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भारत को राफेल विमानों का सही सौदा मिला, बाकी खामियों पर ध्यान कब जाएगा?

कैच ब्यूरो | Updated on: 24 September 2016, 7:26 IST
(कैच)
QUICK PILL
  • बीते 17 महीनोें में भारत की ओर से किए गए बातचीत के प्रयासों से ही यह संभव हुआ है कि विमानों के दाम कम हुए. दासौत ने शुरूआत में 12 खरब यूरो की कीमत लगाई लेकिन भारत ने वार्ता कर यह कीमत 7.878 खरब यूरो तक लाने में सफलता प्राप्त की.
  • अगर भारत पर चीन और पाकिस्तान एक साथ हमला कर दें तो मुकाबले के लिए भारत को 44 स्क्वार्डन की जरूरत पड़ेगी लेकिन फिलहाल भारत के पास केवल 33 स्कावर्डन हैं. इनमें से 14 तो अवधिपार हो चुके मिग-21 और मिग-27 विमान हैं, जिन्हें 2017 के आरंभ में रिटायर कर दिया जाएगा. 

कई लोगों ने संभवतः भारत और फ्रांस के बीच हुए परमाण्वीय क्षमता वाले 36 राफेल लड़ाकू विमानों का सौदा होते देखा है. यह लगभग 17 माह पहले की बात है, जब मोदी ने फ्रांस में इस तरह की डील की बात कही. यह सौदा भारत में भी हो सकता था. उनमें से कुछ तो पहले ही से भारत के पास हैं। इस समय भारत को इसकी सख्त जरूरत है. दूसरी ओर फ्रांस इनमें से कुछ जेट को बिल्कुल तैयार हालत में बेचना चाहता है। लम्बे विचार-विमर्श के बाद शुक्रवार को इस सौदे पर दस्तख़त किए गए. इन लड़ाकू विमानों की डिलीवरी 2018 में शुरू की जएगी. 

सौदे की जानकारी

भारत ने फ्रांस की दासौत एविएशन के साथ जो सौदा किया है, वह सराहनीय है. बीते 17 महीनोें में भारत की ओर से किए गए बातचीत के प्रयासों से ही यह संभव हुआ है कि विमानों के दाम कम हुए. साथ ही सौदे के साथ मिलने वाले पैकेज में अत्याधुनिक मिसाइलें, हथियार और इसके कार्मिकों लिए प्रशिक्षण भी शामिल है.

 दासौत ने शुरूआत में 12 खरब यूरो की कीमत लगाई लेकिन भारत ने वार्ता कर यह कीमत 7.878 खरब यूरो तक लाने में सफलता प्राप्त की. इसमें लड़ाकू विमानों की लागत, पूरा हथियार पैेकेज, प्रदर्शन आधारित तर्क, भारत-विशिष्ट विकास और संबंधित आपूर्ति शामिल है.

भारत ने दासौत को इस बात पर भी मना लिया कि वह इस सौदे में हुई कमाई का 50 फीसदी भारत में ही निवेश करे. इससे काफी संख्या मेे रोजगार सृजन होगा और देश में ज्यादा निवेश आएगा. 

भरत पीछे हटा

सौदे के बाद एक सवाल उठता है कि भारत वायु सेना में 80 से 100 लड़ाकू विमानों की कमी को कैसे पूरा करेगा? उरी हमले के मद्देनजर इन दिनों भारत-पाक के अस्थिर मिजाज का पता लगाना मुश्किल है. पाकिस्तान ने तो अपने उत्तरी वायुक्षेत्र को लड़ाकू विमानों और उनके ड्रिलिंग के लिए प्रतिबंधित कर दिया है. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा चीन कभी भी पाक के साथ खड़ा हो सकता है, जब उसे लगेगा कि पाकिस्तान की सुरक्षा को भारत से सीधा खतरा है.

ऐसे समय में, राफेल जैसे ही कुछ लड़ाकू विमान भारत को दुश्मनों से लड़ने का हौसला देते हैं. ये विमान केवल हवा और जमीन पर ही मार करने के लिए नहीं बने हैं. इन विमानों का इस्तेमाल हवाई क्षेत्र में प्रभुत्व जमाने, जमीन पर समर्थन और हवाई निगरानी व जांच और सबसे महत्वपूर्ण, परमाणु हथियारों की डिलीवरी में किया जाता है.

अगर इन्हें सेवा में नहीं भी लगाया जाता है तो भी परमाणु क्षमता वाले ये लड़ाकू विमान प्रतिरोध के लिए भी काम आ सकते हैं. भारतीय वायुसेना की अपनी ही योजना के अनुसार, अगर भारत पर चीन और पाकिस्तान एक साथ हमला कर दे तो मुकाबले के लिए भारत को 44 स्क्वार्डन की जरूरत पड़ेगी लेकिन फिलहाल भारत के पास केवल 33 स्कावर्डन हैं. इनमें से 14 तो अवधिपार हो चुके मिग-21 और मिग-27 विमान हैं, जिन्हें 2017 के आरंभ में रिटायर कर दिया जाएगा. इसके अलावा मिराज-2000 और जगुआर को भी अपग्रेड किया जाएगा. 

भारतीय वायुसेना पहले ही कई समस्याओं से जूझ रही है. यहां तक कि रूस से खरीदे गए सुखोई विमान के स्पेयर पार्ट्स को लेकर भी परेशानी आती है. इनमें से केवल 50 प्रतिशत विमान ही चालू हालत मेें हैं. 

इन दिनों पाकिस्तान और चीन भी अपनी वायुसेनाओं को आधुनिक बनाने में लगे हैं. हथियार प्रतिबंधों के चलते चीन रक्षा के लिए पश्चिमी देशों के साथ मिल कर तो काम कर नहीं सकता लेकिन यह अत्याधुनिक लड़ाकू विमान बनाने के लिए रूस के साथ मिल कर काम कर रहा है. जेएफ-17 भी इसी कड़ी का हिस्सा हैं और योजनाएं प्रस्तावित हैं. दूसरी ओर पाकिस्तान अमेरिका की मदद से अपनी वायुसेना को प्रोन्नत बना रहा है. अमेरिका ने इसे 80 एफ-16 एस विमान बेचे हैं.

भारत के सामने विकल्प

कुछ ऐसी उत्साहजनक खबरें भी हैं कि भारत राफेल सौदे के लिए इंतजार नहीं कर सकता. भारत को अमेरिका ने बोइंग एफ 18 सुपर हॉर्नेट और लॉकहीड मार्टिन के एफ-16 के अच्छे सौदों का प्रस्ताव दिया है. यहां तक कि लॉकहीड मार्टिन ने अपनी पूरी असेंबली लाइन भारत लाने का प्रस्ताव रखा है, अगर उसे ठेके मिलने का आश्वासन दिया जाए. भारत स्वीडिश लड़ाकू विमान खरीदने के विकल्प भी तलाश रहा है. इसी सिलसिले में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर अगले माह स्वीडन जा रहे हैं। वे वहां इस सौदे की संभावनाएं तलाशेंगे.

भले ही उरी हमलों के बाद व्याप्त तनाव समाप्त हो गया हो लेकिन हमले होना तो बंद नहीं होंगे. इसी वजह से उम्मीद जताई जा रही है कि लड़ाकू विमानों के अधिग्रहण का अगला चरण शीघ्र ही शुरू होगा.

First published: 24 September 2016, 7:26 IST
 
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