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खालसा कॉलेज पर अकाली और कांग्रेस में खिंची सियासी तलवार

राजीव खन्ना | Updated on: 6 March 2016, 22:04 IST
QUICK PILL
  • अमृतसर के खालसा कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाए जाने के प्रस्ताव को लेकर अकाली और कांग्रेस में जबरदस्त जंग छिड़ गई है. कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि अकाली दल के नेता इसके जरिये कॉलेज की गवर्निंग काउंसिल में अपने लोगों को बिठाना चाहते हैं.
  • अकाली नेता मजीठिया ने इसे कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह की ओछी राजनीति करार दिया है. उनका कहना है कि जब दिल्ली और हैदराबाद में दो विश्वविद्यालय हो सकते हैं तो अमृतसर में ऐसा क्यों नहीं किया सकता.

अमृतसर के खालसा कॉलेज को यूनिवर्सिट बनाए जाने का प्रस्ताव राजनीतिक रंग ले चुका है. कांग्रेस प्रेसिडेंट अमरिंदर सिंह ने कॉलेज के मौजूदा स्वरुप में किसी बदलाव का विरोध किया है क्योंकि सत्यजीत सिंह मजीठिया कॉलेज के गवर्निंग कॉउंसिल में मौजूद हैं. 

मजीठिया पंजाब के वित्त मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया और शिरोमणि अकाली दल की लोकसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर के पिता हैं. कांग्रेस का कहना है कि मजीठिया अपने निजी फायदों के लिए सार्वजनिक संस्थानों का दुरुपयोग कर रहे हैं.  दोनों दलों के बीच इस मसले को लेकर लड़ाई छिड़ गई है.

खालसा कॉलेज का महत्व

इस कॉलेज को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के कतार में रखा जा सकता है. इसकी स्थापना 19वीं सदी के आखिरी में हुई थी. उस वक्त पश्चिमी शिक्षा के खिलाफ आंदोलन जोरों पर था. इसी दौरान बीएचयू और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना हुई जिन्हें बाद में यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया.

इसी दौरान जब चार सिक्ख लड़के ईसाई बने तो सिक्खों ने अपना कॉलेज शुरू करने का फैसला किया. उन्होंने 5 मार्च 1892 को एक स्कूल की शुुरुआत की और आगे चलकर यही स्कूल 1899 में खालसा कॉलेज बना. उस दौरान यह सोचा गया कि आगे चलकर इसे यूनिवर्सिटी बनाया जाएगा. इस स्कूल के भवन की डिजाइनिंग राम सिंह ने की थी जो लाहौर के मेयो स्कूल के प्रिंसिपल थे.

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो और दरबारा सिंह भी खालसा कॉलेज से पढ़ाई कर चुके हैं

कॉलेज से पढ़ने वाले मशहूर हस्तियों में भीष्म साहनी और मुल्क राज आनंद का नाम शुमार है. पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रताप सिंह कैरो और दरबारा सिंह भी यहां से पढ़ चुके हैं. 

देश के कुछ चुनिंदा कृषि वैज्ञानिकों ने यहां से पढ़ाई की है क्योंकि यहां कृषि की पढ़ाई अन्य कॉलेजों से ज्यादा बेहतर तरीके से होती है. माना जाता है कि यहां का कृषि विभाग देश का सबसे पुराना कृषि विभाग है.

पूर्व क्रिकेटर बिशन सिंह बेदी और मुख्य चुनाव आयुक्त एम एस गिल भी यहां से पढ़ाई कर चुके हैं. इसके अलावा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रमुख तेजा सिंह भी खालसा कॉलेज के अल्युमिलनाई हैं.

इंस्टीट्यूट ऑफ डिवेलपमेंट एंड प्लानिंग के डायरेक्टर तारविंद सिंह चहल बताते हैं कि अगर यहां के छात्रों और शिक्षकों ने वेल्स के प्रिंस जॉर्ज का विरोध नहीं किया होता तो यह यूनिवर्सिटी बन जाता. सिक्खों ने यूनिवर्सिटी में रहने की बजाए स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेना सही समझा. 

2011 में इस कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाने की कोशिश हुई थी लेकिन विरोध के बाद इसे वापस ले लिया गया

खालसा कॉलेज अमृतसर में करीब 500 एकड़ में फैला हुआ है और कोट सैय्यद मोहम्मद ने यह जमीन दान की थी जो अब कोट खालसा कहलाता है.

विरोध की राजनीति

2011 में इस कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाने की कोशिश हुई थी लेकिन कॉलेज के शिक्षकों और अन्य समूहों के विरोध के बावजूद इस फैसले को वापस लेना पड़ा. इस बार भी सामने आया प्रस्ताव विधानसभा चुनावों से पहले विवादों के दायरे में आ गया है.

जो विरोध कर रहे हैं, उनका कहना है कि जब कॉलेज के पास में ही गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी है तो मौजूदा कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाए जाने की क्या जरूरत है. उन्होंने कहा कि अगर सरकार को यूनिवर्सिटी ही बनानी तो वह दूसरे जगह क्यों नहीं बना सकती.

ऐसा कहा जा रहा है कि निजी यूनिवर्सिटी बनाने की आड़ में एक पब्लिक ट्रस्ट को प्राइवेट मैनेजमेंट में तब्दील किया जा रहा है. 

शिक्षकों का लगातार कहना है कि उन्हें कॉलेज प्रबंधन पर भरोसा नहीं है क्योंकि उन्होंने इस बारे में शिक्षकों से कोई बातचीत नहीं की है. विपक्ष का कहना है कि कॉलेज को यूनिवर्सिटी बनाए जाने का प्रस्ताव इसलिए आगे बढ़ाया गया है क्योंकि मजीठिया कॉलेज की बजाए उसकी जमीन में ज्यादा दिलचस्पी ले रहे हैं. उन्होंने कहा, 'बादलों ने जो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के साथ किया वहीं मजीठिया खालसा कॉलेज के साथ कर रहे हैं.' 

शिक्षकों ने कहा, 'संस्थानों को हड़प कर उसमें अपने आदमियों को बिठाकर आपको पैसे कमाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.' उन्होंने कहा कि अगर मजीठिया इस कॉलेज को यूनिवर्सिट बनाने में सफल भी हो जाते हैं तो वह (अमरिंदर सिंह) 2017 में कांग्रेस के सरकार में आने के बाद इस एक्ट की समीक्षा की अपील करेंगे.

मजीठिया का जवाब

मजीठिया ने अमरिंदर और अपने खिलाफ लगे आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने कहा, 'यह ओछी राजनीति है. दूसरी यूनिवर्सिटी बनने में क्या बुराई है? हम ऐसी संस्था बनाना चाहते हैं जहां युवाओं को प्रोफेशनल कोर्सेज की पढ़ाई करने का मौका मिले. यही गवर्निंग काउंसिल जो पिछले 100 सालों से कॉलेज चला रही है वहीं यूनिवर्सिटी भी चलाएगी. इसमें पैसा और जमीन हड़पने का सवाल कहां से आ गया.'

मजीठिया ने कहा कि खालसा कॉलेज की पहचान बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली और हैदराबाद में एक से अधिक यूनिवर्सिटी हो सकती है तो अमृतसर में ऐसा क्यों नहीं हो सकता.

अमररिंदर पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता इस मामले में बस ओछी राजनीति कर रहे हैं. कांग्रेस पार्टी इस मामले को 8 मार्च से शुरू हो रहे बजट सत्र में उठाना चाहती है. कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, 'हम निश्चित तौर पर इस मुद्दे को विधानसभा में उठाएंगे.'

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First published: 6 March 2016, 22:04 IST
 
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