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पंजाबः किसानों की आत्महत्या बन गई राजनीतिक फुटबॉल

राजीव खन्ना | Updated on: 9 May 2016, 23:03 IST
QUICK PILL
  • पंजाब में किसानों की आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे हैं. इस साल अब तक 58 किसान आत्महत्या कर चुके हैं.
  • राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव हैं. सभी राजनीतिक दल किसानों की बदहाली के लिए एक-दूसरे को दोषी बताने में जुटे हैं.

पंजाब में किसानों की आत्महत्या रुकने का नाम नहीं ले रही, वहीं राजनीतिक दल इसके लिए एक दूसरे को दोषी बताने में व्यस्त हैं. पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

देश के संपन्न राज्यों में शुमार किए जाने वाले पंजाब में इस साल अब तक 58 किसान आत्महत्या कर चुके हैं. चंद रोज पहले राज्य के बरनाला जिले के एक गांव में किसान बलजीत सिंह और उनकी मां बलवीर सिंह ने कीटनाशक खाकर आत्महत्या कर ली.

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दोनों के कर्ज (लोन) न चुका पाने के कारण अपनी जमीन और फार्म खाली करने के लिए कहा गया था. उन्होंने बैंक के अधिकारियों और पुलिसवालों के सामने ही अपनी जान दे दी.

इस साल के शुरुआत में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के एक अध्ययन के अनुसार राज्य में किसानों पर कुल 69,355 करोड़ रुपये का कर्ज था. ये अध्ययन पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के डॉक्टर ज्ञान सिंह के नेतृत्व में किया गया था.

संपन्न माने जाने वाले राज्य पंजाब में इस साल अब तक 58 किसान आत्महत्या कर चुके हैं

फसलों को हुए नुकसान, कीटनाशक के अत्यधिक प्रयोग और दोयम दर्जे के बीजों की वजह से स्थिति और बिगड़ गई.

राज्य में शिरोमणी अकाली दल की सरकार है. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उनके मंत्रिमंडल के सदस्य किसानों के गुस्से को भापंते हुए अब इससे जुड़ी घोषणाएं कर रहे हैं. लेकिन इससे किसानों को कोई बड़ी राहत मिलती नहीं नज़र आ रही.

राज्य में अगले साल चुनाव होने वाले हैं इसलिए किसानों की दुर्दशा के मुद्दे पर भी राजनीति होनी शुरू हो गई है.

सीएम बादल ने कुछ दिनों पहले ही किसानों की बदहाली का जिम्मेदार केंद्र की कांग्रेस सरकारों की 'किसान-विरोधी नीतियों' का बताया.

बादल ने केंद्र सरकार से कृषि विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय कमिटी बनाने की बात की है ताकि कृषि संकट से किसानों को उबारा जा सके.

बादल ने कहा कि फसल, डीजल, कीटनाशक, खाद के दाम और न्यूनतम समर्थन मूल्य(एमएसपी) जैसी चीजों पर राज्य का कोई नियंत्रण नहीं होता.

बादल ने कहा कि उनकी सरकार किसानों की समस्या के निदान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नियमित संपर्क में है.

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बादल ने बताया कि राज्य सरकार ने पंजाब स्टेट पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को पांच करोड़ रुपये वार्षिक सब्सिडी देने की घोषणा की है. राज्य सरकार ने प्राकृतिक आपदा कोष को भी 3400 रुपये प्रति एकड़ से बढ़ाकर आठ हजार रुपये प्रति एकड़ कर दिया है.

राज्य के राजस्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया ने भी कहा कि खेती मुनाफे का काम नहीं रहा क्योंकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम नहीं मिल रहा है. राज्य के कृषि मंत्री तोता सिंह ने भी किसानों कपास के हाइब्रिड बीज न प्रयोग करने  की सलाह दी है.

तीन दशकों से किसानों की आत्महत्या और कृषि मुद्दों पर काम करने वाले इंदरजीत सिंह जयजी कहते हैं, "बादल जिम्मेदारी से बच रहे हैं क्योंकि इसके लिए पूरी तरह वही जिम्मेदार हैं."

जयजी ने भाखड़ा ब्यास मेनलाइन कैनाल में मिलने वाले शवों का मुद्दा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग(एनएचआरसी) में उठाया है. वो कहते हैं, "पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार इस कैनाल में हर महीने 35-45 शव मिलते हैं. बहुत से शवों का पता ही नहीं चलता क्योंकि वो डूब जाते हैं या रात में कहीं और बह जाते हैं."

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार भाखड़ा-ब्यास कैनाल में हर महीने 35-45 शव मिलते हैंः इंदरजीत सिंह

जयजी का मानना है कि किसानों की आत्महत्या से जुड़े किसी भी आकंड़ों को जारी करने से पहले कृषि मंत्रालय को खुफिया संस्थाओं और एनएचआरसी से पुष्टि करवानी चाहिए.

आम आदमी पार्टी के किसान सेल के अहबाब ग्रेवाल ने कैच को बताया, "जब सरकार ने इतने सालों तक कुछ नहीं किया तो अब मुख्यमंत्री की बयानबाजी का क्या मतलब है?"

उपज की कीमत


उपज की कीमत किसानों के लिए बड़ा मुद्दा है. जयजी कहते हैं, "कषि पहले राज्य की सूची में था लेकिन 1971 में इसे केंद्र की सूची में डाल दिया गया."

ग्रेवाल कहते हैं कि अनाज बाजार में पुलिस, नेता और बाबुओं के बीच एक गठजोड़ काम करता है. वो कहते हैं, "किसानों के पास इन लोगों के हाथों में फंसने के अलावा कोई चारा नहीं बचता. फसलों से होने वाला असल मुनाफा इस गठजोड़ का होता है. बासमती चावल के मामले में यही हुआ."

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस अगले साल होने वालों चुनावों के मद्देनजर किसानों की बदहाली के मुद्दे पर पूरा जोर दे रहे हैं. सभी राजनीतिक दल एक दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे.

पंजाब कांग्रेस के प्रमुख कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा. आम आदमी पार्टी ने बरनाला के किसान की आत्महत्या के बाद उनके बच्चों को गोद लेने की घोषणा की थी.

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अमरिंदर ने इसपर टिप्पणी करते हुए कहा, "भगवान के लिए त्रासदी पर जश्न मनाना बंद करें. बरनाला के किसान के परिवार की राहत के लिए की गई घोषणा बढ़िया है लेकिन आत्महत्या करने वाले दूसरे किसानों के परिवार के लिए भी आप के पास क्या योजना है?"

अमरिंदर ने कहा कि पंजाब के किसानों की समस्या काफी जटिल है और ये फोटोबाजी और नाटक से नहीं सुधरने वाली. इसके लिए एक समेकित नीति बनानी होगी.

बहरहाल, राज्य में अगले साल सरकार चाहे जिसकी बने किसानों को फिलहाल कोई ठोस राहत मिलती नहीं दिख रही.

First published: 9 May 2016, 23:03 IST
 
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