने गठबंधन के मुद्द पर कांग्रेस नेतृत्व को भी गुमराह किया.

बताते चलें कि 2014 के आम चुनावों के परिणाम के बाद एनसीपी 144 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती थी तथा यह भी कि गठबंधन दल के बारी-बारी से मुख्यमंत्री बनें. कांग्रेस ने ऐसे किसी भी समझौते से इनकार कर दिया और एनसीपी से सलाह-मशविरे के बिना ही 118 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए जिससे दोनों दलों में हालात पेंचीदा हो गए.

तब कांग्रेस ने एनसीपी के 15 साल के गठबंधन को तोड़ते हुए राज्य में समाजवादी पार्टी के साथ समझौता कर लिया. इस बीच कांग्रेस ने दोनों दलों के बीच अनबन को खारिज करते हुए इसे अफवाह करार दिया है और इसे क्षेत्रीय कारण बताया है जहां अगले माह चुनाव होने हैं.

कांग्रेस ने भी मान लिया है कि चव्हाण के कार्यकाल के दौरान एनसीपी के साथ जो व्यवहार हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण था

महाराष्ट्र के एक कांग्रेसी नेता ने कहा कि इन आरोपों में कुछ नया नहीं है, और कांग्रेस ने भी मान लिया है कि चव्हाण के कार्यकाल के दौरान एनसीपी के साथ जो व्यवहार हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण था. हालांकि, इससे हमारे सम्बंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

आश्चर्यजनक रूप से, ये टिप्पणियां एनसीपी सुप्रीमो के उस कथन के बाद आईं हैं जिसमें उन्होंने पार्टी की राज्य इकाइयों के प्रमुखों से कहा है कि वे चुनाव वाले राज्यों में समझौते के लिए इच्छुक दलों से वार्ता की शुरुआत कर सकते हैं. एनसीपी मुखिया विशेषकर कांग्रेस के साथ उत्तर प्रदेश, गोवा, गुजरात और बीएमसी के चुनाव में गठबंधन के इच्छुक दिखाई पड़ते हैं.

अपनी प्रतिक्रिया में कांग्रेस ने उनके अनुरोध को ज्यादा तवज्जो नहीं दी है और कहा है कि वह इन राज्यों में अपनी मजबूती के लिए धीरे-धीरे चलने की योजना बना रही है. पिछले कुछ सालों से एनसीपी ने कई राज्यों में अपना आधार खोया है. विशेषकर महाराष्ट्र में, जहां वह वर्ष 2014 के चुनाव में सिर्फ 41 सीट ही जीत सकी थी.

उसने 278 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे. 2009 में, जब एनसीपी का कांग्रेस के साथ गठबंधन था, पार्टी को 113 सीटों में से 62 पर जीत हासिल हुई थी.

First published: 14 September 2016, 7:48 IST
 
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