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प्रशांत किशोर ने भेजी राहुल गांधी को गोपनीय रिपोर्ट, माना यूपी जीतना संभव नहीं

समीर चौगांवकर | Updated on: 29 September 2016, 8:11 IST

2014 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी और उसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के चुनावी अभियान की सफल रणनीति बनाकर चर्चा में आए प्रशांत किशोर के सिर पर इस समय उनके अब तक के जीवन की सबसे बड़ी चुनौती है. चुनौती उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को फिर से जिंदा करने की है.

इस साल फरवरी में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की चुनावी जिम्मेदारी संभालने के बाद से उत्तर प्रदेश में डेरा डाले प्रशांत किशोर को पार्टी के स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उत्तर प्रदेश में संगठन के स्तर पर लगभग शून्य हो चुकी कांग्रेस को अपने पैरों पर खड़ा करने में जुटे प्रंशात किशोर फिलहाल स्थानीय कांग्रेस नेताओं को साथ लेकर बूथ स्तर पर कांग्रेस को जिंदा करने में जुटे है.

लेकिन कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भेजी गई उनकी एक गोपनीय रिपोर्ट कांग्रेस की खस्ताहालत और आगामी चुनाव में कांग्रेस की कमजोर संभावनाओं का संकेत देती है.

रिपोर्ट और काग्रेस की चुनौतियां

फिलहाल उत्तर प्रदेश में किसान यात्रा निकाल रहे राहुल गांधी को प्रशांत किशोर ने अब तक की वास्तुस्थिति से जुड़ी एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी है. इस रिपोर्ट में कांग्रेस की प्रदेश में खस्ताहाल स्थिति के लिए कई बातों को जिम्मेदार माना गया है.

प्रशांत किशोर ने अपनी रिपोर्ट में कई बातें कहीं हैं जिन्हें हम यहां रख रहे हैं.

  • उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा क ऊपर हद से ज्यादा निर्भर होने के कारण पार्टी संगठन में शून्यता उत्पन्न हो गई है.
  • प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नाम पर नेताओं की लंबी-चौड़ी फौज है पर जमीनी स्तर पर काम करने वाले जुझारू कार्यकर्ताओं का भारी अभाव जिसके कारण निचले स्तर पर संगठन बेहद कमजोर हो चुका है.
  • व्यापक जनाधार वाले स्थानीय सर्वमान्य, कद्दावर नेताओं का अभाव पार्टी की बड़ी कमजोरी है. स्थानीय स्तर पर नेतृत्व पनप ही नहीं सका है.
  • यूपी कांग्रेस में एक भी ऐसा नेता नहीं जिसमें सबको साथ लेकर चलने का माद्दा हो. युवा नेताओं का भी अभाव है. युवा और जुझारू नेतृत्व तैयार करने में कांग्रेस उदासीन रही है.
  • प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में गुटबाजी हावी है जिससे पार्टी कमजोर हुई.
  • उत्तरप्रदेश में विपक्ष की जातिवादी राजनीति की काट के लिए कांग्रेस के पास कोई स्पष्ट नीति आज तक नहीं है. स्थानीय जातीय समीकरणों को साधने में सक्षम प्रभावी नेता  का भी अभाव है.
  • कांग्रेस उत्तरप्रदेश में मुसलमानों का मिजाज समझने और मुसलमानों का भरोसा जीतने में नाकाम रही.
  • युवक कांग्रेस की गतिविधियां उत्तर प्रदेश में बेहद सुस्त हैं. युवाओं को कांग्रेस से जोड़ने का कोई सशक्त प्रयास नहीं हुआ जिससे कारण युवा कांग्रेस से कट गया.
  • उत्तर प्रदेश में सरकार विरोधी माहौल को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस ने कोई दीर्घकालीन रणनीति नहीं बनाई.
  • उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अग्रिम संगठन बेहद सुस्त हैं. संगठन के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है. सरकार के खिलाफ आंदोलन खड़ा करने में लगातार कमजोर साबित हुए.
  • प्रदेश के मजदूर, किसानों को मोदी की नीतियों और सपा सरकार के खिलाफ एकजुट करने में कांग्रेस का स्थानीय संगठन नाकाम.

हर बूथ पर एक यूथ की रणनीति

कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में दोबारा से खड़ा करने की कोशिश में जुटे प्रशांत किशोर ने हर विधानसभा क्षेत्र में 20 कार्यकर्ताओं को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं को दी है. इसके अलावा प्रदेश के सवा लाख बूथों में प्रत्येक पर कम से कम एक युवा कार्यकर्ता को चिन्हित कर उसे बूथ की जिम्मेदारी देने की रणनीति तय की है.

200 सीटों पर नजर

प्रशांत किशोर के करीबी के मुताबिक उत्तर प्रदेश में 200 विधानसभा सीटों पर पार्टी गंभीरता से फोकस कर रही है. यह वह सीटें होगी जहा कांग्रेस मुकाबले में रहेगी. इन सीटों पर उम्मीदवार चयन करने के लिए अनेक स्तर पर रणनीति बन रही है.

पहले वे उम्मीदवार होगे जिन्होंने पिछला विधानसभा चुनाव जीता था या दूसरे नंबर पर थे. तीसरे स्थान पर रहने वाले उम्मीदवारों को भी टिकट मिल सकता है बशर्ते क्षेत्र से उनकी मांग हो या उनके जीतने की संभावना बन रही हो.

इसके अलावा जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने वाले नेताओं को भी विधानसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है. इसके साथ ही विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बढ़त दिलाने के लिए जनता दल यूनाइटेड, पीस पार्टी जैसी अन्य पार्टियो से गठबंधंन पर भी पार्टी विचार कर रही है. कांग्रेस गठबंधन के सहयोगियों के लिए 100 सीटें छोड़ सकती है. हालाकि अंतिम फैसला राहुल गांधी के ऊपर छोड़ दिया गया  है.

First published: 29 September 2016, 8:11 IST
 
समीर चौगांवकर @catchhindi

विशेष संवाददाता, राजस्थान पत्रिका

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