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Rafale Fighter Jet: भारत की इन जरूरतों को पूरा करेगा राफेल लड़ाकू विमान, देश के पास हैं ये भी फाइटर एयरक्राफ्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 July 2020, 15:57 IST

Rafale Fighter Jet: किसी शक्तिशाली देश की सैन्य ताकत उस देश के सेना, वायु सेना और जल सेना के पास मौजूद अत्याधुनिक हथियार, लड़ाकू विमान और मिसाइलों से की जाती है. भारत (India) के पास चिनूक (Chinook), हरक्युलस (hercules), एफ-16 (F-16) और मिग-21 (MiG-21) मिग-27, जगुआर और सुखोई जैसे लडाकू विमान और हेलिकॉटर्स पहले से मौजूद हैं और आज यानी 29 जुलाई (29th July) को इंडियन एयरफोर्स (Indian Air Force) के बेड़े में राफेल लड़ाकू विमान (Rafale Fighter Jet) और शामिल हो गया. फ्रांस (France) से भारत पहुंचे पांच राफेल विमानों के भारतीय वायु सेना में शामिल होते ही भारत की ताकत में पहले की तुलना में भारी इजाफा हुआ है.

जिससे दुश्मन को नेस्तनाबूत करने के लिए भारत को एक ओर ताकतवर हथियार मिल गया है. बता दें कि आज से करीब 13 साल पूर्व यानी साल 2007 में भारत सरकार ने वायुसेना को ताकत देने के लिए मल्टीरोल नए लड़ाकू विमानों के लिए टेंडर जारी किये थे. टेंडर में अमेरिका ने एफ-16, एफए-18, रूस ने मिग-35, स्वीडन ने ग्रिपिन के साथ फ्रांस ने राफेल और यूरोपीय समूह ने यूरोफाइटर टाइफून ने दावेदारी पेश की थी. उसके बाद 27 अप्रैल 2011 को आखिरी दौड़ में यूरोफाइटर और राफेल लड़ाकू विमान भारतीय परिस्तिथियों के अनुकूल पाए गए. उसके बाद 31 जनवरी 2012 को सस्ती बोली और फील्ड ट्रायल के दौरान भारतीय परिस्थितियों और मानकों पर सबसे खरा उतरने के कारण यह टेंडर राफेल को दे दिया गया.


बता दें कि भारत पहुंचे रफेल जेट को फ़्रांस की कम्पनी दसॉल्ट एविएशन ने बनाया है. यूपीए सरकार के समय तय हुआ कि फ़्रांस की कम्पनी 18 विमान पूरी तरह से तैयार कर भारत को देगी और बाकी 108 विमान भारत में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ बनाये जायेंगे. इस समझौते में यह भी तय हुआ था कि फ़्रांस विमान बनाने की पूरी तकनीकी का हस्तांतरण भी भारत को करेगा. गौरतलब है कि कांग्रेस के शासन काल में सरकार ने 126 राफेल जेट खरीदने के लिए 12 अरब डॉलर की डील की थी. जिसमें एक जेट विमान की कीमत 629 करोड़ रुपये रखी गई थी. लेकिन बीजेपी की सरकार के आने के बाद ये आरोप लगाए जाने लगे कि बीजेपी सरकार एक जेट विमान को खरीदने के लिए 1611 करोड़ रुपये  खर्च कर रही है.

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अब बात करते हैं भारत को राफेल लड़ाकू विमान की जरूरत के बारे में- बता दें कि अब तक भारत लड़ाकू विमानों की खरीद रूस से करता था. वर्तमान में भी भारतीय वायुसेना में रूस में बने विमान मिग-21, मिग-27, सुखोई-30 जैसे विमान शामिल हैं. मिग -21 और मिग-27 की स्क्वाड्रन में गिरावट आई है. इसी के साथ भारतीय वायुसेना की ताकत केवल 31 स्क्वाड्रन तक ही सीमित रह गई है. लेकिन भारत को दो मोर्चों पर युद्ध करने के लिए 2027-32 की अवधि तक कम से कम 42 स्क्वाड्रन की जरुरत पड़ेगी. बता दें कि एक स्क्वाड्रन में 12 से 24 विमान होते हैं.

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भारत को अब पांचवी पीढ़ी के विमानों की जरुरत पड़ रही है क्योंकि दुनिया के लगभग सभी देशों के पास उन्नत किस्म के लड़ाकू विमान हैं ऐसे में भारत अगर नए और नई तकनीकी से लैस विमान नहीं खरीदता तो अन्य देशों से पिछड़ जाएगा. यहां तक कि पाकिस्तान ने भी चीन से एडवांस्ड पीढी के विमान जेएफ-17 और अमेरिका से एफ-16 खरीद लिए हैं ऐसे में भारत अब पुरनी तकनीकी के विमानों पर ज्यादा निर्भर नहीं रह सकता है.

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First published: 29 July 2020, 15:57 IST
 
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