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क्या आम आदमी पार्टी पंजाब में अतिआत्मविश्वास का शिकार हो रही है?

राजीव खन्ना | Updated on: 4 May 2016, 22:51 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अपने \r\nहालिया चंडीगढ़ दौरे के दौरान दावा किया कि उनकी पार्टी इन चुनावों में 107\r\n सीट जीतेगी.
  • पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह कहते हैं कि 2014 के आम चुनावों में पंजाब से 4\r\n संसदीय सीटों पर जीतने के बाद से आप विभाजित हो चुकी है.

वर्तमान में पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य को लेकर आम धारणा महसूस की जा रही है कि आगामी विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी (आप) अपने प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे खड़ी है.

हाल के हुए एक चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में इस पार्टी को राज्य की कुल 117 विधानसभा सीटों में से 95 से 100 सीट जीतने के अनुमान सामने आने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप के वरिष्ठ नेता अरविंद केजरीवाल ने अपने हालिया चंडीगढ़ दौरे के दौरान दावा किया कि उनकी पार्टी इन चुनावों में 107 सीट जीतेगी.

बाकी बची सीटें वर्तमान में राज्य में सत्ता संभाल रहे शिरोमणि अकाली दल के खाते में जाएंगी. सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने इन चुनावों में कांग्रेस को एक भी सीट नहीं दी जिसके चुनाव अभियान की कमान राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के अनुभवी हाथों में है.

किशोर वही रणनीतिकार हैं जिन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी रणनीति को सफलतापूर्वक संभालने के अलावा बीते वर्ष बिहार चुनाव में नितीश कुमार को भी मुख्यमंत्री पद पहुंचाने की कवायद का सफल निर्वहन किया था.

पंजाबी को बेवकूफ बनाना आसान काम नहीं है और वे देख रहे हैं कि दिल्ली में क्या हो रहा है: कांग्रेस

अब सवाल यह उठता है कि कहीं आप अतिआत्मविश्वास की रौ में तो नहीं बह रही है? अभी जब चुनाव होने में कई महीनों का समय बाकी है ऐसे में वे इस प्रकार के बड़े-बड़े दावे कैसे कर सकते हैं वह भी तब जब पार्टी अंदरूनी मोर्चे पर कई चुनौतियों और परेशानियों के दौर से गुजर रही है.

आप के 107 सीट जीतने के दावे को सिरे से खारिज करते हुए अमरिंदर सिंह, केजरीवाल पर पलटवार करते हैं कि वे सपनों की दुनिया में जी रहे हैं. वे कहते हैं, ‘‘आप भी पीपल्स पार्टी ऑफ पंजाब की तरह पानी का बुलबुला साबित होगी.’’

पीपीपी ने हाल ही में कांग्रेस में अपना विलय किया है. अमरिंदर आगे कहते हैं, ‘‘अभी भी पीपीपी के नेता मनप्रीत बादल की विश्वसनीयता और ईमानदार छवि है और वे सही मायनों में जमीन से जुड़े नेता हैं. केजरीवाल के पास इन चीजों की सबसे अधिक कमी है.’’

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अमरिंदर इस बात पर ध्यान दिलवाते हैं कि 2014 के आम चुनावों में पंजाब से 4 संसदीय सीटों पर जीतने के बाद से आप विभाजित हो चुकी है और उसके दो सांसद विद्रोह करके अलग हो चुके हैं.

अमरिंदर का कहना है कि अगर केजरीवाल यह समझते हैं कि वे दिल्ली के करदाताओं की गाढ़ी कमाई के पैसों से पंजाब के अखबारों में कई पन्नों की पेड-न्यूज छपवाकर पंजाबियों को बेवकूफ बना सकते हैं तो यह उनकी मूर्खता है.

वे कहते हैं, ‘‘पंजाबी को बेवकूफ बनाना आसान काम नहीं है. वे देख रहे हैं कि दिल्ली में क्या हो रहा है और कोई भी पंजाब को दिल्ली के रास्ते पर जाते हुए नहीं देखना चाहता.’’

अगर आज पंजाब में चुनाव होते हैं तो पार्टी को 70 से 80 के बीच सीट मिलने की उम्मीद है: धर्मवीर गांधी

आप के भीतर असंतोष का पहला वाकया हाल के दिनों में तब सामने आया जब केजरीवाल के बेहद नजदीकी माने जाने वाले पार्टी के वरिष्ठ नेता और वकील एचएस फुल्का ने एक वीडियो रिलीज कर साफ किया कि चुनाव लड़ने के लिये टिकट पाने को कोइ भी उनसे संपर्क न करे.

ऐसा कर उन्होंने एक प्रकार से इस बात की घोषणा की कि पार्टी के मामलों में उनका कोई दखल नहीं है. साथ ही फुल्का टिकट के दावेदारों को आप के राज्य संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर से संपर्क करने का सुझाव भी दिया. इस घटना के बाद आप के शीर्ष नेतृत्व ने यह संदेश देने के भरसक प्रयास किये कि पार्टी में किसी भी तरह का असंतोष नहीं है.

फुल्का 2014 लोकसभा चुनावों में लुधियाना से पार्टी के उम्मीदवार थे. उन्होंने बीते वर्ष सिख विरोधी दंगो से संबंधित मामलों पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करने के लिये पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. लेकिन इस बीच उनके विदेश दौरों, विशेषकर कनाडा के दौरों के दौरान सोशल मीडिया पर उन्हें मुख्यमंत्री पद का संभावित उम्मीदवार घोषित करने वाले अभियान कुछ और ही कहानी बयान करते हैं.

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दीगर बात यह है कि फुल्का को उम्मीद थी कि राज्य के विधानसभा चुनावों से पहले चुनी जाने वाली आप की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में उन्हें एक बड़ी भूमिका मिलेगी. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक जगतार सिंह कहते हैं, ‘‘फुल्का के इस व्यवहार को एक ऐसे राजनीतिक कदम के रूप में देखा जाना चाहिये जिसे कुछ ही महीनों बाद फरवरी 2017 में होने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी को झटका देने की पूरी संभावना है. जो कुछ हो रहा है वह चेतावनी का एक संकेत भर है.’’

फुल्का ने बीते कुछ दिनों में पंजाब के राजनीतिक हलकों में यह दावा कर हलचल मचा दी है कि उनकी इंग्लैंड यात्रा के दौरान प्रशांत किशोर की ओर से किसी डा. विपिन झा ने उनसे संपर्क साधा था. हालांकि किशोर की इंडियन पाॅलिटिकल एक्शन कमेटी ने ऐसे किसी कदम से इंकार किया है.

फुल्का ने दावा किया है कि डा. झा ने इंग्लैंड में उनके कार्यक्रमों के संचालक इंद्रपाल सिंह शेरगिल के माध्यम से उनसे संपर्क करने का प्रयास किया था और शेरगिल ने उनसे झा या किशोर से वार्ता करने के लिये कहा था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया.

आप से निलंबित सांसदों में से एक धर्मवीर गांधी ने हाल ही में एक कनाडियाई नेटवर्क से कहा था कि अगर आज पंजाब में चुनाव होते हैं तो पार्टी को 70 से 80 के बीच सीट मिलने की उम्मीद है.

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पर्यवेक्षकों का मानना है कि पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री पद का उम्मीवार घोषित करने के बाद बहुत सी चीजें अपने आप ही स्पष्ट हो जाएंगी. गौर करने वाली बात यह है कि चुनाव लड़ने के लिये टिकट चाहने वाले कई महत्वाकांक्षी कतार में हैं और यह अभी भविष्य में गर्भ में है कि पार्टी उन लोगों से कैसे निबटती है जो टिकट पाने में असफल रहेंगे.

पंजाब के सियासी जानकार इस ओर भी इशारा करते हैं कि सोशल मीडिया पर पार्टी द्वारा लगातार चलाया जा रहा आक्रामक अभियान अब धीमा पड़ता जा रहा है.

एक महीने लंबे बजट सत्र में अकाली दल और कांग्रेस सुर्खियां बटोरने में सफल रहे जबकि विधानसभा में किसी तरह का प्रतिनिधित्व न होने के चलते आप बाहर से ही तमाशा देखती रही.

पार्टी पड़ोसी राज्यों के साथ पंजाब के जल बंटवारे, सतलज यमुना लिंक (एसवाईएल), शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के चुनावों में सहजधारियों को मतदान के अधिकर से वंचित करने जैसे राज्य के कई भावनात्मक मुद्दों पर एकराय बनाने में लगी रही है.

आम आदमी पार्टी को चुनावों तक अपने प्रचार और अभियान को बनाए रखना होगा

इसके अलावा आप द्वारा पंजाब के वोटरों से उनके मुद्दों को लेकर पार्टी नेतृत्व द्वारा वार्तालाप करने के लिये चलाये जा रहे पंजाब डायलाॅग को लेकर मतदाताओं के मध्य भी मिश्रित प्रतिक्रिया की खबरें सामने आ रही हैं. उम्मीद है कि इस डायलाॅग से मिलने वाले परिणामों के आधार पर ही पार्टी अपना चुनावी घोषणापत्र तैयार करेगी.

इसके अलावा पर्यवेक्षक इस बात पर भी जोर देते हैं कि पार्टी को चुनावों तक अपने प्रचार और अभियान को बनाए रखना होगा. यह माना जा रहा है कि आप नेतृत्व द्वारा अकालियों और कांग्रेसियों को लेकर खुलासे करने के लिये आयोजित की गई पिछली दो प्रेस कांफ्रेंस पुराने मुद्दों को संबोधित कर रही थीं. इनमें से पहली अमरिंदर सिंह के परिवार के खिलाफ मनी लॉड्रिंग को लेकर संबंधित थी और दूसरी पंजाब के कैबिनेट मंत्री विक्रम सिंह मजीठिया के कथित रूप से ड्रग कारोबार में संलिप्तता से संबंधित थी.

इस बीच अमरिंदर सिंह ने एनआरआई लोगों को आप का समर्थन करने को लेकर चेताते हुए कहा है कि इस महत्वपूर्ण मौके पर इस प्रकार का कोई भी नया प्रयोग राज्य के लिये बेहद घातक हो सकता है.

रविवार को लाॅस एंजल्स में एनआरआई पंजाबियों द्वारा आयोजित एक समारोह में उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब बीते 10 वर्षों से अकालियों और बीजेपी के कुशासन को झेल रहा है और अगले 5 वर्षों के लिये ऐसा कोई और शासन राज्य को उसके घुटनों पर ला देगा जिससे उबरना नामुमकिन होगा.’’ उन्होंने कहा कि केजरीवाल अब पंजाब का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं.

उन्होंने कहा कि दिल्ली के निवासियों के बीच लगातार उपज रहा असंतोष दिल्ली सरकार की असफलता को दर्शाता है जिसने केजरीवाल के झूठ का पर्दाफाश कर दिया है और बहुत ही जल्द पार्टी द्वारा पंजाब में किया गया दुष्प्रचार हवा के बुलबुले की तरह गायब हो जाएगा.

अब आम आदमी पार्टी आने वाले दिनों में पंजाब में अपनी पैठ को किस हद तक भुनाने में सफल होती है यह देखने वाली बात होगी.

First published: 4 May 2016, 22:51 IST
 
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