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दुर्गा पूजाः बीरभूम के मिराती गांव में पोल्टू उर्फ़ प्रणब दा का इंतज़ार बना रहेगा

सुलग्ना सेनगुप्ता | Updated on: 9 October 2016, 7:56 IST
(प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया )
QUICK PILL
  • राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी दुर्गा पूजा मनाने के लिए पश्चिम बंगाल स्थित अपने गांव मिराती जाते रहे है. वहां उनसे मुलाक़ात करने वालों का हुजूम उमड़ पड़ता है.
  • हर साल की तरह से इस साल भी मुखर्जी एक श्रृद्धालु की तरह संध्या आरती करेंगे. नवमी के दिन वह सांधी पूजा की कुछ विशेष पूजा-अर्चना करेंगे. उन्होंने महासप्तमी के दिन चंडी का पाठ भी किया है.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने तय किया है कि साल 2017 में कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद वह डॉ. एपीजी कलाम रोड के बंगला नम्बर, 34 में रहेंगे. इस खबर से उनके जन्मस्थान बीरभूम जिले के मिराती गांव के लोग उदास हैं. गांव के लोगों की तो ख्वाहिश थी कि उनके सबसे प्यारे पोल्टू दा (प्रणब मुखर्जी) अपना कार्यकाल पूरा हो जाने के बाद उनके साथ रहने के लिए वापस आ जाएंगे.

मुखर्जी के लम्बे समय तक सहयोगी रहे 65 वर्षीय रॉबी छत्तोराज कहते हैं कि इस फ़ैसले के पीछे मुखर्जी की कुछ राजनीतिक मजबूरियां रहीं होंगी लेकिन हम खुश हैं कि कम से कम वह हर साल दुर्गा पूजा पर अपने घर आते तो हैं और यहां रहकर विधि-विधान से पूजा सम्पन्न करते हैं. इस साल भी मुखर्जी शुक्रवार (7 अक्टूबर) को अपने पैतृक गांव पहुंच गए हैं. वे दुर्गा पूजा के आयोजन में भाग लेते हैं. वे यहां 11 अक्टूबर तक रहेंगे. विसर्जन के बाद ही वह दिल्ली जाएंगे.

काम पहले

प्रणब मुखर्जी की बड़ी बहन 86 वर्षीया अन्नपूर्णा भी यही चाहती थीं. वह कहतीं हैं कि जब मैंने अखबार में पढ़ा कि प्रणब ने दिल्ली मे रहने का फ़ैसला किया है तो मैं उदास हो गई. मगर वह अच्छे से रहें, उनकी सेहत ठीक रहे, बस मेरी यही कामना है.

मिराती गांव में रहने वाले उनके रिश्तेदारों का कहना है कि प्रणब के लिए अपना काम और राजनीतिक अनिवार्यताएं हमेशा प्राथमिकता पर रहीं हैं. वह सालों से इसी रास्ते पर चलते रहे हैं. उन्होंने यह मान लिया है कि वह उनके साथ नहीं रहेंगे, पर उन्हें उम्मीद है कि किसी ना किसी दिन मुखर्जी उनके साथ अपने गांव में रहेंगे और मिराती में अपने घर में रहकर अपने तरीके से वक़्त बिताएंगे.

मुखर्जी के एक पुराने मित्र चौधरी पुराने दिनों को याद करते हुए कहते हैं कि पोल्टू दा का पैतृक घर गांव में सभी तरह की सांस्कृतिक और खेल गतिविधियों का केन्द्र हुआ करता था. वे याद करते हुए कहते हैं कि वे और उनके मित्र कीर्ति और बादल घंटों पोल्टू दा के घर में रहते थे और समय कब बीत जाता था, पता भी नहीं चलता था.

वह कहते हैं कि पोल्टू दा हम लोगों को दिन भर किसी न किसी काम में व्यस्त रखे रहते थे. वह पढ़ाकू थे. मुझे अच्छी तरह याद है कि वे अपने पिता के साथ खबरों पर चर्चा किया करते थे. इन चर्चाओं में उनकी गहरी रुचि होती थी.

मिराती में मुखर्जी के घर के बगल में रहने वाले एक स्कूल के अध्यापक कहते हैं कि मुखर्जी राजनीतिक विजनरी हैं. इसी के चलते उन्होंने नई दिल्ली में रहने के लिए तय किया है.

विशेष पूजा

हर साल की तरह से इस साल भी मुखर्जी एक श्रृद्धावान भक्त की तरह सन्ध्या आरती करेंगे. नवमी के दिन वह सांधी पूजा की कुछ विशेष पूजा-अर्चना करेंगे. उन्होंने महासप्तमी के दिन चंडी का पाठ भी किया है.

रॉबी छत्तोराज कहते हैं कि हम सभी दुर्गा पूजा पर दादा का इंतजार करते हैं और यह इंतजार बेसब्री से रहता है. हमें उनके साथ समय बताने का अवसर मिलता है और हम लोग पुरानी यादों में खो जाते हैं. छत्तोराज के अनुसार सुरक्षा के भारी इंतजामों को नजरअंदाज करते हुए वह लोगों से खुले तौर पर मिलते हैं. इनमें गांव के लोग, राजनीतिक नेता, शिक्षाविद् भी होते हैं. वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी गांव में आते हैं.

दिन में पूजा के धार्मिक अनुष्ठान करने के बाद उनका सभी से अनुरोध होता है कि कोई खाना खाए बिना न जाए. वह यह भी सुनिश्चित करते हैं कि सभी लोग भोजन करें.

First published: 9 October 2016, 7:56 IST
 
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