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प्रधानमंत्री मोदी की निजी वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक, हैकर ने लोगों से की बिटक्वॉइन की मांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 September 2020, 7:28 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) की निजी वेबसाइट के ट्विटर अकाउंट (Twitter account) को कुछ देर के लिए हैक कर लिया गया. उसके बाद हैकर ने लोगों से बिटक्वॉइन की मांग कर दी. बता दें कि पीएम मोदी की निजी वेबसाइट narendramodi.in के ट्विटर अकाउंट पर 25 लाख से ज्यादा फॉलोवर्स हैं. हैकर्स ने इसी ट्विटर अकाउंट को हैक कर लोगों से बिटक्वॉइन की मांग की. हैकर्स ने एक ट्वीट करते हुए पीएम नेशनल रिलीफ फंड में पैसे दान देने की मांग की और वो भी क्रिप्टो करेंसी के जरिए. हालांकि बाद में अकाउंट को रिकवर कर लिया गया है.

पीएम मोदी की निजी वेबसाइट के टि्वटर अकाउंट पर एक मैसेज में लिखा गया, मैं आप लोगों से अपील करता हूं कि कोविड-19 के लिए बनाए गए पीएम मोदी रिलीफ फंड में डोनेट करें. पीएम के ट्विटर हैंडल पर करीब आधा दर्जन ट्वीट किए गए. सभी ट्वीट में पैसे डोनेट करने की मांग की गई थी. एक और ट्वीट में हैकर ने लिखा, यह अकाउंट जॉन विक ([email protected]) ने हैक कर लिया है. हमने पेटीएम मॉल हैक नहीं किया है. हालांकि अब ये बोगस ट्वीट डिलीट कर दिए गए हैं.


जिस हैकर ने पीएम मोदी की निजी वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैंक किया उस हैकर ग्रुप का नाम जॉन विक है. इससे पहले 30 अगस्त को साइबर सिक्योरिटी फर्म साइबल ने दावा किया था कि जॉन विक ग्रुप का ही पेटीएम मॉल के डेटा चोरी में हाथ था. बता दें कि पेटीएम मॉल यूनीकॉर्न पेटीएम की ई-कॉमर्स कंपनी है. साइबल ने दावा किया था कि इस हैकर ग्रुप ने फिरौती की मांग की थी. हालांकि पेटीएम ने कहा कि जांच के दौरान डेटा में सेंधमारी जैसी कोई घटना नहीं हुई.

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इससे पहले जुलाई के महीने में एक ऐसी ही घटना में वॉरेन बफेट, जेफ बेजॉस, बराक ओबामा, जो बिडेन, बिल गेट्स और एलॉन मस्क समेत कई बड़ी हस्तियों के टि्वटर अकाउंट के साथ छेड़छाड़ की गई थी. इन लोगों के ट्विटर अकाउंट पर क्रिप्टो करेंसी से जुड़े पोस्ट किए गए थे.

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बता दें कि बिटकॉइन एक तरह की वर्चुअल करेंसी है. ये दूसरी करेंसी जैसे डॉलर, रुपये या पाउन्ड की तरह भी इस्तेमाल की जा सकती है. ऑनलाइन पेमेंट के अलावा इसको डॉलर और दूसरी एजेंसी में भी एक्सचेंज किया जा सकता है. ये करेंसी बिटकॉइन के रूप में साल 2009 में चलन में आई थी. आज इसका इस्तेमाल ग्लोबल पेमेंट के लिए किया जा रहा है.

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First published: 3 September 2020, 7:28 IST
 
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