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पंजाब, गुजरात हरियाणा, हर जगह दलितों पर दांव लगा रही आप

राजीव खन्ना | Updated on: 25 July 2016, 7:02 IST
(कैच)
QUICK PILL
  • पंजाब में आप पार्टी दलित हितों की रक्षा करने में विफल रही गुजरात की मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रही है, वहीं हरियाणा में भी पार्टी दलित लड़की के साथ हुए गैंगरेप के मुद्दे को जोर-शोर से उछाल रही है.
  • इन सब मुद्दों के जरिए आप ने पंजाब में चुनावी बिगुल बजा दिया है और इससे भाजपा को खासी परेशानी हो सकती है.

आम आदमी पार्टी चतुराईपूर्ण राजनीति करते हुए पंजाब में दलितों को लुभाने की कोशिश कर रही है. गुजरात, उत्तर प्रदेश और पंजाब में घटी घटनाओं के आधार पर आप दलितों का भावनात्मक समर्थन हासिल कर उसे वोट में तब्दील करने की जुगत में है.

पंजाब के विधानसभा चुनाव में अब कुछ ही माह बाकी रह गए हैं. इसी के मद्देनजर पार्टी राज्य में पिछले कुछ माह से दलितों के बीच आधार बनाने में लगी है.

आप नेताओं द्वारा शनिवार को भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और पंजाब में भाजपा-शिरोमणि अकाली दल नीत राज्य सरकार के खिलाफ देश भर में दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचार रोकने में विफलता का आरोप लगाते हुए किया गया विरोध प्रदर्शन इसी दलित राजनीति का एक हिस्सा है.

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आप के अनुसूचित जाति-जनजाति प्रकोष्ठ के संयोजक देव मान ने कहा देश भर में दलितों पर हो रहे हमले जाहिर करते हैं कि भाजपा एक दलित विरोधी दल है और भाजपा नीत सरकारें दलितों को सुरक्षा देेने के प्रति गंभीर नहीं है.

पंजाब में आप पार्टी ने विरोध प्रदर्शन के दौरान दलित हितों की रक्षा करने में विफल रही गुजरात की मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की, जो हाल ही में सोमनाथ जिले के उना कस्बे में गाय की चमड़ी उतारने पर दलित युवाओं के साथ की गई मारपीट के मामले के चलते सुर्खियों में रही.

आप हरियाणा के रोहतक जिले में एक दलित लड़की के साथ हुए गैंगरेप के मुद्दे को भी उछाल रही है. उक्त लड़की के साथ एक ही गैंग के लोगों ने दोबारा बलात्कार किया. इस पर पार्टी ने हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के इस्तीफे की मांग की है. पार्टी ने उत्तर प्रदेश में भाजपा नेता दयाशंकर सिंह की गिरफ्तारी की भी मांग की है, जिन्होंने बसपा प्रमुख मायावती के खिलाफ अपशब्द बोले थे.

इन सबके अलावा पार्टी को पंजाब में काफी अहम मुद्दा हाथ लगा है. आप वरिष्ठ अकाली नेता और मुख्य संसदीय सचिव विरसा सिंह वल्तोहा को निशाना बना रही है जिन्होंने दलितों के मसीहा बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर के खिलाफ कथित टिप्पणी की थी.

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कुछ दिनों पहले टीवी पर चल रही एक बहस के दौरान वल्तोहा ने भारत में आज के दौर के जातिवाद के लिए कथित तौर पर आंबेडकर को जिम्मेदार ठहराया था. तभी से आप नेतृत्व वल्तोहा को तुरंत निलम्बित करने और उनके खिलाफ संविधान निर्माता का अपमान करने के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने की मांग कर रहा है.

पार्टी ने वल्तोहा के बयान को निंदनीय और शर्मनाक करार दिया है. मान ने कहा वल्तोहा को इस बात का खयाल रखना चाहिए था कि आंबेडकर ने दलितों के उत्थान के लिए पूरी जिंदगी काम किया और भारत के संविधान में दलितों के कल्याण के लिए समुचित प्रावधान निर्धारित किए.

यहां तक कि टीवी कार्यक्रम में भी दर्शकों ने वल्तोहा के बयान के खिलाफ आवाज उठाई और एंकर को उस बहस को वहीं रोक देना पड़ा.

आप दलितों की तरफ हाथ बढ़ा चुकी है, बसपा भी क्षेत्र में पुनः अपना आधार तलाश रही है

पटियाला में प्रदर्शन स्थल से मान ने कैच न्यूज को बताया, 'हमने जहां-जहां ये विरोध प्रदर्शन किए हैं वहां हमें लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला है. हमने जो चार मुद्दे उठाए हैं, वे बहुत महत्वपूर्ण हैं.'

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पंजाब में तो आप ने चुनावी बिगुल बजा ही दिया है और कड़ी चुनौती दे रही है. दूसरे राज्यों जैसे हरियाणा और गुजरात में भी पार्टी अपना आधार तलाश रही है. इससे भाजपा को खासी परेशानी हो सकती है.

आप पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हाल ही शुक्रवार को उना के पास मोटा समधियाला गांव जा कर पीड़ित दलितों से मिले थे.

वहां केजरीवाल ने कहा, ‘हां हम राजनीति कर रहे हैं लेकिन सिर्फ दलितों को न्याय दिलाने के लिए, भाजपा इनके दमन की राजनीति कर रही है.’

वे आधे घंटे तक 52 साल के बाबू सर्वेया के साथ रहे, जिनको गांव के ही कुछ गोरक्षकों ने मारकर सिर फोड़ दिया था.

खबरों के अनुसार, केजरीवाल का गांव में पहुंचते ही बुलंद नारों के बीच जोरदार स्वागत किया गया. पिछले कुछ दिनों से आप लोगों के बीच पहुंच बना रही है और हरियाणा के विभिन्न राजनीतिक घटनाक्रम पर खुल कर प्रतिक्रिया दे रही है.

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दलित राजनीति की बात की जाए तो पंजाब में अब तक किसी पार्टी ने दलित मतदाताओं को रिझाने की कोशिश नहीं की जबकि राज्य की 30 फीसदी से अधिक आबादी दलितों की है.राज्य में दलित कभी भी राजनीतिक रूप से प्रभावशाली नहीं रहे हैं.

पंजाब यूनिवर्सिटी के शिक्षक रौनकी राम ने बताया पंजाब की आबादी का 30 प्रतिशत हिस्सा होने के बावजूद दलितों के पास यहां 5 प्रतिशत जमीन भी नहीं है. वे 5 धर्माें में 39 उप जातियों में विभाजित हैं. राम पंजाब में दलितों के मुद्दों पर कार्य करते है.

इस बार हालात बदले नजर आ रहे हैं. एक तरफ आप दलितों की तरफ हाथ बढ़ा चुकी है, बसपा भी क्षेत्र में पुनः अपना आधार तलाश रही है. 1992 में बसपा को यहां नौ सीटों पर जीत मिली थी लेकिन उसके बाद से यहां इसका आधार कमजोर हुआ है.

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पिछले तीन विधानसभा चुनावों में पार्टी को यहां एक भी सीट पर जीत नहीं मिली. मायावती ने अपने हालिया पंजाब दौरे में पार्टी की प्रदेश इकाई में जान फूंकने की कोशिश की और ऐलान कर दिया कि पार्टी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी.

दूसरी तरफ केजरीवाल मार्च के महीने में दलित नेता काशीराम के जन्म स्थल रूपनगर के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने काशीराम को भारत रत्न दिए जाने की मांग की थी.

केजरीवाल प्रदेश में समय-समय पर दलितों के डेरे में भी चले जाते हैं. मार्च के महीने में वे डोबा इलाके के डेरा सचखंड बल्लान, रविदासिया दलितों के स्थल भी गए, ये प्रदेश की कुल जनसंख्या का 12 प्रतिशत हैं. वे कपूरथला जिले में वाल्मिकियों के धार्मिक स्थल रहीमपुर डेरा भी जा चुके हैं.

First published: 25 July 2016, 7:02 IST
 
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