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पंजाब : कृषि बिलों के खिलाफ 24 से 26 सितंबर तक किसान संगठन करेगा 'रेल रोको आंदोलन'

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 September 2020, 11:58 IST

पंजाब के किसानों ने गुरुवार को घोषणा की कि वे केंद्र सरकार के तीन कृषि अध्यादेशों (agriculture ordinances) के विरोध में 24 सितंबर से 26 सितंबर तक तीन दिवसीय रेल रोको आंदोलन करेंगे. प्रदर्शन का आह्वान किसान मजदूर संघर्ष ने दिया है. किसान मजदूर संघर्ष समिति के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने समाचार एजेंसी ANI को बताया "हमने राज्य में 24 से 26 सितंबर तक कृषि बिलों के खिलाफ रेल रोको आंदोलन करने का फैसला किया है." सरवन सिंह पंधेर ने कहा ''हरसिमरत कौर बादल जी का इस्तीफा बहुत देर से आया है. उन्होंने लोगों का गुस्सा शांत करने के लिए इस्तीफा दिया. आज भी अगर सुखबीर बादल जी समझते हैं, तो उन्हें अपने लाखों कार्यकर्ताओं के साथ संसद का घेराव करना चाहिए''.

पंजाब के अन्य किसान संगठनों ने बिलों के विरोध में 25 सितंबर को भारत बंद का आह्वान किया है. राज्य में पूरे सप्ताह विभिन्न किसान निकायों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में सोमवार को भी प्रदर्शन हुए. हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने कृषि अध्यादेशों को तत्काल वापस लेने की मांग करते हुए 10 सितंबर को राष्ट्रीय राजमार्ग -44 को अवरुद्ध कर दिया था. कोरोना वायरस महामारी के दौरान प्रशासन की चेतावनी को धता बताने के लिए हरियाणा के कुरुक्षेत्र के पास पिपली में भी प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया गया.


केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देते हुए हरसिमरत कौर ने कहा ''मैंने देश और पंजाब के किसानों का साथ दिया. जो कई दिनों से सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं. हमारी मांग यही थी कि इस अध्यादेश को लेकर जो शंका है, उसे दूर किया जाए. आज मैं उस सरकार का हिस्सा नहीं होना चाहती, जिसने शंका को दूर किए बिना अध्यादेश पास करने का फैसला किया''. सुखबीर सिंह बादल, अध्यक्ष शिरोमणि अकाली दल ने कहा ''हमने किसान की भावनाएं केंद्र सरकार को बताने की कोशिश की, परन्तु जब केंद्र सरकार ने किसान की शंका को दूर नहीं किया और तुरंत संसद में बिल लेकर आ गए तो हमारी पार्टी ने फैसला किया कि हम इसका विरोध करेंगे''.

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कृषि सुधार विधेयकों के पारित होने पर पीएम मोदी ने कहा ''किसानों को भ्रमित करने में बहुत सारी शक्तियां लगी हुई हैं. मैं अपने किसान भाइयों और बहनों को आश्वस्त करता हूं कि MSP और सरकारी खरीद की व्यवस्था बनी रहेगी. ये विधेयक वास्तव में किसानों को कई और विकल्प प्रदान कर उन्हें सही मायने में सशक्त करने वाले हैं''. केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि दोनों विधेयक किसान के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले हैं. देश तो 1947 में आजाद हुआ लेकिन किसान मंडियों की जंजीरों में बंधा था. आज PM मोदी के नेतृत्व में इन विधेयकों के माध्यम से उन्हें आजादी मिली है.

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First published: 18 September 2020, 11:58 IST
 
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