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यूपी में प्रियंका गांधी कार्ड के खतरे भी हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 13:46 IST

अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले चुनाव के तहत कांग्रेस प्रियंका गांधी कार्ड खेलने की तैयारी में हैं. पिछले कुछ महीनों से उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न जगहों से प्रियंका गांधी को कांग्रेस में बड़ी जिम्मेदारी देने की मांग हो रही है.

चार-पांच दिनों पहले उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने प्रियंका गांधी से मुलाकात की है. कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रियंका उत्तर प्रदेश में बड़ी जिम्मेदारी निभाने को तैयार हो गई हैं. हालांकि, प्रियंका से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि उन्होंने अब तक हामी नहीं भरी है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेसी चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि राज्य में प्रियंका गांधी चुनावी कैंपेन को लीड करें. उत्तर प्रदेश में पिछले 27 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस फिलहाल राज्य में मरणासन्न अवस्था में है. इसके अलावा पार्टी की आंतरिक गुटबाजी भी किसी से छिपी नहीं है.

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प्रशांत किशोर का मानना है कि प्रियंका के आने से राज्य में पार्टी को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती जैसे नेताओं के सामने मजबूत चेहरा मिलेगा और गुटबाजी पर भी लगाम लगेगी. अभी तक यूपी में प्रि‍यंका गांधी सिर्फ अमेठी व रायबरेली के चुनावों तक ही सीमि‍त थीं.

आजाद ने कुछ दिनों पहले मीडिया से कहा है कि अब प्रि‍यंका को अमेठी व रायबरेली तक ही सीमि‍त नहीं रखा जाएगा. हालांकि, कांग्रेस सूत्रों के अनुसार प्रियंका जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेने वाली है. वह पहले राज्य में पार्टी की स्थिति पर गौर करेंगी और अगर कुछ बेहतर होने की पुख्ता उम्मीद होने के बाद ही पूरे राज्य में प्रचार अभियान का हिस्सा बनेंगी.

कांग्रेस से शीर्ष सूत्रों के अनुसार प्रियंका को राज्य में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं घोषित किया जाएगा. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरे के लौटने के बाद प्रियंका की भूमिका के बारे में अंतिम निर्णय होने की संभावना है. प्रशांत किशोर की टीम प्रियंका से इलाहाबाद के आनंद भवन से प्रचार शुरू करवाने की तैयारी में जुटी है.

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प्रशांत किशोर और उनकी टीम ने पार्टी को अपने परंपरागत वोट बैंक ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है. किशोर को उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश में 13 फीसदी ब्राह्मणों को कांग्रेस से जोड़ना आसान है क्योंकि उनका समर्थन पहले भी पार्टी को मिलता रहा था. उत्तर प्रदेश में एनडी तिवारी कांग्रेस के आखिरी मुख्यमंत्री रहे हैं. राज्य में कांग्रेस से मुख्यमंत्री रहे गोविंद बल्लभ पंत, कमलापति त्रिपाठी, श्रीपति मिश्रा और हेमवती नंदन बहुगुणा ये सभी ब्राह्मण थे. एक समय कांग्रेस का राजपूतों में जनाधार रहा है. कांग्रेस से वीर बहादुर सिंह, वीपी सिंह और त्रिभुवन नारायण सिंह जैसे राजपूत नेता राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं.

प्रियंका के आने से प्रशांत किशोर की टीम की दो मांगें पूरी हो जाएंगी. टीम को गांधी परिवार का कोई सदस्य उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में निर्णायक भूमिका में चाहिए था और दूसरा उन्हें ब्राह्मण चेहरे की तलाश है. प्रियंका दोनों कसौटियों पर खरी उतरती हैं. उनके अाने से कार्यकर्ताओं में जोश का संचार हो सकता है कि क्योंकि यूपी का स्थानीय नेतृत्व कई सालों से प्रियंका से बड़ी जिम्मेदारी निभाने का अनुरोध कर रहा है.

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लेकिन इसके दूसरे खतरे भी हैं. कांग्रेस को आखिरी बार 1989 के विधानसभा चुनाव में 50 से ज्यादा से सीटें मिली थी. इसके बाद हर चुनाव में उसकी सीटें घटती गई. 2007 और 2012 के यूपी चुनाव में राहुल गांधी ने जमकर प्रचार किया था, लेकिन कोई करिश्मा नहीं दिखा सके. उसे दोनों चुनावों में क्रमश: 22 और 29 सीटें मिली. कुछ राजनीतिक जानकार सवाल उठा रहे हैं कि प्रियंका को लाने के बाद भी 2017 में पार्टी कामयाबी हासिल नहीं कर पाई, तो कहीं गांधी परिवार का तिलस्म ही खत्म न हो जाए.

First published: 30 June 2016, 13:46 IST
 
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