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#MeToo: क्वीन फिल्म के डायरेक्टर से लेकर चेतन भगत तक, महिलाओं के यौन उत्पीड़न की कहानियां आयी सामने

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 October 2018, 10:55 IST
(Indian express)

महिलाओं की प्रगतिशीलता की मिसाल बनी फिल्म 'क़्वीन' के डायरेक्टर विकास बहल के साथ ही आज के युवाओं के चहेते लेखक चेतन भगत तक के नाम पर यौन उत्पीड़न के केस हैं. इतना ही नहीं इस लिस्ट में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पूर्व एग्जीक्यूटिव एडिटर और डीएनए के पूर्व एडिटर इन चीफ गौतम अधिकारी का भी नाम शामिल है.

सोशल मीडिया पर फिल्म, मीडिया और मनोरंजन के क्षेत्र में यौन उत्पीड़न के मामले उठाने के चलते ये नाम सामने आए हैं.
इसमें महिलाओं ने अपने साथ हुए मौखिक और शारीरिक हमलों की कहानी शेयर की है. #MeToo और #TimesUp कैम्पेन के चलते महिलाओं ने कुछ स्क्रीनशॉट भी साझा किए. इन बड़े नामों से जुड़े संस्थानों का कहना है कि वो इनके खिलाफ एक्शन ले रहे हैं.

इसी लिस्ट में एक था फैंटम फिल्म्स, अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी और बहल द्वारा जिसे बनाया गया था. हफपोस्ट इंडिया की एक रिपोर्ट में, फैंटम की एक पूर्व महिला कर्मचारी ने मई 2015 में गोवा के एक होटल में यौन उत्पीड़न के लिए बहल पर आरोप लगाया था. उसने अपने साथ हुई घटना साझा करते हुए कहा कि उसे अनुराग कश्यप पर विश्वास था, और उसने आरोप लगाया की इस मामले में कश्यप ने कार्रवाई नहीं की थी. उसने 2017 में कंपनी छोड़ दी.

 

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार घटना की पुष्टि करते हुए कश्यप ने रिपोर्ट में कहा, "जो भी हुआ वह गलत था. हम इसे अच्छी तरह से हैंडल नहीं कर पाए. हम असफल रहे. मैं किसी और को इसके लिए कोई दोष नहीं दे सकता बजाय इसके कि में खुद को दोष दूँ. लेकिन अब हम बेहतर करने के लिए दृढ़ हैं. बहल ने जो किया है वह भयावह है. हम पहले से ही सुधार के रास्ते पर हैं और इसे ठीक करने के लिए अपनी क्षमता अनुसार सब कुछ करेंगे. "

बाद में कश्यप ने ट्विटर पर ये घोषणा भी की कि फैंटम फिल्म्स को भंग कर दिया गया है. इस मामले में हिंदी फिल्म उद्योग के कई सदस्यों ने बहल की निंदा की, और महिला को अपना समर्थन दिया.

इस मामले के सामने आने के बाद अलीगढ़ फिल्म के निदेशक हंसल मेहता ने द संडे एक्सप्रेस ने कहा, "अभी, मैं पिता के रूप में अधिक चिंतित हूं और आश्चर्य करता हूं कि मेरी बेटियों को फिल्म में शामिल होना चाहिए या नहीं. मुझे आशा है कि हम महिलाओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाएंगे ... यह मुद्दा समानता, सुरक्षा और न्याय के बारे में है ... हमें सीमाओं को समझने की जरूरत है. "

वहीं मशहूर लेखक चेतन भगत के खिलाफ भी एक महिला ने सोशल मीडिया पर हुई उनकी चैट के स्क्रीशॉट साझा किए. इस चैट में चेतन कह रहे हैं कि वह उसे लुभाना चाहता है और उसके अपने विवाहित होने को दरकिनार कर दिया है.

इसके तुरंत बाद, भगत ने फेसबुक पर एक बयान जारी किया और कहा कि वह "संबंधित व्यक्ति से माफ़ी मांगना" चाहता था, उसने कहा कि उसे उसके साथ "मजबूत संबंध" महसूस हुआ था, और कहा कि उस चैट में दोस्ताना अंदाज में बातें हुईं जिन्हे गलत तरीके से पढ़ा गया.

चेतन ने इस मामले में सफाई देते हुए आगे कहा, "मैं संबंधित व्यक्ति से वास्तव में क्षमा चाहता हूं. स्क्रीनशॉट, निश्चित रूप से असली हैं, और मुझे खेद है कि अगर आपको लगा कि वे गलत थे तो मुझे उम्मीद है कि आप मेरी माफी स्वीकार करेंगे ... जैसा कि मैंने स्क्रीनशॉट में भी कहा है, मुझे एहसास हुआ कि मैं विवाहित हूं और यह किसी भी कार्रवाई की तलाश नहीं कर रहा था ... इसके अलावा , मैं यह भी स्पष्ट करना चाहता हूं कि कभी भी भौतिक, कोई अश्लील चित्र या शब्द कभी भी आदान-प्रदान नहीं किया गया था. "

इस लिस्ट में मीडिया के भी दिग्गज पीछे नहीं हैं. एक महिला पत्रकार ने आरोप लगाया है कि मुंबई के डीएनए के संपादक-इन-चीफ होने के दौरान, सहमति के बिना उसे "चूमा" दिया था. और इस मामले में गौतम अधिकारी ने कहा कि उन्हें इस घटना की याद नहीं है. उन्होंने द संडे एक्सप्रेस को बताया, "मैं इस घटना को बिल्कुल याद नहीं करता हूं. मुझे उसे एक सहयोगी के रूप में याद है जिसे मैंने सम्मान और विनम्रता के साथ व्यवहार किया, जैसा कि मैंने अपने सभी पूर्व सहयोगियों को किया था. मैं कई वर्षों पहले मीडिया उद्योग से सेवानिवृत्त हुआ हालांकि मैं अभी भी कभी-कभी लिखता हूं. मैं सभी सहयोगियों के प्रति विनम्र और आदरणीय रहा और मेरे हिस्से पर उत्पीड़न का कोई सवाल कभी नहीं था. सोशल मीडिया के माध्यम से इस तरह के आरोपों को कानून के माध्यम से शायद ही कभी सामना किया जा सकता है. इसलिए मैं किसी भी कानूनी कार्रवाई पर विचार नहीं करता हूं. "

इसी लिस्ट में आर आर श्रीनिवास भी हैं जो कि इस समय टाइम्स ऑफ इंडिया, हैदराबाद के रेजिडेंट संपादक हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया के प्रकाशक बीसीसीएल ने एक बयान जारी करते हुए कहा, "बीसीसीएल के पास मजबूत POSH (यौन उत्पीड़न रोकथाम) नीति है और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के किसी भी कार्य को बर्दाश्त नहीं करता है. यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों की जांच और पता लगाने के लिए इस नीति के तहत समिति की जगह है. समिति की अध्यक्षता एक वरिष्ठ महिला कार्यकारी द्वारा की जाती है और इसके अधिकांश सदस्यों को सामाजिक कार्य में प्रासंगिक अनुभव के साथ गैर सरकारी संगठन प्रतिनिधियों और कानूनी पेशेवरों के अलावा महिलाओं को पूरा किया जाता है. कंपनी बिना भेदभाव के समिति के निष्कर्षों का सम्मान करते हुए कार्य करती है. बीसीसीएल अपने सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित कार्य वातावरण बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.''

इतना ही नहीं पिछले हफ्ते, जाने-माने कॉमेडी सामूहिक एआईबी के स्टैंड अप कॉमेडियन पर भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगे थे.

First published: 7 October 2018, 10:42 IST
 
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