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पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल कार मालिकों तक पहुंचने में चाबी से मिली थी NIA को सफलता, जानिए कैसे

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 March 2019, 14:11 IST

पुलवामा आतंकी हमले में इस्तेमाल कार के मालिकों तक पहुंचने के लिए एनआईए की टीम ने कड़ी मेहनत की. एनआईए की टीम को कार मालिकों तक पहुंचने में कार की चाबी से मदद मिली. बता दें कि 14 फरवरी को जैश के एक आतंकवादी आदिल अहमद डार ने सीआरपीएफ के काफिले की एक बस को एक आत्मघाती कार से उड़ा दिया था. इस आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 से अधिक जवान शहीद हो गए थे. हमले में इस्तेमाल कार भी इस हमले में पूरी तरह नष्ट हो गई.

उसके बाद एनआईए के अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कार के मालिकों तक पहुंचने की थी. लेकिन एक चारी ने कार के मालिकों तक पहुंचाने में उनकी पूरी मदद की. जब एनआईए की टीम ने धमाके वाले स्थान को खंगाला तो वहां उन्हें कार के हिस्सों मिले. जब इन हिस्सों का विश्लेषण किया गया तो पता चला कि इस कार का निर्माण साल 2011 में किया गया था. इसके लिए एजेंसी ने 2,500 कारों की जांच की थी.

उसके बाद एनआईए की टीम 20 फरवरी को मेटल डिटेक्टर की मदद से धमाके वाले स्थान के 200 मीटर के स्थान की जांच करने के लिए पहुंची. इस दौरान जांच कर रहे अधिकारियों को गाड़ी की चाबी मिली. इसके घंटों बाद टीम मारुती ईको के पहले मालिक तक पहुंच गई और जल्द ही बताया कि अनंतनाग का निवासी और जैश-ए-मोहम्मद के लिए भर्ती करने वाले सज्जाद भट्ट ने इस गाड़ी को हमले से 10 दिन पहले खरीदा था.

बता दें कि 14 फरवरी को दोपहर में विस्फोटकों से भरी एक लाल रंग की मारुति ईको कार ने सीआरपीएफ के काफिले की एक बस को टक्कर मारी थी. इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे. एनआईए जांचकर्ताओं ने जम्मू कश्मीर पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से घटनास्थल को कई दिनों तक खंगाला ताकि गाड़ी के मालिक के बारे में कोई सुराग मिल सके.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक एनआईए की टीम घटनास्थल से मिले गाड़ी के हिस्सों को लेकर मारुती के इंजीनियर्स से मिली थी, ताकि इस गाड़ी का निर्माण साल और तारीख का पता चल सके. मारूति के इंजीनियर्स ने बताया कि यह गाड़ी 2011 में बनाई गई थी. इसके बाद एनआईए की टीम ने 2,500 कारों की जांच की.

एनआईए के एक जांचकर्ता ने बताया कि, "हमें संभावित कार मालिक को लेकर संकेत मिला, लेकिन इसके बावजूद असली मालिक तक पहुंचने में कुछ हफ्तों का वक्त लग गया." इसके बाद एनआईए की टीम वापस पुलवामा चली गई. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि, "हमें अहसास हुआ कि धमाका बहुत जबर्दस्त था इसलिए इसके अवशेष केवल राजमार्ग पर नहीं बल्कि आसपास भी मिल सकते हैं. इसी वजह से हमने मेटल डिटेक्टर की मदद से 200 मीटर के क्षेत्र को स्कैन किया और हमें गाड़ी की चाबी मिली."

एक सूत्र के मुताबिक, "चेसिस नंबर के साथ कार की चाबियों ने वाहन पहचान संख्या (VIN) की पहचान करने में मदद की जिसमें 19 अक्षर हैं और यह कार के लिए अलग होता है. अल्फान्यूमेरिक कोड की मदद से पहले मालिक का पता चल गया. बता दें कि कार कंपनियां आमतौर पर निर्माण के महीने और वर्ष को अंग्रेजी अक्षरों में विभाजित करती हैं. इसी की मदद से एनआईए की टीम कार के सभी मालिकों तक पहुंचने में कामयाब रही.

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First published: 3 March 2019, 14:11 IST
 
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