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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 March 2016, 14:53 IST

रविवार को उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार सुबह दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं.

कांग्रेस ने कहा है कि केंद्र सरकार का यह फैसला असंवैधानिक है और वह राष्ट्रपति शासन को कोर्ट में चुनौती देगी.

उत्तराखंड में जारी राजनैतिक संकट को लेकर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर कैबिनेट स्तर के मंत्रियों की बैठक हुई. इस बैठक में उत्तराखंड में सरकार के गठन और उससे पहले राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई थी.

इस बैठक में केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली भी मौजूद थे. सूत्रों के अनुसार बैठक के बाद देर रात उन्होंने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करके राज्य के राजनैतिक हालात की जानकारी दी.

इसके बाद राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सिफारिश को मानते हुए राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दी. हालांकि, अभी विधानसभा को भंग नहीं किया है, अभी इसे निलंबित रखा गया है.

बीजेपी लोकतंत्र और संविधान की हत्या कर रही है: रावत

रविवार को राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बीजेपी पर आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार इस छोटे से राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की लगातार धमकी दे रही है.

रावत ने कहा, 'राज्य के इतिहास में लंबे समय बाद हो रहा है कि कोई शासक दल सत्ता के अहंकार में चूर होकर एक छोटे से राज्य को लगातार धमकी दे रहा है जो लोकतंत्र और संविधान की हत्या है.'

दूसरी ओर रविवार को अरुण जेटली ने कहा, 'उत्तराखंड प्रशासनिक मशीनरी के चरमराने का असली उदाहरण है और संविधान के लिहाज से जो कुछ भी गलत हो सकता था वो वहां हुआ है. अाप दिए गए समय का इस्तेमाल प्रलोभन देने और रिश्वत देने में इस्तेमाल कर रहे हैं जो कि संविधान का उल्लंघन है.'

उन्होंने पीटीआई से कहा है कि राज्य में जारी राजनैतिक संकट कांग्रेस की आंतरिक समस्या है.

राज्य के हालिया संकट को बीजेपी द्वारा कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताए जाने पर रावत ने कहा, 'अगर यह कांग्रेस की अंदरूनी दिक्कत है तो फिर क्यों आरएसएस और बीजेपी के बड़े नेता 17 और 18 मार्च को राज्य में मौजूद थे?

28 मार्च को बहुमत साबित करना था

इससे पहले राज्यपाल केके पॉल ने रावत सरकार को 28 मार्च तक सदन में बहुमत साबित करने का समय दिया था. वहीं विधानसभा स्पीकर ने बागी कांग्रेस विधायकों को 26 मार्च शाम तक नोटिस का जवाब देने को कहा था, जिसमें पूछा गया है कि क्यों ना दल बदल क़ानून के तहत उनकी सदस्यता रद्द कर दी जाए.

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार बागी विधायकों के वकील रविवार सुबह स्पीकर के मिलने उनके निवास पर गए हैं.

उत्तराखंड विधानसभा में एक नामांकित सदस्य समेत 71 विधायक हैं. कांग्रेस के 36 विधायकों में से 9 बागी हो चुके हैं. इसके अलावा बीजेपी के पास 28, बीएसपी के दो, निर्दलीय तीन और उत्तराखंड क्रांति दल का एक विधायक है.

First published: 27 March 2016, 14:53 IST
 
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