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प्रणब मुखर्जी आत्मकथा: राजीव पर नरम, नरसिम्हा राव पर गरम

सोमी दास | Updated on: 10 February 2017, 1:53 IST
QUICK PILL
  • प्रणब मुखर्जी ने अपनी किताब में बाबरी विध्वंस के लिए नरसिम्हा राव को जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी सख्त आलोचना की है लेकिन सिख दंगों को लेकर उन्होंने राजीव गांधी के खिलाफ वह सख्त तेवर नहीं अपनाया है.
  • मुखर्जी शाहबानो मामला और राम जन्मभूमि को खोले जाने के फैसले को राजीव गांधी का \'एरर ऑफ जजमेंट\' करार देते हैं.

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की किताब द टर्बुलेंट ईयर्स का दूसरा संस्करण पूरी कहानी बयां नहीं करता है. मुखर्जी की यह किताब तीन संस्करणों में प्रकाशित होनी है. करीब 50 सालों तक राजनीतिक जीवन में रहे मुखर्जी के पास बताने को बहुत कुछ है. लेकिन उन्होंने यह साफ कर दिया है कि कुछ ऐसी बातें हैं जो कभी सामने नहीं आएंगी और उन्हीं के साथ इस दुनिया से विदा हो जाएंगी. मुखर्जी ने अपनी किताब में केवल अपनी निजी जीवन यात्रा को ही साझा किया है.

मुखर्जी की नई किताब हमारी जिज्ञासाओं को शांत नहीं करती है और यह कुछ ऐसे नए खुलासे नहीं करती है जिससे हमेें चौंकने का मौका मिले. मुखर्जी के राजनीतिक जीवन का पूरा हिस्सा बतौर कांग्रेसी मंत्री का रहा है और वह लगातार सरकार के पक्ष में बोलते रहे. मुखर्जी की छवि वैसे नेता की रही है जो कभी भी बचाव की मुद्रा में नहीं रहा.

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इंदिरा: शक्ति की प्रतिमूर्ति

मुखर्जी ने 1980-1996 के बीच देश के तीनों प्रधानमंत्रियों मसलन इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और पी वी नरसिम्हा राव के कार्यकाल का मूल्यांकन किया है.

मुखर्जी इंदिरा गांधी का वफादार रहे और उन्होंने उन्हें 'शक्ति का अवतार' बताया है. वह बताते हैं, 'इंदिरा अभी तक के सभी प्रधानमंत्रियों के मुकाबले श्रेष्ठ रही हैं. यहां तक कि वह अपने पिता जवाहर लाल नेहरू से भी बड़ी थी जो खुद दूरगामी नजरिए वाले व्यक्ति थे.'

राजीव गांधी: जिन्होंने कुछ अक्षम्य गलतियां की

मुखर्जी की किताब का एक बड़ा हिस्सा राजीव गांधी पर फोकस है जिस दौरान कांग्रेस से उन्हें अलगाव की स्थिति में जाना पड़ा. इसकी परिणति आखिर में कांग्रेस से मुखर्जी के निष्कासन के तौर पर हुई. मुखर्जी को कांग्रेस से छह साल के लिए निकाला गया था. 

इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी को जबरदस्त बहुमत मिला तो नई सरकार में मुखर्जी को जगह नहीं मिली. लेकिन इसके बावजूद मुखर्जी को किसी बात का मलाल नहीं रहा. वह बताते हैं, 'राजीव गांधी ने कुछ गलतियां की और कुछ मैंने.'

हालांकि मुखर्जी 1984 के दौरान हुए सिख विरोधी दंगों में राजीव गांधी सरकार की विफलता पर कुछ सवाल उठाते हैं. इस दंगे में करीब 2,000 सिख मारे गए थे.

मुखर्जी लिखते हैं, 'यह सच्चाई है कि सरकार इसके लिए तैयार नहीं थी. सरकार इंदिरा गांधी की हत्या के बाद की स्थिति और दंगों को लेकर तैयार नहीं थी. हर परिपक्व सरकार के पास इस तरह की घटना से निपटने का एक तरीका होता है. दुर्भाग्यवश पूरा देश शोक में था और असामाजिक तत्वों ने इसका फायदा उठाया जिसकी वजह से कई लोगों को अपनी जिंदगी गंवानी पड़ी.' मुखर्जी इसे राजीव गांधी का 'एरर ऑफ जजमेंट' बताते हैं.

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उन्होंने कहा, 'शाहबानो फैसले और मुस्लिम वुमन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट ऑन डिवोर्स) बिल पर राजीव के फैसले की आलोचना हुई और इससे उनकी आधुनिक छवि को झटका लगा. एक फरवरी 1986 को राम जन्मभूमि को खोले जाने का फैसला शायद दूसरी बड़ी गलती थी. लोगों को लगता है कि इन फैसलों से बचा जा सकता था. बोफोर्स मामले की वजह से 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को नुकसान हुआ लेकिन आज तक राजीव के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं किया जा सका है.' भोपाल गैस त्रासदी पर मुखर्जी ने कुछ भी बोलने से परहेज किया है.

हालांकि उन्होंने इस बात का जरूर जिक्र किया है कि किस तरह से प्रधानमंत्री भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड का राष्ट्रीयकरण किए जाने के बारे में सोच रहे थे. मुखर्जी ने इस फैसले के खिलाफ अपनी राय दी थी और कहा था कि इससे 'भविष्य में भारत में होने वाले निवेश पर असर पड़ेगा.'

बाबरी मस्जिद को टूटने से नहीं बचा पाना नरसिम्हा राव सरकार की सबसे बड़ी विफलता थी

मुखर्जी ने जिस तरह से इंदिरा और राजीव का बचाव किया है उस तरीके से उन्होंने राव का पक्ष नहीं लिया है. मुखर्जी बाबरी मामले में राव के रवैये के कटु आलोचक रहे हैं. मुखर्जी दंगों के वक्त मंत्रिमंडल में शामिल नहीं थे.

वह लिखते हैं, 'बाबरी मस्जिद का विध्वंस नहीं रोक पाना राव की सबसे बड़ी विफलता थी. उन्हें इस मामले में बातचीत की जिम्मेदारी एनडी तिवारी जैसे नेता को सौंपनी चाहिए थी. बाद में एक निजी बैठक में मैं राव पर फट पड़ा. मैंने पूछा कि क्या आपके पास इस खतरे के बारे में सलाह देने वाला कोई नहीं था? क्या आपको इसके वैश्विक परिणाम के बारे में अंदेशा नहीं था? कम से कम अब तो आपको सांप्रदायिक तनाव दूर करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.'

गौर करने वाली बात यह भी है कि मुखर्जी जिस तरह से बाबरी विध्वंस पर अपना आक्रोश जाहिर करते हैं वह तेवर सिक्ख दंगों पर नहीं दिखाई देता है.

वह लिखते हैं, 'दंगों में मासूमों के मारे जाने को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. इन दंगों की कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए. सच्चाई यह है कि यह इंदिराजी की हत्या का बदला लेने के नाम पर भड़का. यह न केवल उनके नाम पर लगा धब्बा है बल्कि इससे देश पर भी धब्बा लगा.'

दिलचस्प तौर पर बीजेपी ने मुखर्जी का समर्थन किया है. बीजेपी ने कहा, 'यह पुस्तक बताती है कि राजीव गांधी ने प्रणब मुखर्जी के साथ अन्याय किया.' बीजेपी नेता सिद्धार्थनाथ सिंह बताते हैं, 'जो भी मुखर्जी ने कहा वह सच्चाई है. हम मुखर्जी की क्षमताओं का सम्मान करते हैं और विपक्ष भी उनके नेतृत्व का लोहा मानता है. इसलिए उनके साथ अन्याय हुआ और मुखर्जी ने अपनी इस पीड़ा को अपनी किताब में जाहिर किया है.'

First published: 31 January 2016, 9:19 IST
 
सोमी दास @catchhindi

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