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कृषि विधेयकों पर राष्ट्रपति कोविंद के लगाई अंतिम मुहर, मंजूरी के बाद बने कानून

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 September 2020, 19:25 IST

President Ram Nath Kovind gives assent to Farm Bills: राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) ने रविवार को कृषि विधेयकों (Farm Bills) पर अंतिम मुहर लगा दी. इसी के साथ ये विधेयक अब कानून बन गए हैं. बता दें कि तीन कृषि विधेयकों को सरकार (Government) ने हाल ही में संसद (Parliament) के दोनों सदनों में पारित किया था. उसके बाद पंजाब (Punjab), हरियाणा (Haryana) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) जैसे राज्यों में इसका जबरदस्त विरोध हुआ. हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने इस विरोध प्रदर्शन को विपक्ष द्वारा जनता को गुमराह करने का तरीका बताया. संसद ने हाल में कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक को पारित किया था.

जिस का किसानों के अलावा कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया. इसी विरोध के चलते एनडीए की सहयोगी रही अकाली दल ने बीजेपी से अपने 23 साल पुराने रिश्तों को शनिवार को तोड़ लिया. उससे पहले हरसिमत कौर ने इस विधेयकों के विरोध में अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया था. इसके अलावा संसद में कृषि बिलों पर वोटिंग के दौरान राज्यसभा में अभूतपूर्व हंगामा हुआ था. टीएमसी सांसद डेरेक ओ'ब्रायन सहित विपक्ष के कई नेताओं ने बिल की कॉपी फाड़ दी और आसन के माइक को भी तोड़ डाला था. इसके बाद, राज्यसभा के सभापति वैंकेया नायडू ने आठ सांसदों को सत्र के लिए निलंबित कर दिया. वहीं, संसद से पारित होने के बाद कई विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से अनुरोध किया था कि वह इन प्रस्तावित कानूनों पर हस्ताक्षर न करें.


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विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति कोविंद को पत्र लिखा था. जिसमें कांग्रेस, वाम दलों, राकांपा, द्रमुक, सपा, तृणमूल कांग्रेस और राजद सहित विभिन्न दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में इस मामले में उनसे हस्तक्षेप करने और विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करने का अनुरोध किया. इसके साथ ही इन कृषि बिलों का सड़क से संसद तक जबरदस्त विरोध हुआ. हरियाणा, पंजाब में किसानों ने मोर्चा संभाला हुआ है तो वहीं, अन्य दल भी विरोध कर रहे हैं. किसान सरकार से बिलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. पंजाब के अमृतसर में किसान रेल रोको प्रदर्शन के तहत रविवार को अमृतसर-दिल्ली रेलमार्ग पर जमे रहे. साथ ही इन बिलों के विरोध में किसान संगठनों ने बीते शुक्रवार को भारत बंद का भी आह्वान किया था.

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बता दें कि इन तीन कृषि बिलों को लेकर मोदी सरकार को अपने ही सहयोगियों से भी दूर होना पड़ा. शिरोमणि अकाली दल (SAD) की सांसद हरसिमरत कौर ने पहले मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया. उसके बाद शनिवार को शिरोमणि अकाली दल ने भी एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया. पार्टी की कोर समिति की बैठक के बाद सुखबीर सिंह बादल ने एनडीए गठबंधन से अलग होने की घोषणा की. सुखबीर ने कहा कि सरकार ने किसानों की भावनाओं का आदर करने के बारे में बीजेपी के सबसे पुराने सहयोगी दल एसएडी की बात नहीं सुनी.

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First published: 27 September 2020, 19:25 IST
 
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