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प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार के कुलदेवता पर जूते पहनकर चढ़ाए फूल, भागवत ने कही यह बात

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 June 2018, 9:05 IST

7 जून की शाम पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी आरएसएस के तृतीय वर्ष शिक्षा वर्ग के समापन समारोह में पहुंचे थे. इससे पहले उन्होंने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के जन्मस्थल पहुंचकर उनको श्रद्धांजलि भी दी. इस दौरान प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार के कुलदेवता पर जूता पहनकर फूल चढ़ाया. जिसे लेकर  संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि भावना अच्छी होनी चाहिए, कोई बात नहीं.

दरअसल, जब प्रणब मुखर्जी संघ के संस्थापक हेडगेवार के निवास स्थान पर गए तो उन्हें हेडगेवार के कुलदेवता को पुष्प अर्पित करना था. उस समय उन्होंने अपने पैरों में जूते पहने थेे. उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत से कहा कि उन्होंने पैरों में जूते पहने हुए हैं.

 

इस पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने उनसे कहा कि भावना अच्छी होनी चाहिए, आप आइए पुष्प अर्पित कीजिए, कोई बात नहीं. इसके बाद प्रणब मुखर्जी ने हेडगेवार के कुलदेवता को जूते पहनकर ही पुष्प अर्पित कर दिया.

बता दें कि आरएसएस के कार्यक्रम में पहुंचकर प्रणब मुखर्जी ने देश की संस्कृति और उसकी पहचान की विशेषता का उल्लेख करते हुए कई बातें कही. उन्होंने कहा कि मैं यहां पर राष्ट्र, राष्ट्रवाद और देशभक्ति पर बोलने आया हूं. उन्होंने कहा कि देश के लिए समर्पण ही देशभक्ति है. मुखर्जी ने कहा कि भारत के दरवाजे पहले से खुले हुए हैं. भारत खुला हुआ देश रहा है. 

गौरतलब है कि उनके द्वारा RSS के कार्यक्रम में शामिल होने का न्यौता स्वीकार करने का पहले कांग्रेस नेताओं ने जमकर विरोध किया था. लेकिन अब कांग्रेस पार्टी उनकी तारीफ कर रही है. प्रणब के भाषण के बाद कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति ने आरएसएस को उसके मुख्यालय में ही आईना दिखाने का काम किया है.

पढ़ें- 'प्रणब मुखर्जी ने संघ के कार्यक्रम में राष्ट्रवाद पर RSS को दिखाया आईना'

सूरजेवाला ने कहा कि प्रणब दा ने कहा है कि विविधता, सहिष्णुता और बहु-सांस्कृतिकवाद ही लोकतंत्र का भारतीय तरीका है. उनके इस भाषण ने आरएसएस को आईना दिखाने का काम किया है. सुरजेवाला ने कहा कि मुखर्जी ने आरएसएस को भारत का इतिहास याद दिलाया है. उन्होंने बताया है कि भारत की सुंदरता विचारों, धर्मों, भाषाओं की विविधता के प्रति सहिष्णुता में है. क्या आरएसएस सुनने को तैयार है?

First published: 8 June 2018, 9:05 IST
 
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