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राष्ट्रपति बोले आईपीसी की विस्तृत समीक्षा का वक्त

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 February 2016, 13:31 IST

जेएनयू विवाद के बाद उठे राजद्रोह संबंधी कानून को लेकर जारी बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है. राष्ट्रपति डॉ. प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को इस मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि आईपीसी (इंडियन पीनल कोड या भारतीय दंड संहिता) को मौजूदा वक्त यानी 21वीं सदी के मुताबिक ढालने के लिए उचित समीक्षा की आवश्यकता है. इसके साथ ही उन्होंने चली आ रही "प्राचीन" पुलिस प्रणाली में भी बदलाव लाने पर जोर दिया.

एक जनवरी 1862 से प्रभावी भारतीय दंड संहिता की 155वीं वर्षगांठ पर कोच्चि में वार्षिक समारोह का आयोजन किया गया है. इसके अंतर्गत आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, "बीते 155 सालों में  भारतीय दंड संहिता में बहुत कम परिवर्तन हुए हैं. अपराधों की प्रारंभिक सूची में बहुत कम अपराधों को जोड़ा गया और उन्हें दंडनीय बनाया गया."

राष्ट्रपति ने कहा, "अभी भी आईपीसी में ऐसे कई अपराध हैं जो ब्रिटिश प्रशासन द्वारा औपनिवेशिक जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बनाए गए थे. लेकिन अब कई एसे नए अपराध हैं जिन्हें सही तरीके से परिभाषित करने और आईपीसी में शामिल करने की जरूरत है."

उन्होंने यह भी कहा कि आपराधिक कानून के लिए आईपीसी एक आदर्श कानून था लेकिन 21वीं सदी की बदलती जरूरतों के मुताबिक उनमें विस्तृत समीक्षा किए जाने की आवश्यकता है. आर्थिक अपराधों से संभावित खतरों के बारे में राष्ट्रपति का कहना है कि इसने समावेशी समृद्धि और राष्ट्रीय विकास को अवरुद्ध किया है. 

वहीं, उन्होंने पुलिस की छवि को उसकी कार्रवाई का परिणाम बताते हुए कहा कि पुलिस को कानून लागू करने ववाली इकाई की भूमिका से आगे जाने की जरूरत है.

First published: 27 February 2016, 13:31 IST
 
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