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असम में प्रशांत किशोर नहीं संभालेंगे कांग्रेस प्रचार अभियान की कमान

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • बिहार चुनाव में जेडी-यू, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन को जीत दिला चुके प्रशांत किशोर असम विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान नहीं संभाल रहे हैं.
  • प्रशांत किशोर असम में तरुण गगोई को आगे रख कर चुनाव लड़े जाने के पक्ष में नहीं थे. नेतृत्व में बदलाव किए जाने को लेकर कांग्रेस के साथ उनकी बात नहीं बन पाई.

असम में विधानसभा चुनाव की तारीख बिलकुल नजदीक आ चुकी है. इस बीच कांग्रेस के लिए खबर अच्छी नहीं है. प्रशांत किशोर ने असम में कांग्रेस के प्रचार अभियान को आगे बढ़ाने से हाथ पीछे खींच लिया है.

किशोर पिछले आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के प्रचार अभियान की कमान संभाल चुके हैं और इसके बाद उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार के प्रचार अभियान को भी संभाला था. दोनों ही चुनावों में उन्हें बेहद सफलता मिली. बिहार चुनाव के बाद वह प्रचार गुरु के तौर पर उभर चुके हैं.

बिहार चुनाव के बाद किशोर को असम में कांग्रेस की मदद करनी थी. खबरों के मुताबिक जेडी-यू के कुछ नेताओं ने इस दिशा में कुछ बैठक भी कराई. किशोर ने कुछ दिनों के लिए असम का दौरा किया ताकि वह वहां की चुनावी हकीकत को समझ सकें.

पार्टी के एक आतंरिक सूत्र ने बताया, 'जेडी-यू के के सी त्यागी दोनों पक्षों के बीच बातचीत करा रहे थे. दिल्ली और असम में कुछ बैठकें भी हुईं. लेकिन दोनों पक्षों के बीच बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई.' किशोर के ऑफिस ने कैच को बताया, 'फिलहाल हम किसी भी राज्य के चुनाव के लिए काम नहीं कर रहे हैं.'

क्यों नहीं बनी बात?

जेडी-यू, आरजेडी और कांग्रेस के महागठबंधन को बिहार में मिली जबरदस्त सफलता के बाद अन्य राज्यों के चुनाव प्रचार में किशोर को शामिल किए जाने की बात उठी थी. जेडी-यू में किशोर के दोस्त कांग्रेस के साथ उनकी बातचीत को आगे बढ़ाने में जुटे हुए थे. 

दोनों ही चुनाव प्रचार में किशोर ने व्यक्ति विशेष पर ध्यान केंद्रित कर जीत दिलाई थी. लेकिन उनके आकलन के मुताबिक असम में कांग्रेस के लिए व्यक्ति केंद्रित चुनाव प्रचार काम नहीं कर पाता क्योंकि पार्टी पिछले 15 सालों से शासन में है.

15 सालों तक गगोई के सीएम रहने के बावजूद उन्हें लगता है कि वह आगे भी पार्टी की कमान संभाल सकते हैं. किशोर के मुताबिक गगोई पर भरोसा कांग्रेस को असम में भारी पड़ सकता है.

किशोर को लगता है कि 15 सालों तक असम के मुख्यमंत्री रहने के बाद गगोई को अब असम में कांग्रेस की कमान नहीं संभालनी चाहिए

किशोर व्यक्ति केंद्रित प्रचार अभियान चलाने की बजाए क्षेत्रीय दलों से गठबंधन किए जाने की सलाह दी थी. लेकिन गगोई इसे लेकर राजी नहीं हुए. किशोर के उलट गगोई को लगता है कि कांग्रेस के लिए चुनाव पूर्व गठबंधन से ज्यादा बेहतर स्थिति चुनाव बाद गठबंधन की होगी. पार्टी की योजना उन लोगों के साथ बात करने की है जो अपने दम पर सीटें ला सकते हैं. बजाय इसके कि वह एक दूसरे के वोट बैंक पर निर्भर रहते हुए चुनाव लड़ें.

किशोर के लिए यह उतना आसान नहीं था. वह अपनी रिपोट को लेकर अडिग थे और वह वैसी किसी जहाज का कप्तान बनने को तैयार नहीं थे जो डूब सकता है. वह अपने 100 फीसदी सफलता की दर से समझौता नहीं करना चाहते.

राजनीतिक विश्लेषक इसे कांग्रेस के लिए सही संकेत नहीं बता रहे हैं. राज्य की राजनीति को करीब से देखने वाले बीजेपी के एक नेता ने बताया, 'प्रशांत उनके लिए काम नहीं कर रहे हैं. इस बार साफ दिख रहा है कि कांग्रेस असम में हार रही है. प्रशांत का कांग्रेस के साथ नहीं आना उनकी हार पर मुहर लगाता है.' अन्य राज्यों के नेता भी प्रशांत से संपर्क कर रहे हैं. इस बीच कांग्रेस को अब उन्हीं पुराने तरीकों की मदद से असम में चुनाव लड़ना होगा. 

 

First published: 16 January 2016, 8:57 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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