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पुलवामा हमला : NIA का खुलासा- ऑनलाइन मंगाई गई थी बम बनाने में इस्तेमाल की गई विस्फोटक सामग्री

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 February 2020, 8:56 IST

पिछले साल पुलवामा (Pulwama) में हुए आतंकी हमले में 40 सीआरपीएफ जवान मारे गए थे. एजेंसियों का कहना है कि ये हमला अमोनियम नाइट्रेट, नाइट्रो-ग्लिसरीन और आरडीएक्स जैसी विस्फोटक सामग्री से किया गया था. एक रिपोर्ट के अनुसार NIA को पता चला है कि बम बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कई कंपोनेंट्स ऑनलाइन डिलीवरी एक पोर्टल के माध्यम की गई थी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने यह बड़ा खुलासा जैश-ए-मोहम्मद के संदिग्ध ओवरग्राउंड वर्कर शाकिर बशीर मागरे के पुलवामा से गिरफ्तार करने के बाद किया है. 

एक रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने एक न्यूज़ चैनल को बताया कि 22 साल के मागरे ने कबूल किया है कि जिस बैटरी और अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बनाने के लिए किया गया था, उसे ऑनलाइन पोर्टल से मंगवाया गया था. NIA को मागरे से और भी कई बड़ी जानकारियां मिल सकती हैं. पुलवामा हमले के साजिशकर्ता कामरान, कारी यासिर, सज्जाद भट्ट, उमर फारूक, मुद्दसिर अहमद खान सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं.

 

पुलवामा में विस्फोटक से लदी मारुति ईको वाहन से किये गए ब्लास्ट में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे. आरोपी को शुक्रवार को एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया गया और पूछताछ के लिए एनआईए की हिरासत में 15 दिन के लिए रिमांड पर लिया गया है. एनआईए ने अपने बयान में कहा कि माग्रे पुलवामा हमले में एक सक्रिय साजिशकर्ता था और उसने आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार की मदद की थी.

बयान में कहा गया है कि अभियुक्त शाकिर बशीर मागरे ने खुलासा किया है कि उसने 2018 के अंत से फरवरी 2019 तक हमले में आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक की मदद की और आईईडी की तैयारी में उनकी सहायता की थी.

कौन है मागरे 

आरोपी शाकिर बशीर माग्रे पुलवामा के हाजीबल, काकापोरा का रहने वाला है. एक फर्नीचर की दुकान के मालिक शाकिर बशीर मागरे ने आत्मघाती हमलावर आदिल अहमद डार को आश्रय और अन्य रसद सहायता प्रदान की. उसे 2018 के मध्य में मोहम्मद उमर फारूक नामक एक पाकिस्तानी आतंकवादी द्वारा आदिल अहमद डार से मिलवाया गया था, जिसके बाद वह जेएम का पूर्णकालिक जमीनी कार्यकर्ता बन गया. उसने जनवरी 2019 में जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सीआरपीएफ के काफिले की जानकारी मोहम्मद उमर और आदिल अहमद डार को दी थी. एनआईए के बयान में कहा गया है कि वह मारुति ईको कार को मॉडिफाई करने और फरवरी 2019 की शुरुआत में इसमें आईईडी फिट करने के लिए भी शामिल था.

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एनआईए का कहना है कि डार और मागरे के साथ पाकिस्तानी आतंकवादी मुहम्मद उमर फारूक और आईईडी विशेषज्ञ कामरान पुलवामा हमले की साजिश में शामिल थे. एनआईए को संदेह है कि हमले में इस्तेमाल किए गए 80 किलोग्राम आरडीएक्स को क्रॉस-एलओसी व्यापार मार्ग का उपयोग करके पाकिस्तान में लाया गया था. एनआईए के अधिकारियों का कहना है कि वे मागरे से पूछताछ के बाद और खुलासे की उम्मीद है.

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First published: 29 February 2020, 8:51 IST
 
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