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पंजाब: पुलिस में भर्ती से पहले डोपिंग टेस्ट, सैकड़ों पकड़े गए

राजीव खन्ना | Updated on: 16 October 2016, 2:44 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पंजाब सरकार ने राज्य पुलिस की भर्ती में डोपिंग टेस्ट को ज़रूरी करार दिया है. 
  • वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि राजनीतिक मजबूरियों के चलते सरकार यह मानक अपनाने को बाध्य हुई है. 

    इसमें शक नहीं कि पंजाब ड्रग कारोबार और उसकी खपत का गढ़ बनता जा रहा है. आरोप राज्य सरकार पर है कि उसने ड्रग माफियाओं को संरक्षण दे रखा है. सरकार इसकी वजह से राजनीतिक तूफान का सामना भी कर रही है ख़ासकर आने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर. 

        विपक्षी कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का आरोप है कि राज्य में युवाओं बड़ी मात्रा में मादक पदार्थों का सेवन कर रहे हैं, फ़िर पुलिस में भर्ती होने वाले युवा इसका 'शिकार' होने से कैसे बचे रह सकते हैं. 

          1.30 फीसदी टेस्ट पॉजीटिव

          सरकार ने 7,416  कॉन्स्टेबलों के रिक्त पदों की भर्ती के लिए जुलाई के आखिर में घोषणा की थी. इस टेस्ट में पौने चार लाख से ज़्यादा उम्मीदवार शामिल हुए थे. सेन्ट्रल रिक्रूटमेन्ट बोर्ड के चेयरमैन, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) इकबाल प्रीत सिंह सहोटा ने खुलासा किया है कि 98 फीसदी अभ्यर्थियों ने टेस्ट क्लियर कर लिया है जबकि 1.30 फीसदी अभ्यर्थियों का टेस्ट पॉजीटिव निकला. 

          इस आंकड़े के आधार पर सहोटा ने उन आरोपों को झूठा बताया है जिसमें 70 से 80 फीसदी पंजाबी युवाओं को नशे का लती बताया गया था. सिर्फ़ 0.65 फीसदी अभ्यर्थियों ने ही शारीरिक परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए ड्रग का सेवन किया था. 

          हालांकि इन युवाओं को अधिकारियों ने सात दिन बाद भर्ती परीक्षा में फिर से हाज़िर होने की इजाज़त दे दी गई और ज़्यादातर का टेस्ट निगेटिव रहा. वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार इस आंकड़े का हवाला देकर राज्य में ड्रग की बुराई होने से इनकार कर रही है. 

          बताया जा रहा है कि भर्ती के दौरान 6,558 उम्मीदवारों में से 1,775 डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए. इन्होंने चरस का सेवन किया था. फेल होने वाले 1,372 उम्मीदवारों ने बेंजोडियाजेपीन और 1,238 ने मॉर्फीन ले रखी थी. इसके अलावा 388 उम्मीदवारों ने हेरोइन और ओपियम जैसी ड्रग्स का सेवन किया था.

          डोप टेस्ट में जो उम्मीदवार फेल हुए हैं, उनमें ज्यादातर फाजिल्का और पटियाला के थे. विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकार ऐसे किसी भी उम्मीदवार को अपने पुलिस बल में शामिल नहीं कर सकती जो नशे के लती हों. पूर्व पुलिस

          महानिदेशक (डीजीपी) एस एस विर्क कहते हैं कि हमने इस दिशा में अपना मन तभी बना लिय़ा था जब राज्य में आतंकवाद खत्म हुआ था. 

          पुलिसबल करता है सेवन

          राज्य में दर्जनों बड़े ड्रग डीलरों को 2005 से लेकर 2007 के बीच दर्जनों लोग जेल की सीखचों में भेजा गया है. हालांकि पुलिस अधिकार इस तथ्य से सहमत हैं कि अफीम और पोस्ता के छिलकों का सेवन पुलिस बल के बीच भी होता है और इसमें कुछ भी नया नहीं है. इसे लम्बे समय से सामाजिक स्वीकार्यता भी मिली हुई है. 

          मीडिया रिपोर्ट्स भी कहती हैं कि पुलिस विभाग ने विभाग में नशा मुक्ति का अभियान चला रखा है. हाल ही में लगभग 15 पुलिसवालों ने मुक्तसर में 10 दिन तक चले नशा मुक्ति शिविर में भाग लिया है. ऐसे ही अभियान अन्य जिलों में भी चलाए रहे हैं. हालांकि कैच न्यूज से बातचीत में अफ़सर इन मीडिया रिपोर्टों को मनगढ़ंत बता रहे हैं. 

          पूर्व पुलिस महानिदेशक शशिकांत के मुताबिक 2009-10 में पुलिस का एक आंतरिक अध्ययन कराया गया था. इसमें ऐसे पुलिसवालों के बारे में पता चला था जो ड्रग्स का लती होने के नाते बीमारियों से पीड़ित थे. कुछ पुलिसवालों ने कम गुणवत्ता वाली स्मैक, पोस्ता दाना और फार्मास्युटिकल ड्रग्स ले रखी थी. 

          हालात सुधरेंगे

          उन्होंने पुलिस भर्ती में डोपिंग टेस्ट की पहल को बेहतर कदम बताया है. पटियाला में पंजाब विश्वविद्यालय के डॉ. राजवन्त सिंह कहते हैं कि पुलिसवालों में इस तरह के टेस्ट हर पांच साल पर हो सकते हैं. यह हर लिहाज़ से मददगार होगा क्योंकि एक बार पुलिस बल में भर्ती हो जाने के बाद उनका मेडिकल परीक्षण कभी नहीं कराया जाता.

          First published: 16 October 2016, 2:44 IST
           
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