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महाराष्ट्र में लागू हुआ राष्ट्रपति शासन, राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने दी मंजूरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 November 2019, 11:44 IST

महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के आए परिणामों के 19 दिन बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लग गया है. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने राज्य के मौजूदा हालातों के बाद केंद्र को अपनी रिपोर्ट दी थी और राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की थी. जिसके बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश को मंजूरी दे दी है.

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि राज्य में संविधान के मुताबिक किसी नई सरकार का गठन नहीं हो सकता जिसके बाद उन्होंने केंद्र सरकार को इस मामले में मंगलवार को एक रिपोर्ट सौंपी थी. राज्यपाल से रिपोर्ट मिलने के बाद मोदी कैबिनेट की हुई बैठक में राज्यपाल की सिफारिश को स्वीकृति दे दी. जिसके बाद गृह मंत्रालय ने इस रिपोर्ट को राष्ट्रपति के पास भेज दिया. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने महाराष्ट्र में संविधान के अनुच्छेद-356 के तहत राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की फाइल पर साइन कर दिए.


गौरतलब हो, 24 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के परिणाम आए थे. जिसमें बीजेपी(105) -शिवसेना (56) गठबंधन को पूर्ण बहुमत मिला था. ऐसे में माना जा रहा था कि राज्य में एक बार फिर बीजेपी शिवसेना मिलकर सरकार बनाएंगे. लेकिन चुनाव परिणामों के बाद शिवसेना ने बीजेपी के सामने मुख्यमंत्री पद को लेकर 50-50 का फार्मूला दिया जिसमें शिवसेना बीजेपी से ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद की मांग कर रही थी. हालांकि बीजेपी ने साफ तौर पर कहा कि मुख्यमंत्री पद से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से एक दिन पहले राज्यपाल को मिलकर अपना इस्तीफा सौंप दिया था. जिसके बाद राज्यपाल ने नियमों के मुताबिक चुनाव परिणामों के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी बीजेपी को सरकार बनाने का न्यौत दिया था. हालांकि बीजेपी ने बहुमत ना होने का हवाला देते हुए सरकार बनाने से मना कर दिया था. जिसके बाद राज्यपाल ने दूसरी सबसे बड़ी पार्टी शिवसेना को सरकार गठन के लिए बुलाया. शिवसेना ने राज्यपाल से सरकार बनाने का आमंत्रण मिलने के बाद तीन दिन का समय मांगा था लेकिन राज्यपाल ने शिवसेना को अतिरिक्त समय देने से मना कर दिया.

महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोमवार शाम को एनसीपी के विधायक दल के नेता को फोन कर राजभवन बुलाया और सरकार बनाने का न्यौत दिया. राज्यपाल ने मंगलवार शाम 8:30 बजे तक एनसीपी को समय दिया था लेकिन उससे पहले ही उन्होंने राज्य में राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी हैं.

हालांकि राज्यपाल ने एनसीपी को जो मियाद दी थी वो अभी तक खत्म नहीं हुई है. और इसी कारण एनसीपी और कांग्रेस अभी भी राज्य में सरकार बनाने के लिए मंथन कर रही है. वहीं मीडिया रिपोर्ट ती मानें तो एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना मिलकर राज्य में सरकार बना सकते हैं. एनसीपी ने मुख्यमंत्री पद के लिए शिवसेना को 50-50 का ऑफर दिया है. जबकि कांग्रेस को पूरे पांच साल तक मुख्यमंत्री पद का ऑफर किया गया है.

दूसरी तरफ शिवसेना ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है और राज्य में राजपाल शासन को चुनौती दी है. कयास लगाए जा रहे हैं कि शिवसेना कांग्रेस नेता और दिग्गज वकील कपिल सिब्बल की मदद ले सकती है. खबरों की मानें तो शिवसेना ने जो याचिका दाखिल की हैं वो उस पर तत्काल सुनवाई चाहती है लेकिन सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्रार से उन्हें अभी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली है.

 बता दें, राज्यपाल ने अपनी सिफारिश में कहा है कि राज्य में सरकार बनाने की कोई संवैधानिक व्यवस्था नही है इसलिए वहां पर राष्ट्रपति शासन लगाया जाए. गवर्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा चुनाव परिणाम आए 15दिन हो गए हैं लेकिन राज्य में नई सरकार के गठन की कोई संभावना नहीं दिख रही है. राज्यापाल की रिपोर्ट में आगे कहा गया कि उनकी ओर से राज्य में सरकार गठन के लिए पूरी कोशिशें की गई लेकिन मौजूदा स्थिति में राज्य में नई सरकार के गठन की कोई संभानवा नजर नहीं आ रही है.

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगने के साथ ही राज्य की विधानसभा निलंबित हो गई है. महाराष्ट्र में लगे राष्ट्रपति शासन कि मियाद अगले छह महीनों के लिए हैं लेकिन अगर कोई पार्टी बहुमत हासिल कर सरकार बनाने का दावा पेश करती है तो राष्ट्रपति शासन 6 महीने से पहले भी खत्म किया जा सकता है.

किसी भी राज्य में क्यों लगाया जाता है राष्ट्रपति शासन, जानिए क्या है इसकी पूरी प्रक्रिया

First published: 12 November 2019, 18:12 IST
 
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