Home » इंडिया » Raghhram Rajan says promis of farmer debt relief is not fair in election campaign
 

अर्थशास्त्रियों ने पार्टियों को दिखाया आईना, कर्जमाफी के चुनावी वादों से बर्बाद होती है अर्थव्यवस्था

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 December 2018, 14:10 IST

चुनावी मौसम में राजनैतिक पार्टियों द्वारा किसानों की कर्जमाफी के लिए किए जाने वादे देश में निवेश के लिए हानिकारक हैं. ये खुलासा आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन समेत देश के 13 अर्थशास्त्रियों ने तैयार की एक रिपोर्ट में किया गया है. इन अर्थशास्त्रियों का कहना है कि ऐसा करने से देश में कृषि क्षेत्र में होने वाला निवेश प्रभावित होता है. शुक्रवार को जारी हुई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में चुनावी वादों में किसानों के कर्ज माफ़ी की बात से निवेश के लिए अहम संसाधान दूसरी तरफ चले जाते हैं.

‘एन इकॉनॉमिक स्ट्रैटजी फॉर इंडिया’ नाम से जारी हुई इस रिपोर्ट को रघुराम राजन ने जारी करते हुए कहा कि किसानों के कर्ज माफी को किसी भी पार्टी को चुनावी वादों का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि इस मामले में वो निर्वाचन आयोग को भी लिख चुके हैं कि इस तरह के चुनावी वादों पर रोक लगा दी जाए.

राजन ने कहा कि राजनैतिक पार्टियों द्वारा इस तरह के चुनावी वादे करने से संबंधित राज्य की आर्थिक स्थिति पर भी अतिरिक्त दबाव बनता है. रिपोर्ट जारी करते हुए राजन ने कहा,''मैंने हमेशा कहा है और निर्वाचन आयोग को एक पत्र भी लिखा है कि वे इस पर रोक लगाए. मैं मानता हूं कि कृषि क्षेत्र की समस्या के बारे में निश्चित रूप से विचार किया जाना चाहिए.''

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साथ ही राजन ने किसानों की समस्या पर बात करते हुए कहा कि इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि क्या कर्ज माफ़ी ही किसानों की समस्या का एकलौता उपाय है? क्योंकि कुछ ही ऐसे किसान हैं जो कर्ज का सहारा लेते हैं. रघुराम राजन ने कहा, “इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि कृषि में काफी समस्याएं हैं, जिसे हमने किसानों द्वारा रेखांकित करते देखा है, और राजनीतिक पार्टियां भी ऋण माफी जैसे उपायों के जरिए उसपर प्रतिक्रिया दे रही हैं.”

First published: 15 December 2018, 13:58 IST
 
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