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राफेल पर एक और खुलासा : सौदे से पहले मोदी सरकार ने हटा दिए भरष्टाचार रोकने के प्रावधान

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2019, 12:08 IST

राफेल को लेकर अख़बार द हिन्दू ने एक और बड़ा खुलासा किया है. रिपोर्ट के अनुसार इस डील से पहले नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार ने राफेल डील से भ्रष्टाचार विरोधी दंड प्रावधानों को हटा दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने 2013 की DPP के अनुसार इस सौदे पर हस्ताक्षर किये थे लेकिन पेनाल्टी, अनुचित प्रभाव, इंटग्रिटी पैक्ट और एजेंट/एजेंसी से जुड़े कमशीन और खातों तक पहुंच से जुड़े प्रावधानों को इस सौदे अलग कर दिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने सौदे में उस प्रावधान को हटा दिया जिसमें दोनों कंपनियों को पेमेंट के लिए फ्रांस सरकार एक एस्क्रॉ अकाउंट ऑपरेट करने की बायत कही गई थी. रिपोर्ट के अनुसार सौदे पर हस्ताक्षर करने से पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के लिए एस्क्रो खाते के लिए वित्तीय सलाहकारों की सिफारिशों को खारिज कर दिया. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई सामग्रियों में किसी भी विवरण का हिस्सा नहीं था.

रिपोर्ट में कहा गया है कि बातचीत करने वाली टीम के तीन सदस्यों - एमपी सिंह, सलाहकार (लागत), एआर सुले, वित्तीय प्रबंधक (वायु), और राजीव वर्मा, संयुक्त सचिव और अधिग्रहण प्रबंधक (वायु) ने इसके लिए अपनी असहमति जताई थी. रिपोर्ट के अनुसार इस सौदे के लिए फ्रांस की सरकार ने कोई सॉवरेन गारंटी के बदले भारत सरकार को लेटर ऑफ कम्फर्ट दिया है. जो कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है.

राहुल गांधी ने किया हमला

इस रिपोर्ट के बाद राफेल सौदे को लेकर कांग्रेस प्रमुख राहुल गांधी ने सोमवार को कहा कि पीएमओ ने रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने से पहले भ्रष्टाचार विरोधी क्लॉज के प्रमुख प्रावधानों को माफ कर दिया. द हिंदू रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस प्रमुख ने कहा, “हर रक्षा सौदे में भ्रष्टाचार विरोधी खंड है. रिपोर्टों से पता चलता है कि पीएम ने भ्रष्टाचार विरोधी खंड को हटा दिया.

First published: 11 February 2019, 11:43 IST
 
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