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कांग्रेस और पीके एक-दूसरे से करेंगे किनारा?

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

लोकसभा चुनाव 2014 में नरेंद्र मोदी और बिहार विधानसभा चुनाव 2015 में नीतीश कुमार के चुनाव को सफलतापूर्व मैनेज कर चुके चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कांग्रेस से सही पटरी नहीं बैठ पा रही है.

खबरों के मुताबिक पंजाब और उत्तर प्रदेश में प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति प्रदेश के नेताओं के गले नहीं उतर रही है. यही वजह है कि दोनों प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं और प्रशांत के बीच क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर रस्साकशी चल रही है.

सूत्रों के मुताबिक प्रशांत किशोर के करीबियों का इस मामले में कहना है कि किशोर को लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब में कांग्रेसी नेताओं का विरोध अगर जारी रहता है, तो वह कांग्रेस पार्टी से दूरी बना सकते हैं.

प्रशांत किशोर की रणनीति का विरोध


गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी, उत्तर प्रदेश और पंजाब में पार्टी को जीत दिलाने के लिए प्रशांत किशोर को बतौर रणनीतिकार बनाकर लाए हैं. इसके लिए राहुल ने प्रशांत किशोर को काफी छूट दी है.

इसके बाद किशोर ने यूपी विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के पांच सूत्रीय योजना भी बना ली, लेकिन किशोर की रणनीति का प्रदेश के कांग्रेसी नेताओं द्वारा विरोध किया जा रहा है.

पंजाब में कैप्टन से मतभेद


वहीं दूसरी तरफ पंजाब में भी कांग्रेसी नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह और प्रशांत किशोर में कुछ मुद्दों पर मतभेद हो गया है.

इस मामले में सफाई देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शकील अहमद ने कहा कि पंजाब चुनाव को लेकर दोनों के बीच कोई मतभेद नहीं हैं, क्योंकि पार्टी के संगठन संबंधी फैसले और टिकट बंटवारे में प्रशांत किशोर की कोई भूमिका नहीं है.

इसके अलावा कांग्रेस के कुछ अन्य नेताओं ने का मानना है कि प्रशांत किशोर का काम चुनाव का प्रबंधन करना है, न कि प्रदेश के नेताओं को दिशा-निर्देश देने का.

First published: 18 May 2016, 2:15 IST
 
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