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पंजाब चुनाव: ड्रग्स और पेड न्यूज आयोग के लिए सबसे बड़े खतरे

राजीव खन्ना | Updated on: 27 October 2016, 2:39 IST
(सजाद मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • पंजाब में चुनाव आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि ज़मीनी स्तर पर धन, ड्रग, बाहुबल, शराब वगैरह के दुरुपयोग पर कैसे काबू पाया जाए. 
  • चुनाव आयुक्त ने पंजाब में जमीनी हकीकत जानी है और उन कारणों की पहचान की है जो उसके सामने चुनौती बनकर उभरेंगे.

राज्य में चुनाव होने में कुछ ही महीने बाकी रह गए हैं. चुनाव आयोग को जमीनी स्तर पर ध्यान देने के अलावा ऐसे इलाक़ों की शिनाख्त करने की ज़रूरत है जहां मतदाताओं को किसी तरह की जोर-जबरदस्ती या किसी किस्म के खतरे का सामना करना पड़ सकता है. मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी की अध्यक्षता में नौ सदस्यीय टीम हालात का जायज़ा लेने के लिए पंजाब दौरे पर आई हुई है. 

टीम के सदस्यों ने राजनीतिक दलों के नेताओं, जनता से जुड़े लोगों, नागरिकों और प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात की है. मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी ने कहा है कि हम पूरी तरह निष्पक्षता और भेदभाव-रहित तरीके से चुनाव कराना चाहते हैं.

बनाई रणनीति

मुख्य चुनाव आयुक्त को पता चला है कि कुछ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी चुनाव में राजनीतिक दलों के प्रभाव में काम कर सकते हैं. लिहाज़ा, ऐसे लोगों की पहचान किए जाने की ज़रूरत है ताकि वे ट्रांसफर और पोस्टिंग में दखल न दे सकें. 

जैदी ने कहा कि हमने सरकार से कहा है कि व्यवस्था को नए सिरे से दुरुस्त किए जाने की ज़रूरत है. ऐसे लोगों की शिनाख़्त भी ज़रूरी है कि जिन्होंने निजी स्वार्थों के नाते व्यवस्था में घुसपैठ कर ली है. हम धन, शराब, ड्रग की जुगलबंदी रोकने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स गठित करेंगे. चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन से कहा है कि वह इन चिन्ताओं पर ध्यान देने के लिए 15 नवम्बर से अभियान चलाए.

सत्तारूढ़ अकाली-भाजपा गठबंधन को छोड़कर अन्य दलों ने राज्य में नीले राशन कार्डों पर रोक लगाने की मांग की है. इन कार्डों पर सत्तारूढ़ गठबंधन के मंत्रियों के फोटो छपे हुए हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि आने वाले राज्य विधान सभा चुनाव में अधिक से अधिक संख्या में केंद्रीय पुलिस बलों का उपयोग किया जाएगा. राजनीतिक दलों को आशंका है कि पुलिस सत्तारूढ़ गठबंधन के हाथों में खेल रही है. 

पिछले छह महीनों में सभी स्तरों पर पुलिस विभाग में ट्रांसफर हुए हैं. लगभग रोज ही. राजनीतिक दल चाहते हैं कि केंद्रीय पुलिसबलों को पहले से ही तैनात किया जाए ताकि व्यवस्था पर विश्वास की बहाली हो सके. जैदी ने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं. 

हम प्रभावी तरीके से अधिक से अधिक संख्या में केन्द्रीय बलों का उपयोग करेंगे. हम देखेंगे कि यहां और क्या किए जाने की जरूरत है. चुनाव आयोग से विभिन्न लोगों ने चुनावी गतिविधियों को निगरानी कैमरे में संचालित करवाए जाने का अनुरोध किया है.

मीडिया से चिन्ताएं

जैदी ने यह भी कहा कि राजनीतिक दलों ने पेड न्यूज को एक बड़ी और गम्भीर समस्या माना है. जागरुक नागरिक भी इस समस्या को लेकर चिन्तित हैं और वे अपने तरीके से काम कर रहे हैं. इसके अलावा भी राजनीतिक दलों के अपने प्रकाशन और चैनल हैं. चुनावों के मद्देनजर नए चैनल भी आ रहे हैं, जो बड़ी समस्या हैं. 

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दल चाहते हैं कि पंजाब में जितना जल्द हो सके, उतनी जल्दी आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू कर दी जाए. राजनीतिक दलों को एक ऐसा मंच उपलब्ध करना चाहिए ताकि वे संचार के विभिन्न माध्यमों के जरिए आम जनता तक अपने विचार पहुंचा सकें. 

दबावों में पुलिस अधिकारी

मुख्य चुनाव आयुक्त ने आगे खुलासा किया कि कानून-व्यवस्था के मुद्दे और सुरक्षा परिदृश्य पर हमने सभी जिला पुलिस अधिकारियों से कहा है कि वे ऐसे क्षेत्रों की शिनाख्त करें जहां मतदाताओं को किसी जोर-जबरदस्ती या किसी किस्म के

खतरे का सामना करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि यह समस्या सीधे थाने से ही शुरू हो जाती है. ऐसे पुलिस अधिकारियों का भी डाटाबेस तैयार किया जा रहा है जहां वे क्षेत्रीय नेताओं के प्रभाव में हैं और ऐसे थाने चुनाव आयोग के राडार पर रहेंगे.

जैदी ने कहा कि हमने अधिकारियों से कहा है कि उन्हें निष्पक्ष, पक्षपात रहित और स्वतंत्र चुनाव कराना चाहिए. मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक से कहा गया है कि कोई अधिकारी बाहरी प्रभाव में काम न करे. अगर कोई भी अधिकारी बाहरी प्रभाव में आकर काम करता पाया जाएगा तो उसके खिलाफ दंडात्मक और कानूनी कार्यवाही की जाएगी.

कांग्रेस की स्थिति

इस बीच कांग्रेस ने पुलिस कर्मियों को दी जा रही 'डमी पोस्टिंग' की जांच चुनाव आयोग से करने को कहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार कांग्रेसनेता गुरप्रीत सिंह कंगर, सुरिन्दर सिंगला और नाथूराम ने कहा है कि सरकार द्वारा चुनाव के पहले जो अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई है, वह पूरी तरह से बहानेबाजी है. 

इन नेताओं ने आरोप लगाया है कि कई मामलों में तो पुलिसकर्मी, जिन्हें चुनाव आयोग के निर्देश पर शिफ्ट किय़ा गय़ा है, उन्हें ऐसी डमी या ऐसी जगह लगाया गया है जहां से वे अपने राजनीतिक आकाओं की मदद आसानी से कर सकते हैं.

इनमें से तो कई पुलिस कर्मियों को शिफ्ट करने के लिए विशेष पद सृजित किए गए जैसे कि कम्प्यूटर सेल, साइबर सेल, कन्ट्रोल रूम, पुलिस ट्रेनिंग स्कूल, स्पेशल ब्रांच आदि. कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि तथ्य तो यह है कि चुनाव आयोग ने 20 हज़ार ऐसे अपराधियों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया है जो राज्य में खुले घूम रहे हैं. उन्हें पुलिस का कोई डर नहीं है. ऐसे में यह संकेत है कि पंजाब में गुंडाराज बढ़ रह है.

अकालियों की मांग

अकालियों ने चुनाव आयोग से कहा है कि चुनाव और मतदान की तारीख़ की घोषणा के साथ ही नतीजे घोषित करने की अवधि का अंतर कम रखा जाए. आयोग से मिलने गए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि आचार संहिता की अवधि ज्यादा होने से जहां राज्य में अकारण ही विकासात्मक गतिविधियां प्रभावित होती हैं. वहीं परिणाम घोषित होने तक अनिश्चितता बनी रहती है. यह पंजाब जैसे राज्य के लिए अच्छा नहीं है. 

उन लोगों ने यह भी मांग की है कि आचार संहिता लागू रहने की अवधि में नगदी ले जाने की मात्रा भी बढ़ाई जाए. अकाली नेताओं ने कहा कि पिछले चुनावों में देखा गया है कि आम व्यापारियों को भी चुनाव के समय नगदी ले जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा क्योंकि चुनाव आयोग ने चुनाव के समय नगदी ले जाने की बहुत कम सीमा तय की है. इसका राज्य की व्यापारिक गतिविधियों पर विपरीत असर पड़ता है.

अकालियों ने चुनाव आयोग से कहा है कि सभी अन्य राजनीतिक दल झूठे और विद्वेषपूर्ण अभियान में लिप्त हैं

अकाली नेताओं ने मांग की है कि चुनाव रैलियां और अन्य सभी मीटिंग आयोजित करने के लिए 'नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट' लेने की प्रक्रिया को आसान किया जाए ताकि प्रत्याशियों को चुनाव अभियान के दौरान अकारण उत्पीड़न का सामना न करना पड़े. उन्होंने चुनाव आयोग की जानकारी में यह बात लाई है कि किस तरह से कई राजनीतिक दलों के नेता सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर चरित्र हत्या आदि जैसे आरोप लगा रहे हैं जिस पर सख़्ती के साथ रोक लगाई जानी चाहिए.

First published: 27 October 2016, 2:39 IST
 
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