Home » इंडिया » Terror also auctioned with Dawood's property
 

'नीलामी का मकसद दाऊद का मिथक तोड़ना था'

अश्विन अघोर | Updated on: 10 February 2017, 1:46 IST
QUICK PILL
  • मुंबई में 9 दिसंबर को दाऊद की सात संपत्तियों की नीलामी की गई. व्यापारी, आम जनता, वरिष्ठ पत्रकार और हिंदू महासभा ने इसमें हिस्सा लिया.
  • इसमें छोटा शकील की धमकी से डरे बिना एक वरिष्ठ पत्रकार ने खरीदा दाऊद का दिल्ली जायका रेस्तरां और हिंदू महासभा ने खरीदी डॉन की कार.

मुंबई शहर में अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के स्वामित्व वाली संपत्तियों की नौ दिसंबर को नीलामी की गई. इनमें एक रेस्तरां, एक कार और माटुंगा स्थित एक कमरा शामिल है, जो आम तौर पर किराये पर दिया जाता है.

व्यापारियों और आम जनता के अलावा नीलामी में अखिल भारतीय हिंदू महासभा और एक पूर्व पत्रकार द्वारा चलाए जाने वाले मुंबई के एक गैर सरकारी संगठन ने भाग लिया. 

नीलामी और इसकी रकम बहुत ज्यादा मायने नहीं रखती. इसमें हिस्सा लेने वालों का मकसद ये संदेश देना था कि भारतीय और मुंबई के लोग दाऊद से नहीं डरते.

धमकियों का कोई फर्क नहीं पड़ा


मादक पदार्थ एवं तस्करी और विदेशी मुद्रा विनिमय हेराफेरी (संपत्ति जब्ती) कानून 1976 के तहत सरकार के कब्जे में आई इस संपत्ति की नीलामी कोलाबा स्थित होटल डिप्लोमैट में की गई.

बालकृष्णन के देशसेवा समिति एनजीओ ने 4.28 करोड़ रुपये की बोली लगाकर दिल्ली जायका रेस्तरां को अपने नाम किया

दाऊद के साथी छोटा शकील द्वारा वरिष्ठ पत्रकार एस बालकृष्णन को धमकी देने के बाद से यह नीलामी पहले ही सुर्खियों में आ चुकी थी. छोटा शकील ने धमकी दी थी कि अगर बालकृष्णन ने नीलामी में हिस्सा लेकर पाकमोडिया स्थित दिल्ली जायका रेस्तरां की बोली लगाई तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे.

जब दाऊद भारत में रहता था तो दिल्ली जायका उसके रहने के मुख्य ठिकानों में से एक था. पहले इसे होटल रौनक अफरोज के नाम से भी जाना जाता था. 

dawood-property-hindu-mahasabha-embed.jpg

नीलामी में इस होटल का आधार मूल्य 1.18 करोड़ रुपये रखा गया था. बालकृष्णन की देशसेवा समिति एनजीओ ने 4.28 करोड़ रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर इसे अपने नाम कर लिया.

बालकृष्णन ने कहा, "मैं भिंडी बाजार की वंचित महिलाओं और बच्चों की शिक्षा के लिए इस रेस्तरां को एक एजुकेशन सेंटर खोलने के लिए खरीदना चाहता था. मैं किसी धमकी से नहीं डरता और इसके बावजूद हमने नीलामी में हिस्सा लिया. अब मैं मुंबई की आम जनता से अपील करना चाहता हूं कि हमारे एनजीओ को दिल खोलकर दान दें, जिससे हम एक माह के भीतर सरकार को बोले गए मूल्य का भुगतान कर सकें."

बालकृष्णन ने 10 साल पहले देशसेवा समिति की स्थापना कर शहर के वंचित बच्चों के लिए काम करना शुरू किया था. इस प्रस्तावित शिक्षा केंद्र को मौलाना मोइन मियां द्वारा संचालित किया जाएगा. यहां इस क्षेत्र के बच्चों और महिलाओं को अंग्रेजी और कंप्यूटर की शिक्षा देने की व्यवस्था होगी. बालकृष्णन ने इस केंद्र का नाम अशफाकुल्लाह खां पर रखने की बात कही है.

दाऊद के आंतक के 'मिथक' का अंत


यह दूसरा मौका है जब दाऊद की संपत्तियों को नीलामी के लिए रखा गया. इससे पहले उसकी 11 संपत्तियों की नीलामी की गई थी. लेकिन यह नीलामी सफल नहीं रही थी और इसमें बोली लगाने के लिए कोई नहीं पहुंचा था.

सूत्रों के मुताबिक, दाऊद की सात संपत्तियों को इस बार नीलामी में शामिल किया गया था. 

बालकृष्णन ने कहा कि नीलामी में भाग लेने का मुख्य मकसद यह संदेश देना था कि खुद कहीं छिपा बैठा दाऊद हमारे देश को डरा नहीं सकता. उन्होंने कहा, "यह बहुत बड़े अपमान की बात होती अगर हम इस नीलामी में हिस्सा नहीं लेते."

अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने खरीदा डॉन की कबाड़ा हो चुकी सेडान कार

पिछली नीलामी की विफलता के बारे में बालकृष्णन कहते हैं, "यह बहुत शर्मनाक है. पत्रकार के रूप में मैं हमेशा विफलता पर शर्मिंदा महसूस करता था. पाकिस्तान में बैठकर दाऊद हमारे शहर पर राज्य नहीं कर सकता. अब वक्त आ गया कि सामने आकर यह संदेश दिया जाए कि यह शहर किसी भगोड़े से नहीं डरता."

dawood-property-hindu-mahasabha-embed-1.jpg

जहां देशसेवा समिति ने दिल्ली जायका की सर्वाधिक बोली लगाई, वहीं अखिल भारतीय हिंदू महासभा ने डॉन की कबाड़ा हो चुकी सेडान कार को खरीदा.

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्र प्रकाश कौशिक ने कहा, "नीलामी में शामिल होने का एकमात्र मकसद आतंक का पर्याय बन चुके दाऊद के मिथक को तोड़ना था. 15,700 रुपये के आधार मूल्य वाली कार को हमने 30 हजार में बोली लगाकर खरीदा. हम यह साबित करना चाहते हैं कि अपनी जान बचाने के लिए भागते अपराधियों की ही तरह दाऊद भी है. इस बार हमें अन्य संपत्तियों की बोली लगाने का पर्याप्त मौका नहीं मिल सका. लेकिन अगली बार हम सर्वाधिक संपत्तियों पर बोली लगाने की कोशिश करने की तैयारी करेंगे."

First published: 11 December 2015, 8:34 IST
 
अश्विन अघोर @catchnews

मुंबई स्थित स्वतंत्र पत्रकार

पिछली कहानी
अगली कहानी