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उड़ता पंजाब: 16 फीसदी या 0.06 फीसदी?

अभिषेक पराशर | Updated on: 19 June 2016, 7:53 IST
QUICK PILL
  • पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने 2015 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा था, राज्य की 2.77 करोड़ आबादी में महज 0.06 फीसदी ही नशे की आदी है. यह राष्ट्रीय औसत से भी कम है.
  • 2017 की एम्स की एक स्टडी के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में प्रति 100,000 की आबादी पर 837 लोग ओपियड के नशे के आदी हैं जो राष्ट्रीय औसत 0.25 से तीन गुणे से भी अधिक यानी 0.84 फीसदी है. 
  • अकाली दल को पता है कि अगर पंजाब चुनाव में ड्रग्स मुद्दा बना तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हें ही होगा. यही वजह है कि बादल परिवार राज्य में ड्रग्स का सेवन करने वाले लोगों की संख्या को कम कर बता रहे हैं.

पंजाब को नशेड़ियों का अड्डा बताने के बयान के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए पंजाब के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने 2015 के एक अध्ययन का हवाला देते हुए कहा था, 'राज्य की 2.77 करोड़ आबादी में महज 0.06 फीसदी ही नशे की आदी है. यह राष्ट्रीय औसत से भी कम है.'

दिल्ली के बाद अरविंद केजरीवाल की नजर अब पंजाब पर टिकी हुई है. पंजाब में पार्टी के चार सांसद हैं. पंजाब की राजनीति अभी तक अकाली-बीजेपी और कांग्रेस के बीच घूमती रही हैं. ऐसे में आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन दोनों दलों के बीच अपनी जगह बनाने की है. 

आम आदमी पार्टी हरित क्रांति वाले राज्य में किसानों की दुर्दशा के मुकाबले ड्रग्स की समस्या को ज्यादा उछाल रहे हैं. वजह पंजाब में ड्रग्स से पीड़ित लोगों की संख्या को लेकर कोई एकमत नहीं है. सभी दलों के अपने आंकड़ें हैं और वह इसके मुताबिक अपने को बचाते हुए दूसरे दल पर हमला कर रहेे हैं.

अक्टूबर 2012 में कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट राहुल गांधी ने यह कहकर विवाद खड़ा कर दिया था कि पंजाब में प्रत्येक 10 युवा में से 7 युवा नशे का आदी है. तब आम आदमी पार्टी इस परिदृश्य में नहीं थी. लेकिन ड्रग्स की समस्या पंजाब में सियासी मुद्दा जरूर था.

पंजाब विधानसभा चुनाव में अब कुछ महीने बाकी है. राहुल गांधी ने एक बार फिर से ड्रग्स समस्या के बारे में बयान देकर साबित कर दिया है कि आने वाला चुनाव इस मुद्दे पर लड़ा जाएगा. 

गांधी ने कहा, 'पंजाब में अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो वह एक महीने के भीतर ड्रग्स की समस्या को खत्म कर देगी.' ड्रग्स समस्या अगर मुद्दा बना तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान अकाली दल को होगा. राहुल गांधी ने कहा, अकाली दल ड्रग्स समस्या को खत्म करना नहीं चाहती क्योंकि इससे उसे फायदा हो रहा है.

यही वजह है कि बादल परिवार ड्रग्स समस्या को कमतर दिखाने की कोशिश में लगे हुए हैं. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का हमेशा से कहना रहा है कि पंजाब को बदनाम करने की साजिश के तहत उसे नशेड़ियों का राज्य बताया जा रहा है. 

अकाली दल की पूरी कोशिश इन चुनाव में ड्रग्स को सियासी मुद्दा नहीं बनने देने की है

हलांकि सुखबीर बादल ने जिस स्टडी को आधार बनाकर अरविंद केजरीवाल पर जवाबी पलटवार किया, वह गुमराह करने वाला है.

2015 में हुई स्टडी एनजीओ सोसाएटी फॉर प्रोमोशन ऑफ यूथ एंड मासेज ने नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के साथ मिलकर किया था. 

यह स्टडी सभी ड्रग्स को लेकर नहीं की गई थी. बल्कि इसमें केवल ओपियड के नशे का अध्ययन किया गया था जो अफीम के पौधे से बना प्रॉडक्ट होता है. इसमें हीरोइन, मॉर्फिन और सिंथेटिक ड्रग्स शामिल होते हैं जो शरीर पर अफीम की तरह की असर करता है.

स्टडी में ओपियड पर निर्भर 3,620 लोगों के सैंपल का इस्तेमाल किया गया और इसके मुताबिक पंजाब में इसका नशा करने वाली आबादी करीब 232,000 निकली. इसमें यह भी कहा गया कि राज्य भर में ओपियड का नशा करने वाले लोगों की संख्या 860,000 हो सकती है लेकिन इस आंकड़े का इस्तेमाल नहीं किया गया.

एम्स के आंकड़े बताते हैं कि पंजाब में प्रति 100,000 की आबादी पर 837 लोग ओपियड के नशे के आदी हैं जो राष्ट्रीय औसत 0.25 से तीन गुणे सेे भी अधिक यानी 0.84 फीसदी है. 

सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश में प्रति 100,000 की आबादी पर 250 लोग नशे के आदी हैं और इसमें सभी तरह का नशा शामिल है.

पंजाब में प्रति 100,000 की आबादी पर 837 लोग ओपियड के आदी हैं जो राष्ट्रीय औसत 0.25 से तीन गुणा अधिक है

बादल जो आंकड़ा दे रहे हैं वह उनकी ही सरकार के दिए गए हलफनामे के उलट है. मई 2009 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को दिए गए हलफनामे में पंजाब सामाजिक सुरक्षा और महिला एंव बाल विकास के सचिव ने माना कि, राज्य में 16 फीसदी से अधिक आबादी नशे से पीड़ित है. उन्होंने अपने डिपार्टमेंट की तरफ से कराए गए सर्वे के आधार पर यह आंकड़ा दिया था.

तो फिर पंजाब की कितनी आबादी नशे से पीड़ित है. 0.84 फीसदी या 16 फीसदी.

2004 के यूनाइटेड नेशंस ऑफिस ऑन ड्रग्स एंड क्राइम की रिपोर्ट के मुताबिक  पंजाब में 56 फीसदी अफीम खाने वालों की आबादी रहती है. दूसरे नंबर पर राजस्थान है जहां अफीम सेवन करने वालों की संख्या 11 फीसदी है जबकि तीसरे नंबर पर हरियाणा है जहां अफीम खाने वालों की आबादी 6 फीसदी है.

पंजाब इन तीनों राज्यों में एकमात्र वैसा राज्य है जहां प्रोप्रॉक्सीफीन का इस्तेमाल किया जाता है. यह दर्द निवारक दवा है. यूएन की रिपोर्ट के मुताबिक इस दवा का इस्तेमाल पंजाब के अलावा पूर्वोत्तर के दो राज्यों नागालैंड और मिजोरम में होता है. 

पंजाब में बढ़ा नशा

अगर ड्रग्स में अल्कोहल और तंबाकू को भी जोड़ दिया जाए तो आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाता है. इस आधार पर पंजाब के गांवों में करीब दो तिहाई किसी एक नशे के आदी हैं.

अफगानिस्तान से आसानी से होने वाली तस्करी और हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं राजस्थान से आने वाली खेप की वजह से पंजाब में ड्रग्स की आपूर्ति बेहद आसान है. इसमें केमिस्ट और अन्य गिरोहों का गठजोड़ काम करता है. 

हरित क्रांति और विदेश से आने वाली रकम की वजह से पंजाब के मध्यवर्ग के पास ड्रग्स खरीदने के लिए पैसों की कमी नहीं होती.

First published: 19 June 2016, 7:53 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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