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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन: 'लोकतंत्र की हत्या'

कैच ब्यूरो | Updated on: 28 March 2016, 8:49 IST

शनिवार रात को उत्तराखंड के राजनीतिक संकट पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की आपात बैठक प्रधानमंत्री ने बुलाई थी. इस बैठक में राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश की गई.

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद वित्तमंत्री अरुण जेटली ने देर रात राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को राज्य के हालात से अवगत कराया था.

इसके बाद राष्ट्रपति ने केंद्र सरकार की सिफारिश को मानते हुए राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दे दी. हालांकि, अभी विधानसभा को भंग नहीं किया है, अभी इसे निलंबित रखा गया है.

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उत्तराखंड के अस्तित्व में आने के बाद पहली बार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है. कांग्रेस के नौ विधायकों के बागी होने के बाद राज्य की हरीश रावत सरकार मुश्किलों में घिर गई थी. सरकार को 28 मार्च को सदन में बहुमत साबित करना था.

राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने के निर्णय को सही ठहराते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा, 'मेरा मानना है कि राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए इससे बेहतर उदाहरण नहीं हो सकता. पिछले नौ दिनों से उत्तराखंड में संविधान का उल्लंघन किया जा रहा है.'

बीजेपी बागी कांग्रेसी विधायकों के साथ मिलकर सरकार का गठन कर सकती है

जेटली ने कहा, 'विधायकों ने कहा था कि उन्होंने विनियोग विधेयक के खिलाफ मत दिया था. स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहला उदाहरण है, जब एक नाकाम विधेयक को बगैर मतदान के पारित घोषित कर दिया गया. उस दिन 18 मार्च को 68 विधायक सदन में थे, जिनमें से 35 ने मत विभाजन की मांग की थी.'

नौ विधायकों के बागी हो जाने के बाद राज्यपाल ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को 28 मार्च को सदन में बहुमत साबित करने का अवसर दिया था. लेकिन उससे पहले ही केंद्र सरकार ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया.

उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू

केंद्र सरकार के इस फैसले से नाराज कांग्रेस पार्टी और हरीश रावत ने संकेत दिया है कि वे राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले के खिलाफ अदालत का रुख कर सकती है.

रावत ने कहा, 'हम सभी कानूनी विकल्पों की मदद लेंगे. इसका फैसला हमारे वकील करेंगे. मेरे पास एक बिल्कुल स्पष्ट बहुमत था. अगर कांग्रेस सत्ता में वापस लौटती है तो हम विधानसभा की सीट संख्या 70 से बढ़ाकर 90 करेंगे.'

एसआर बोमई बनाम भारत सरकार

जिस तरीके से केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किया है वह अपने आप में कई सवाल खड़े करती है. संविधान के जानकार इस निर्णय को सही नहीं बता रहे हैं. संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप ने एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान कहा, 'राष्ट्रपति शासन सबसे आखिरी विकल्प होता है. सरकार को सदन में बहुमत साबित का मौका दिया जाना चाहिए था.'

जाहिर है केंद्र सरकार ने एकतरफा फैसला करते हुए उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किया है. अब जबकि हरीश रावत को एक दिन बाद ही विधानसभा में विश्वासमत हासिल करना था, उसे वह मौका नहीं दिया गया.

उत्तराखंड विधानसभा को भंग नहीं किया है, अभी इसे निलंबित रखा गया है

1994 में आए ऐतिहासिक एसआर बोमई बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से यही बात कही है कि सरकार के बहुमत का फैसला किसी भी हाल में सबसे पहले सदन से सिद्ध करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में यह भी कहा था कि धारा 356 (1) के तहत दिया गया कोई भी निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है. यानी कोर्ट केंद्र सरकार के फैसले को पलट भी सकती है.

हालांकि अभी उत्तराखंड विधानसभा को भंग नहीं किया गया है. जाहिर है कि बीजेपी निकट भविष्य में अपनी सरकार बनाने की संभावना देख रही है. बीजेपी बागी कांग्रेस विधायकों के साथ मिलकर सरकार बनाने का प्रयास करेगी. इसका इशारा बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कई बार किया है.

विजयवर्गीय ने कहा है कि बीजेपी को राज्य में सरकार गठन का अवसर मिलता है तो वह इसकी संभावनाओं तथा विकल्पों की तलाश करेगी.

उत्तराखंड विधानसभा में एक नामांकित सदस्य समेत 71 विधायक हैं. कांग्रेस के 36 विधायकों में से 9 बागी हो चुके हैं. कांग्रेस के बागी विधायकों को रविवार शाम विधानसभा स्पीकर अयोग्य ठहरा चुके हैं. इसके अलावा बीजेपी के पास 28, बीएसपी के दो, निर्दलीय तीन और उत्तराखंड क्रांति दल का एक विधायक है.

गैर बीजेपी सरकारों को अस्थिर करने की नीति

दो महीने पहले भी अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस के विधायकों के बागी हो जाने के बाद वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था. इसके बाद बीजेपी ने असंतुष्ट कांग्रेसी विधायकों के साथ मिलकर वहां सरकार का गठन किया.

अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नबाम तुकी ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने को 'लोकतंत्र की हत्या' बताया है.

तुकी ने कहा, 'वे अरुणाचल में मेरी लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार के साथ यह प्रयोग करने में सफल रहे हैं. उत्तराखंड में भी वे अपने गंदे राजनीतिक खेल में सफल रहे हैं. वे अन्य राज्यों की गैर-बीजेपी सरकारों को भी निश्चित तौर पर निशाना बनाएंगे.'

कांग्रेस राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले के खिलाफ कोर्ट जा सकती है

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने सवाल उठाया है कि जब राज्यपाल ने कांग्रेस सरकार से कहा था कि वह 28 मार्च को बहुमत साबित करे. फिर सदन में बहुमत साबित करने से 24 घंटे पहले राष्ट्रपति शासल लगाने का क्या औचित्य था? इससे साबित होता है कि प्रधानमंत्री के भीतर संविधान के प्रति बिल्कुल सम्मान नहीं है.'

वहीं कांग्रेस के बागी नेता राष्ट्रपति शासन के निर्णय को वाजिब ठहरा रहे हैं. बागियों के अगुवा पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया, क्योंकि यहां 'लोकतंत्र की हत्या' की गई.

बीजेपी लोकतंत्र और संविधान की हत्या कर रही है: रावत

राष्ट्रपति शासन को लेकर सिर्फ कांग्रेस ही नहीं बल्कि दूसरे विपक्षी दल भी बीजेपी की आलोचना कर रहे हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने की निंदा करते हुए कहा है कि बीजेपी पूरे देश पर राष्ट्रपति शासन के जरिए राज करना चाहती है.

केजरीवाल ने अपने ट्वीट में कहा, 'विश्वास मत हासिल करने से एक दिन पहले राष्ट्रपति शासन लगा दिया? बीजेपी लोकतंत्र विरोधी है. बीजेपी/आरएसएस तानाशाही चाहते हैं; भारत पर राष्ट्रपति शासन के जरिए शासन करना चाहते हैं.'

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाला है. फिलहाल राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं. विधानसभा निलंबित है, इसलिए दूसरी बड़ी पार्टी यानी बीजेपी को सरकार बनाने को न्यौता दे सकते हैं. इसके अलावा विधानसभा भंग कर अगले चुनाव का रास्ता साफ कर सकते हैं. नहीं तो विधानसभा का कार्यकाल पूरा होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा रह सकता है.

First published: 28 March 2016, 8:49 IST
 
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