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राष्ट्रपति कोविंद ने POCSO एक्ट में बदलाव को दी मंजूरी, मासूम से रेप पर मिलेगी फांसी

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 April 2018, 11:19 IST

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मोदी कैबिनेट द्वारा POCSO एक्ट में बदलाव के लिए लाए गए अध्यादेश को अपनी मंजूरी दे दी है. अब 12 साल से कम उम्र की मासूम से रेप पर दोषी को मौत की सजा होगी. केंद्र सरकार द्वारा पारित अध्यादेस पर राष्ट्रपति ने रविवार को हस्ताक्षर किया. शनिवार को मोदी सरकार ने इस अध्यादेश को पारित किया था.

मोदी सरकार द्वारा पारित अध्यादेश में आईपीसी, साक्ष्य कानून, आपराधिक प्रक्रिया संहिता और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (POCSO) में संशोधन का प्रावधान है. इसमें ऐसे अपराधों के दोषियों के लिए मौत की सजा का नया प्रावधान लाने की बात कही गई है. इसमें 12 वर्ष से कम आयु की बच्चियों से बलात्कार के दोषियों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है.

इसके तहत 12 साल से कम उम्र के बच्चियों से दुष्कर्म के दोषियों को अदालतों द्वारा मौत की सजा देने की बात कही गई है.  इसके अलावा बलात्कार के मामलों की तेज गति से जांच और सुनवाई के लिये भी अनेक उपाय किये गए हैं. महिला के साथ बलात्कार के संदर्भ में सजा को 7 वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष के कारावास किया गया है जिसे बढ़ाकर उम्र कैद किया जा सकता है. 

जानिए क्या है पास्को एक्ट?
बच्चों के साथ यौन अपराधों को लेकर साल 2012 में केंद्र सरकार ने एक विशेष कानून बनाया था. यह कानून बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है. इसके अलावा एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है. पास्को यानि 'प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस' एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012.

साल 2012 में बनाए गए इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आ जाता है. यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है. इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई विशेष अदालत में होती है.

कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा तय की गई है. आप भी जानिए कौन-कौन सी हैं धाराएं-

धारा 3- पॉक्सो एक्ट की धारा 3 के तहत पेनेट्रेटिव सेक्सुअल असॉल्ट को भी परिभाषित किया गया है. जिसमें बच्चे के शरीर के साथ किसी भी तरह की हरकत करने वाले शख्स को कड़ी सजा का प्रावधान है.

धारा 4- इस अधिनियम की धारा 4 के तहत वो मामले शामिल किए जाते हैं जिनमें बच्चे के साथ दुष्कर्म या कुकर्म किया गया हो. इसमें सात साल सजा से लेकर उम्रकैद और अर्थदंड भी लगाया जा सकता है.

धारा 6- पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के अधीन वे मामले लाए जाते हैं जिनमें बच्चों को दुष्कर्म या कुकर्म के बाद गम्भीर चोट पहुंचाई गई हो. इसमें दस साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है और साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

धारा 7 एवं 8- पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 के तहत वो मामले पंजीकृत किए जाते हैं जिनमें बच्चों के गुप्तांग से छेडछाड़ की जाती है. इसके धारा के आरोपियों पर दोष सिद्ध हो जाने पर पांच से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है.

First published: 22 April 2018, 11:16 IST
 
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