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शहाबुद्दीन की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे प्रशांत भूषण

अभिषेक पराशर | Updated on: 11 February 2017, 6:42 IST
QUICK PILL
  • भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ने के लिए मशहूर और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट प्रशांत भूषण ने बिहार के चर्चित तेजाब कांड के पीड़ित परिवार को इंसाफ दिलाने के लिए राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व सांसद और माफिया मोहम्मद शहाबुद्दीन को मिली जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है.
  • माफिया शहाबुद्दीन को राजीव रोशन हत्याकांड मामले में पटना हाई कोर्ट मामले से जमानत मिली है. शहाबुद्दीन पिछले 12 सालों से जेल में बंद था.
  • प्रशांत भूषण ने कहा, \'हाईकोर्ट का कुख्यात गैंगस्टर और नेता शहाबुद्दीन को जमानत दिया जाना शर्मनाक है. मैंने पीड़ित की तरफ  से शहाबुद्दीन की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है.\'
  • बिहार में आरजेडी गठबंधन की सरकार बनने के साथ ही शहाबुद्दीन के दिन फिर गए थे. शहाबुद्दीन को पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया. जबकि बिहार सरकार ने उसे ए श्रेणी के हिस्ट्रीशीटर में शामिल कर रखा था.

भ्रष्टाचार के खिलाफ अदालती लड़ाई लड़ने के लिए मशहूर और सुप्र्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट प्रशांत भूषण ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के पूर्व सांसद और माफिया मोहम्मद शहाबुद्दीन को पटना हाई कोर्ट से मिली जमानत को चुनौती देने का फैसला किया है. शहाबुद्दीन पिछले 12 सालों से जेल में बंद था.

पूर्व सांसद और माफिया शहाबुद्दीन आईपीसी की धारा 302 (हत्या), धारा 307 (हत्या की कोशिश), धारा 364 (हत्या के मकसद से किया गया अपहरण), धारा 365 (किसी व्यक्ति को गलत तरीके से कैद कर रखने के मकसद से किया गया अपहरण), धारा 379 (चोरी), धारा 147 (दंगों के लिए सजा) और धारा 324 (खतरनाक हथियार से जानबूझकर नुकसान पहुंचाना) के तहत दो दर्जन से अधिक गंभीर अपराध के मामलों में आरोपी है.

शहाबुद्दीन को 2009 में चुनाव आयोग ने चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित कर दिया था जिसके बाद आरजेडी ने उसकी पत्नी हिना शहाब को उम्मीदवार बनाया लेकिन वह चुनाव हार गई.

प्रशांत भूषण ने कहा, 'हाई कोर्ट का कुख्यात गैंगस्टर और नेता शहाबुद्दीन को जमानत दिया जाना शर्मनाक है. मैंने पीड़ित की तरफ  से शहाबुद्दीन की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है.'

भूषण ने कहा, 'पीड़ित (राजीव रौशन) के परिवार वालों ने मुझे फोन कर मदद मांगी और मैंने सुप्रीम कोर्ट में उसकी जमानत को रद्द किए जाने की अपील करने का फैसला लिया है.' 

सिवान के माफिया और फिर राष्ट्रीय जनता दल के सांसद बने शहाबुद्दीन को राजीव रौशन हत्या मामले में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिली है.

राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को राजीव रौशन हत्या मामले में पटना हाई कोर्ट से जमानत मिली है.

राजीव अपने दो भाइयों की हत्या के मामले में एकमात्र चश्मदीद गवाह थे. कोर्ट में गवाही देने के तीन दिन पहले सिवान में उनकी दिन दहाडे़ गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. पीड़ित परिवार ने इस जमानत को लेकर निराशा जताई थी.

राजीव रौशन के बुजुर्ग माता-पिता ने शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद कहा कि उन्हें अब जिंदगी का खतरा सता रहा है. उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन को जमानत देने में बिहार सरकार की भूमिका है.

13 मई, 2016 को सिवान में एक हिंदी अखबार के ब्यूरो चीफ राजदेव रंजन की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. 

इस हत्याकांड में शहाबुद्दीन के करीबी माने जाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है. उनकी हत्या के बाद मचे हंगामे के बाद सिवान जेल में बंद शहाबुद्दीन के सेल पर पुलिस का छापा पड़ा था और फिर उसे सिवान जेल से स्थानांतरित कर भागलपुर जेल भेज दिया गया था.

दिवंगत पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी ने भी शहाबुद्दीन की रिहाई के बाद राज्य सरकार से अपने परिवार के लिए सुरक्षा मांगी है.  

राजदेव रंजन की पत्नी आशा इस मामले में गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिल चुकी है. हत्याकांड को लेकर चौतरफा दबाव में घिरी बिहार की गठबंधन सरकार ने मामले की सीबीआई से जांच कराए जाने की सिफारिश की थी. हालांकि अभी तक इस मामले में जांच शुरू नहीं हो पाई है. 

आशा रंजन ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने का समय मांगा है.

न्याय को लेकर उठे सवाल

शहाबुद्दीन को जमानत मिलने के बाद राजीव रौशन हत्याकांड और राजदेव रंजन हत्याकांड की जांच प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है. साथ ही जमानत मिलने से पहले की परिस्थिति और जमानत मिलने के बाद शहाबुद्दीन के बयान के बाद सरकार की मंशा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं. 

बिहार में जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस की गठबंधन की सरकार बनने के कुछ ही महीनों के भीतर अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री अब्दुल गफूर ने जेल के भीतर जाकर शहाबुद्दीन से मुलाकात की थी. 

गफूर से जब इस मुलाकात के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने शहाबदुद्दीन को अपराधी मानने से ही इनकार कर दिया था. वहीं आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भी इस मुलाकात का बचाव किया था.

वहीं जेल से निकलने के बाद शहाबुद्दीन ने नीतीश कुमार को परिस्थितियों की वजह से बना मुख्यमंत्री करार देते हुए कहा कि वह आरजेडी मुखिया लालू प्रसाद यादव को ही अपना नेता मानते रहे हैं. शहाबुद्दीन, लालू प्रसाद यादव का बेहद करीबी रहा है.

विपक्ष का कहना है कि सरकार ने शहाबुद्दीन की रिहाई का रास्ता साफ किया. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता और जेडीयू-बीजेपी सरकार में उप मुख्यमंत्री रहे सुशील कुमार मोदी ने कहा, 'सरकार ने बेहद सधे हुए तरीके से शहाबुद्दीन के जमानत का रास्ता तैयार किया. सरकार को यह साफ करना चाहिए कि वह राजीव रौशन हत्याकांड के दो साल बाद भी मामले की सुनवाई क्यों नहीं शुरू करा पाई.'

बिहार में आरजेडी गठबंधन की सरकार बनने के बाद शहाबुद्दीन को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया

शहाबुद्दीन के जेल से बाहर आने को लेकर केवल विपक्ष ही नहीं बल्कि राजीव रौशन और राजदेव रंजन का परिवार भी सरकार की भूमिका को संदेह की निगाहों से देख रहा है. शहाबुद्दीन के रिहा होने के बाद इन दोनों हत्याकांड की निष्पक्ष जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. 

सुप्रीम कोर्ट में शहाबुद्दीन को मिली जमानत को चुनौती देने का फैसला कर चुके प्रशांत भूषण ने कहा, 'ऐसे खतरनाक अपराधी को जमानत देना समाज के लिए खतरा है. जैसे ही मुझे मुकदमे से जुड़े कागजात मिलेंगे, मैं इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट जाउंगा.'

वहीं बिहार सरकार पटना हाईकोेर्ट की तरफ से माफिया शहाबुद्दीन को मिली जमानत को डिवीजन बेंच में चुनौती दिए जाने के बारे में कुछ भी कहने से बच रही है.

लालू से नजदीकी रिश्ते

बिहार में आरजेडी गठबंधन की सरकार बनने के साथ ही शहाबुद्दीन के दिन फिर गए थे. शहाबुद्दीन को पहले पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल किया गया. जबकि बिहार सरकार ने उसे ए श्रेणी के हिस्ट्रीशीटर में शामिल कर रखा था. ए श्रेणी में उस तरह के अपराधियों को रखा जाता है जिसके सुधरने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है.

वहीं 2005 में सिवान के तत्कालीन जिलाधिकारी सीके अनिल ने अपनी रिपोर्ट में शहाबुद्दीन को आदतन अपराधी करार दिया था. उनकी इस रिपोर्ट को सरकार ने संसदीय विशेषाधिकार समिति को भेजा था. तब अनिल ने शहाबुद्दीन को सिवान जिले से छह महीने के लिए तड़ीपार कर दिया था. 

शहाबुद्दीन के जेल से बाहर निकलने के बाद आरजेडी के कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने उसकी शानदार आगवानी की. शहाबुद्दीन के समर्थन में वहां जिंदाबाद के नारे लगे और उसके काफिले में करीब 300 से अधिक गाड़ियों का हुजूम शामिल रहा. 

भागलपुर में आरजेडी के सांसद शैलेश कुमार ने शहाबुद्दीन का स्वागत किया वहीं सरकार के अन्य विधायकों ने भी कुख्यात गैंगस्टर की आगवानी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

जेल से निकलने के तत्काल बाद शहाबुद्दीन ने पहली बयानबाजी करते हुए लालू प्रसाद को अपना नेता बता डाला. उसने कहा, 'हर कोई जानता है कि मुझे फंसाया गया. मुझे मिली जमानत का राजनीति से कोई संबंध नहीं है.' उसने कहा, 'लालू और मेरा रिश्ता बेहद मजबूत है और इसे बताने की जरूरत नहीं है.'

First published: 12 September 2016, 2:32 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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