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अपने खिलाफ आ रही खबरों से अशांत हुए प्रशांत!

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 7 June 2016, 23:02 IST
(कैच न्यूज)

लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर अब कांग्रेस के खेवनहार हैं.

अगले साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. कांग्रेस ने पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनावी अभियान की कमान संभालने के लिए प्रशांत किशोर को चुना है.

पिछले एक महीने से प्रशांत किशोर और उनकी टीम से जुड़ी तमाम खबरें विभिन्न मीडिया संस्थानों में चल रही है. अचानक से यह बात देखने में आ रही है कि ज्यादातर खबरें प्रशांत किशोर और कांग्रेस के अंदरूनी टकरावों से जुड़ी हुई हैं.

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जब प्रशांत और उनकी टीम ने 2013 में नरेंद्र मोदी के चुनावी अभियान से जुड़े थे तो किसी ने उनके बारे में नहीं सुना था. प्रशांत किशोर या उनकी टीम से जुड़ी कोई भी खबर मीडिया में सुर्खियां नहीं बनती थी.

मई, 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार आने और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रशांत पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आए. हालांकि, उस समय भी उनके और काम करने के तरीके के बारे में किसी को पता नहीं था.

पिछले महीने खबर आई थी कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह व प्रशांत किशोर में मतभेद पैदा हो गया है

प्रशांत किशोर के बारे में एक बात उनके आस पास के लोग एक सुर में बताते हैं कि वे मीडिया से दूर रहना पसंद करते हैं. बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जब प्रशांत ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए काम करना शुरू किया, तब जाकर मीडिया ने उन्हें गंभीरता से लेना शुरू कर दिया. उनसे जुड़ी खबरों को मीडिया में जगह मिलनी शुरू हो गई.

बिहार चुनाव में उन्होंने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आईपैक) बनाकर 'बिहार में बहार हो, नीतीशे कुमार हों' के नारे के साथ नीतीश की जीत की पटकथा लिखने में भूमिका निभाई.

आठ नवंबर को जब बिहार चुनाव का परिणाम सामने आया तो पहली बार प्रशांत सार्वजनिक रूप से दिखे. मीडियावालों से मिलने के लिए जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपने आवास से बाहर निकले तो वह अकेले नहीं थे, उनके साथ 37 वर्षीय प्रशांत भी थे, जिसे नीतीश ने कैमरे के सामने गले से लगाया.

बिहार चुनाव के बाद अब पिछले सात महीनों से प्रशांत और आईपैक से जुड़ी कोई न कोई कहानी हर दिन मीडिया में होती है. लोकसभा चुनाव और बिहार चुनाव में मीडिया का ज्यादा फोकस मोदी और नीतीश पर रहा.

प्रशांत किशोरः कुछ कही, कुछ अनकही कहानी

अब मामला पलट गया है. जब से प्रशांत ने कांग्रेस के लिए काम करना शुरू किया है, कांग्रेस से ज्यादा चर्चा उन पर होने लगी है.

पिछले महीने खबर आई थी कि पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह व प्रशांत किशोर में मतभेद पैदा हो गया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को इसका खंडन करना पड़ा. पंजाब कांग्रेस के प्रभारी व राष्ट्रीय महासचिव शकील अहमद को कहना पड़ा कि दोनों के बीच मतभेद का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि पार्टी के संगठन संबंधी फैसले और टिकट बंटवारे में प्रशांत किशोर की कोई भूमिका नहीं है.

इस बीच ऐसी भी खबरें चलने लगी कि प्रशांत कांग्रेस के पंजाब अभियान से किनारा कर सकते हैं. इसकी वजह कांग्रेस के विभिन्न घटकों में उनके प्रति मौजूद नकारात्मकता और गुटबाजी को बताया गया.

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इसके बाद अमरिंदर और प्रशांत किशोर दोनों ने अपने बीच किसी भी तरह के विवाद का खंडन किया. उनके बीच अब इस बात पर सहमति बन गई है कि वे पार्टी से संबंधित सियासी फैसले लेंगे जबकि प्रशांत प्रचार से संबंधित नीतियों को अंतिम रूप देंगे.

नकारात्मक खबरों से ही सही लेकिन प्रशांत ने उत्तर प्रदेश में उस कांग्रेस को चर्चा में ला दिया है

ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश का हाल है. मीडिया में आई खबरों के मुताबिक कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ और प्रदेश स्तर के नेताओं का मानना है कि प्रशांत का काम चुनाव का प्रबंधन करना है ना कि नेताओं को दिशा-निर्देश देना. इसके अलावा उत्तर प्रदेश के कांग्रेसी नेता उम्मीदवारों के चयन में उनकी भूमिका नहीं चाहते. बनारस, इलाहाबाद और लखनऊ में प्रशांत की बैठकों में कांग्रेसी आपस में खुलेआम भिड़ गए.

हालांकि, ऐसी खबरें हमेशा सूत्रों के हवाले से चली. प्रशांत किशोर के बेहद करीबी और पिछले तीन साल से उनके साथ काम कर रहे आईपैक के सदस्य ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि ऐसी नकारात्मक खबरें सिर्फ एक मीडिया संस्थान से ज्यादा आ रही है. उन्होंने कहा कि यह सोचने और समझने की बात है कि हमारे खिलाफ ही निगेटिव खबरें क्यों चल रही है?

उन्होंने बताया कि प्रशांत के हवाले से जो भी खबरें चलाई जा रही हैं वो सही नहीं है. उनके अनुसार प्रशांत कभी भी पब्लिक स्टेटमेंट नहीं देते हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि प्रशांत ऑफ द रिकॉर्ड कभी-कभी मीडिया के लोगों से बात करते हैं, लेकिन पत्रकार उसे कैसे छापते हैं यह उनका काम है.

कई मीडिया संस्थानों में यह खबर आई कि प्रशांत किशोर उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी या प्रियंका गांधी चुनावी चेहरा बनाना चाहते हैं. आईपैक के एक सदस्य कहते हैं, प्रशांत ने इन दोनों को चेहरा बनाने की बात कभी नहीं कही है. हालांकि, उन्होंने बताया कि कांग्रेस यूपी में किसी चेहरे के साथ चुनाव लड़ेगी. उन्होंने कहा कि हर दिन प्रशांत किशोर से जुड़ी दसियों खबरें छपती हैं और हर खबर का खंडन करना मुश्किल है.

प्रशांत की टीम के एक सदस्य ने बताया कि उनकी टीम उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की सीट घटाने या बढ़ाने नहीं आए बल्कि जीतने आए हैं. उनकी टीम कांग्रेस से मिलकर जीत के लिए हर संभव प्रयास करेगी.

यह थोड़ा आश्चर्यजनक हैं कि पिछले दो चुनावी कैंपेन को सफलतापूर्वक लीड करने वाली टीम टकराव वाली खबरों पर प्रतिक्रिया ना दें. पंजाब में कांग्रेस से ज्यादा आम आदमी पार्टी के चर्चे हैं और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस से ज्यादा बीजेपी और मायावती खबरों में रहती हैं.

हालांकि कुछ जानकार इसे भी प्रशांत की रणनीति का हिस्सा मानते हैं. नकारात्मक खबरों से ही सही लेकिन प्रशांत ने उत्तर प्रदेश में उस कांग्रेस को चर्चा में ला दिया है जिसके पास संगठन और पार्टी के नाम पर कुछ खास नहीं बचा है.

क्या चर्चा में बने रहने के लिए 'जानबूझकर' प्रशांत किशोर की टीम ऐसी खबरें मीडिया में लीक कर रही है? इस सवाल के जवाब में आईपैक के सदस्य कहते हैं कि उनकी ओर से ऐसा कुछ नहीं किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि अभी चुनाव में नौ महीने बाकी हैं और परिणाम अटकलों से बहुत अलग होंगे.

First published: 7 June 2016, 23:02 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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