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प्रणब मुखर्जी ने नहीं मानी कांग्रेस के नेताओं की बात, कहा- RSS कार्यक्रम में जाकर दूंगा जवाब

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 June 2018, 12:52 IST

पूर्व राष्ट्रपति और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी 7 जून को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के काडरों को संबोधित करने आरएसएस हेडक्वाटर नागपुर जा रहे हैं. इसे लेकर उन पर खूब सवाल उठ रहे हैं. कांग्रेसी हतप्रभ हैं और उनसे  आरएसएस के कार्यक्रम में शामिल न होने की अपील भी कर रहे हैं.

आरएसएस के न्योते पर प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को पहली बार चुप्पी तोड़ी. उन्होंने  कहा कि इस बारे में कई लोगों ने पूछा, लेकिन जवाब नागपुर में दूंगा. पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि वे संघ के कार्यक्रम में जाने पर अभी कुछ भी नहीं कहना चाहते. 

बता दें कि आरएसएस ने 7 जून को अंतिम वर्ष के स्वयंसेवकों के विदाई संबोधन के लिए पूर्व राष्ट्रपति को आमंत्रित किया है. इस कार्यक्रम में देशभर से 45 साल से कम उम्र के करीब 800 कार्यकर्ता आरएसएस हेडक्वार्टर कैंप में शामिल होंगे. 25 दिनों से चल रहे कार्यक्रम के समापन में 7 जून को मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व राष्ट्रपति संबोधन देंगे. संघ के न्योते को उन्होंने स्वीकार कर लिया है.

गौरतलब है कि कांग्रेस और आरएसएस दो विपरीत विचारधारा वाले संगठन रहे हैं. आरएसएस के मुख्यालय नागपुर में हर साल ऐसा कार्यक्रम होता आया है. इससे पहले इस कार्यक्रम का नाम ऑफिसर्स ट्रैनिंग था. लेकिन अब इसका नाम बदलकर संघ शिक्षा वर्ग कर दिया गया है.

शिक्षा ग्रहण करने के बाद आरएसएस के स्वयंसेवक पूर्णकालिक प्रचारक बन सकते हैं. इसके बाद ये प्रचारक आजीवन देश में संघ की विचारधारा के साथ काम करते हैं.

 

जब प्रणब मुखर्जी रायसीना हिल्स में रहते थे, तब आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत एक बार उनसे मिलने पहुंचे थे. इस पर राज्यसभा सांसद और भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा था कि प्रणब मुखर्जी रिटायर हो गए हैं, वे पहले कांग्रेस में रहे हैं, लेकिन क्या वे बदल नहीं सकते.

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स्वामी ने बताया कि जवाहर लाल नेहरू ने गणतंत्र दिवस में आरएसएस की एक टोली भेजने को कहा था.  लाल बहादुर शास्त्री ने भी ऐसा किया था. मोरबी में बाढ़ और भूकंप में आरएसएस ने जो काम किया था उसकी तारीफ इंदिरा गांधी ने भी की थी.

First published: 3 June 2018, 12:40 IST
 
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