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माघी मेले की तर्ज पर बैशाखी मेले में लगा सियासी दलों का जमघट

राजीव खन्ना | Updated on: 15 April 2016, 0:10 IST

बैसाखी के मौके पर तलवंडी साबू में होने वाले विभिन्न पार्टियों के वार्षिक सम्मेलन में राजनीतिक बातचीत अन्य सभी मुद्दों पर भारी रही. माघी मेले और होला मोहल्ला के बाद यह वह अंतिम मौका था जिसका उपयोग राजनीतिक दल एक ऐसे धार्मिक मौके के रूप में कर रहेे थे जहां वह राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों से पहले अपने मतदाताओं से रूबरू हो सकते हैं.

राज्य की राजनीति के तीन प्रमुख खिलाड़ियों, कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और आम आदमी पार्टी (आप), ने इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए एक दूसरे पर सांप्रदायिक कार्ड खेलने का आरोप लगाया. इसके अलावा दूसरे अन्य आर्थिक और सामाजिक मुद्दों को भी उठाया जो बीते कुछ महीनों में राज्य के राजनीतिक परिदृश्य पर छाये रहे हैं.

इन तीनों ही दलों ने अपनी रैलियों में अधिक से अधिक समर्थकों को जुटाने की कवायद में रात-दिन एक कर दिया.

आप नेतृत्व ने जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े हुए मुद्दों को उठाने का फैसला किया है

कट्टरपंथी संगठनों ने भी इस मौके पर अपना एक पंडाल लगाया हुआ था. उन्होंने 10 नवंबर को दमदमा साहिब में सिखों के धार्मिक अनुष्ठान शर्बत खालसा का आयोजन किया था. पिछले शर्बत खाासला का आयोजन बीते वर्ष 10 नवंबर को अमृतसर के बाहरी इलाके के छाबा गांव में किया गया था.

इस मौके पर राज्य में सत्तासीन शिरोमणि अकाली दल के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और पार्टी के पंडाल में मौजूद लोगों को आॅपरेशन ब्लूस्टार और 1984 के सिख विरोधी दंगों की याद दिलाई.बादल का कहना था कि इन दोनों ही घटनाओं के लिये सिर्फ कांग्रेस पूरी तरह से जिम्मेदार है. उन्होंने कहा, ‘‘पंजाब के लोग एक ऐसी पार्टी का पक्ष कैसे ले सकते हैं जो उनके पंथ (धार्मिक समुदाय) के खिलाफ रही है. यह वही पार्टी है जो हमारे सर्वोच्च धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाने वाले आॅपरेशन ब्लूस्टार और निर्दोष लोगों की मौत की जिम्मेदार है.’’

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उनसे पहले लोगों को संबोधित करते हुए उनके बेटे राज्य के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली की राज्य सरकार पर खुलकर हमला बोला.

आप नेतृत्व को ‘टोपीवालों’ का समूह कहते हुए सुखबीर ने कहा, ‘‘दिल्ली सरकार ने बैसाखी के मौके पर सार्वजनिक अवकाश की घोषणा नहीं की. ऐसे में लोग कैसे इस पार्टी को किसानों और पंजाबियों की हितैषी पार्टी मान सकते हैं?’’ इसके अलावा उन्होंने बीते सप्ताह दिल्ली के मशहूर शीशागंज गुरुद्वारे में निर्मित ‘प्याऊ’ को गिराने के मुद्दे को भी उठाते हुए इसे पूरे समुदाय के खिलाफ किया हुआ कृत्य बताया.

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अकाली दल और उसके सहयोगी लगभग रोजाना इस मुद्दे को उठा रहे हैं. यहां तक कि सुखबीर ने तो इस मामले को देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह के समक्ष भी उठाया है. आप नेता यह कहते हुए बीजेपी पर जवाबी हमला बोल रहे हैं कि विध्वंस की यह कार्रवाई उनकी सरकार द्वारा नहीं बल्कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) द्वारा की गई है जिसपर अकालियों की सहयोगी बीजेपी का कब्जा है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीते वर्ष समूचे राज्य में पवित्र पुस्तकों को अपवित्र किये जाने की लगातार हुई घटनाओं को उठाते हुए प्रकाश सिंह बादल और उनके बटे पर हमला बोला. ‘‘यह दोनों हमारी पवित्र पुस्तकों के अपमान करने और उन्हें फाड़कर इधर-उधर फेंकने की घटनाओं के लिये जिम्मेदार हैं. कोई भी इन्हें सच्चा सिख कैसे मान सकता है. पहले तो उन्होंने इस काम को होने दिया और फिर इसके बाद बेहबल कलां में शातिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवा दी जिसमें दो लोगों की मौत हुई और 40 से अधिक घायल हुए.’’

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आप की तरफ से बादल परिवार पर हमला करने का जिम्मा सुच्चा सिंह छोटेपुर ने उठाया. उन्होंने कहा, ‘‘इन्होंने धार्मिक पुस्तकों के अपमान की घटनाओं को होने दिया ताकि लोगों का ध्यान इनकी नाकामियों से संबंधित मुद्दों से हटाया जा सके.’’ इसके अलावा उन्होंने गुरुद्वारा शीशगंज साहिब में प्याऊ के ध्वंस के मुद्दे को ‘मिनी ब्लूस्टार’ कहने के लिये सुखबीर की भी आलोचना की. उन्होंने कहा, ‘‘वे सिर्फ लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं. प्याऊ का निर्माण दोबारा करवा दिया गया है.’’

धार्मिक मुद्दों के अलावा अकालियों ने इस मौके को अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाने का मौका भी नहीं चूका. उन्होंने किसानों और श्रमिकों के कल्याण के लिये उठाये गए कदमों को सामने रखा. इसके अलावा उन्होंने एक बार फिर पंजाब के पानी के बंटवारे और सतलज-यमुना लिंक (एसवाईएल) के निर्माण को लेकर आमराय बनाने का प्रयास करते हुए कहा कि पंजाब किसी को भी अपने हिस्से का पानी नहीं देगा. उन्होंने कांग्रेस और अकालियों दोनों पर ही पंजाब को धोखा देने का आरोप लगाया.

पंजाब किसी को भी अपने हिस्से का पानी नहीं देगा: अकाली सरकार

अमरिंदर ने एसवाईएल के मुद्दे पर बादल के रुख का कड़ा विरोध करते हुए अकालियों पर ढोंग करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘‘हमनें वर्ष 2004 में ‘‘द पंजाब टर्मिनेशन आॅफ एग्रीमेंट्स एक्ट को पास करवने के मात्र 4 घंटे के भीतर ही उसे राज्यपाल से मंजूरी भी दिलवा दी थी. लेकिन बादल ने ‘‘द पंजाब सतलज यमुना लिंक कैनाल (रिहैबिलिटेशन एंड री-वेस्टिंग आॅफ प्रोप्राइटरी राईट्स) एक्ट 2016’’ को पास करवाकर उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया है. उन्होंने उच्चतम न्यायालय को हमारे खिलाफ निर्णय देने का मौका प्रदान किया है. इसके बाद वे इस्तीफा देते हुए इस मामले को भुनाने के क्रम में समयपूर्व चुनाव की घोषणा कर देंगे.’’

उन्होंने पंजाब की जनता के साथ किये गये गलत कामों के बदले समूचे बादल परिवार को सलाखों के पीछे भेजने का वायदा भी किया. उन्होंने पंजाब के किसानों की दुुर्दशा, युवाओं के बीच फैली बेरोजगारी, दिनों-दिन बढ़ते नशे का कारोबार और बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के लिये उन्हें जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने मंत्रालय का गठन करने से पूर्व सत्ता संभालने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर काबू रखने के लिये एक लोकपाल की नियुक्ति करूंगा.’’

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इसके अलावा अमरिंदर ने एसवाईएल के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे हमेशा हरियाणा के पक्ष में काम करेंगे. अमरिंदर ने कहा, ‘‘उनका पैतृक गांव हिसार के नजदीक है और अगर उन्होंने उनके पक्ष में काम नहीं किया तो वे उन्हें वहां घुसने भी नहीं देंगे.’’

इसके अलावा उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दिल्ली की जनता से किये गए वादे पूरे न करने और पंजाब के लोगों को झूठी उपब्धियों के बल पर गुमराह करने का आरोप भी लगाया.

आप के पंजाब नेतृत्व पर चुटकी लेते हुए अमरिंदर ने कहा कि आप की तरफ झुक रहे युवाओं को सही रास्ता दिखाये जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा, ‘‘आखिर राज्य का शासन किसे हाथों में होगा? बरनाला सरकार में मात्र तीन महीने के लिये राज्य मंत्री का पद संभालने वाले छोटेपुर या फिर भगवंत मान जिनके मुंह से उस समय सुबह के 11 बजे भी शराब की बू आती है जब वे संसद में मेरे सामने से गुजरते हैं.’’

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आप नेतृत्व ने जमीनी स्तर पर जनता से जुड़े हुए मुद्दों को उठाने का फैसला किया है. भगवंत मान ने किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्याओं और युवाओं के बीच लगातार बढ़ रही नशाखोरी के मामले को उठाया. ‘‘आसपास के राज्यों से आने वाले सांसद इस बात का यकीन ही करने को तैयार नहीं होते हैं कि जंलाब के किसान जिन्हें देश में सबसे अधिक खुशहाल और समृद्ध माना जाता है आत्महत्या भी कर सकते हैं. मैं उन्हें बताता हूं कि समृद्धता की यह झूठी छवि सिर्फ अकालियों के स्वामित्व वाले चैनलों पर ही देखी जा सकती है. हाल ही में एक व्यक्ति ने नशाखोरी की लत के चलते मौत के मुंह में समा गए अपने बेटे के अंतिम संस्कार के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक ज्ञापन भेजने का फैसला किया था. कम से कम अब तो अकालियों को यह स्वीकार करना चाहिये कि पंजाब नशाखोरी की समस्या से त्रस्त है.’’

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पार्टी के नेता संजय सिंह ने अकालियों पर उनकी शासन करने की क्षमताओं पर सवाल उठाने के लिये निशाना साधा. ‘‘वे हमारे अनुभव पर सवाल उठाते हैं. यह सच है कि हमारे पास लोगों को धोखा देने और खनन और नशा माफिया चलाने का कोई अनुभव नहीं है. एक बार हमारे सत्ता में आने के बाद इन सब कामों में लगे लोगों का ठिकाना सिर्फ जेल होगा.’’

First published: 15 April 2016, 0:10 IST
 
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