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उत्तराखंड संकट: अध्यादेश पर राष्ट्रपति का दस्तखत

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 April 2016, 14:08 IST

उत्तराखंड में 15 दिन से चल रहा सियासी संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. राज्य का बजट पास करने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जो अध्यादेश जारी किया था, उस पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपने दस्तखत कर दिए हैं.

बुधवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में अध्यादेश पर मुहर लगी थी. राज्य में अभी राष्ट्रपति शासन लागू है. हालांकि नैनीताल हाईकोर्ट में केंद्र के फैसले को दी गई चुनौती पर अभी अंतिम फैसला नहीं आया है.

पहले हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 मार्च को पर्यवेक्षक की मौजूदगी में बहुमत परीक्षण के निर्देश दिए थे, लेकिन अगले ही दिन कोर्ट की डिवीजन बेंच ने फ्लेर टेस्ट पर रोक लगाते हुए राष्ट्रपति शासन बरकरार रखने का आदेश दिया था.

नैनीताल हाईकोर्ट में इस मामले में सात अप्रैल को अगली सुनवाई होनी है.

पढ़ें: उत्तराखंड में फिर टला बहुमत परीक्षण, हाईकोर्ट ने लगाई रोक

उलझ गया था उत्तराखंड का बजट

उत्तराखंड में बजट सत्र के दौरान स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने विनियोग विधेयक को ध्वनि मत से पारित बताया था. स्पीकर का ये फैसला सवालों के घेरे में है.

18 मार्च को सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के नौ विधायकों ने मनी बिल पर मत विभाजन की मांग की थी. लेकिन स्पीकर ने बजट पर वोटिंग की विपक्ष की मांग नहीं मानी. जटिल सियासी हालात में राज्य का बजट उलझ गया था.

इससे राज्य में एक अप्रैल से खर्च का इंतजाम नहीं हो सकता था. लिहाजा केंद्र की ओर से अध्यादेश का रास्ता निकाला गया. 

बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई टली


इस बीच नैनीताल हाईकोर्ट ने बागी विधायकों की याचिका पर 11 अप्रैल तक के लिए सुनवाई टाल दी है. कांग्रेस के नौ बागी विधायकों में से छह ने कोर्ट में स्पीकर के फैसले को चुनौती दी थी.

स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल ने नौ कांग्रेस विधायकों को अयोग्य ठहराया था. बागी कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि राष्ट्रपति शासन लगने के बाद स्पीकर ने जो फैसला लिया वो गलत है.

याचिका में कहा गया था कि राष्ट्रपति शासन लगने के साथ ही विधानसभा को निलंबित रखा गया है. ऐसे में विधानसभा अध्यक्ष का निर्णय दुर्भावना से प्रेरित है.

जस्टिस यूसी ध्यानी की सिंगल बेंच इस मामले में अब 10 दिन बाद सुनवाई करेगी.

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First published: 1 April 2016, 14:08 IST
 
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