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राहुल गांधी बनाम संघ: सामने आ जाएगा कौन असली हिंदू है?

आकाश बिष्ट | Updated on: 4 September 2016, 7:59 IST

शुरू में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से दूरी बना कर चल रही कांग्रेस ने तय किया है कि वह भाजपा के इस वैचारिक संगठन को राहुल गांधी के खिलाफ किए गए अवमानना मामले पर उलझाए रखेगी. 2017 के महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस इस मुद्दे का पूरा राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है. कांग्रेस इस अवसर का इस्तेमाल करके भाजपा को घेरेगी.

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को अपनी वह अपील वापस ले ली, जिसमें उन्होंने संघ द्वारा उनके खिलाफ किए गए अवमानना मामले को खारिज करने की मांग की थी. संघ कार्यकर्ताओं पर की गई टिप्पणी के बारे में उन्होंने कहा, ‘‘मैं अपने हर शब्द पर कायम हूं. मैं अपने शब्द वापस नहीं लूंगा. मैं मुकदमे का सामना करने के लिए तैयार हूं.’’

विचारधाराओं का द्वंद

कांग्रेस मजबूती से राहुल गांधी के बचाव में उतर आई है. पार्टी का कहना है कि यह महज कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि राजनीतिक लड़ाई है, जिससे सामने आ जाएगा कि असली हिन्दू कौन है. गांधी के वकील और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘‘हम मानते हैं कि कोई भी सच्चा हिन्दू गांधी जी को नहीं मारता. अफसोसजनक बात यह है कि संघ के कुछ लोग गोडसे के समर्थन में खड़े दिखाई देते हैं. हम अंत तक यह लड़ाई लड़ेंगे.’’

सूत्रों ने बताया कांग्रेस उपाध्यक्ष और सिब्बल के बीच बुधवार को हुई बैठक में सुप्रीम कोर्ट से अपील वापस लेने और निचली अदालत में कानूनी जंग जारी रखने का निर्णय लिया गया. सुनवाई से ठीक पहले हुई एक और बैठक में उपस्थित सभी लोगों ने संघ-भाजपा को आड़े हाथ लेने की नीति को ही सही बताया.

बैठक में उपस्थित ज्यादातर कार्यकर्ताओं का मानना था कि सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. इसलिए कानूनी लड़ाई ही एकमात्र उपाय है. उत्तर प्रदेश, पंजाब और अन्य विधानसभा चुनाव नजदीक देखते हुए कांग्रेस ने महसूस किया कि असली भारतीय कौन है- वो जिसने गांधी को मारा या वे जो उनके हत्यारे का महिमामंडन कर रहे हैं? इस तरह का मुद्दा भाजपा के लिए घातक साबित होगा.

प्रतिक्रिया

इस बीच संघ और भाजपा ने इस यू टर्न पर राहुल गांधी को आड़े हाथ लेते हुए सवाल किया है कि उन्होंने दो साल तक मामले की सुनवाई क्यों टाली? संघ के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने ट्वीट किया, ‘‘राहल गांधी दो साल तक मामले की सुनवाई क्यों टालते रहे? वह एक के बाद एक बहानेबाजी कर सुनवाई से क्यों बचते रहे? क्या वे सच का सामना करने से डर रहे थे? वे यू टर्न लेने में माहिर हैं.’’

इससे पहले उच्चतम न्यायालय में पेश किए गए एक और शपथ पत्र में गांधी ने कहा था कि उन्होंने कभी संघ पर गांधी की हत्या करवाने वाले संस्थान का आरोप नहीं लगाया.

इन आरोपों का जवाब देते हुए कांग्रेस ने कहा है कि उसने सुप्रीम कोर्ट में यह रिट याचिका उस समय लगााई थी जब अवमानना के आरोप झेल रहे बहुत सारे याचिकाकर्ताओं ने एक साथ रिट लगाई थी. इन पर ये आरोप धारा 32 के तहत लगाए गए थे और उन्होंने दंड संहिता की धारा 499 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है और अदालत से अपील की है कि वह इसे असंवैधानिक करार दें.

सिब्बल ने कहा, ‘‘मामला डेढ़ साल तक अदालत में लम्बित रहा और हाल ही उस पर अब फैसला आया है. इसका राहुल गांधी वाले मामले से कोई लेना-देना नहीं है. यह मामला इसलिए रह गया क्योंकि अगर याचिकाकर्ता उक्त मामले में सफल हो जाते तो यह याचिका और आगे नहीं बढ़ाई जाती. इसलिए दो साल तक प्रतीक्षा करने जैसी कोई बात नहीं है.'

सिब्बल ने बताया कि संघ के वकील चाहते थे कि राहुल गांधी ये कहें कि संघ ने गांधी को नहीं मारा और संघ इस मामले में दोषी नहीं है. सिब्बल ने अदालत को कहा कि ऐसा कोई वक्तव्य नहीं दिया जाएगा और वे अपने रुख पर कायम हैं. इसके बाद सिब्बल ने अदालत से कहा कि वह राहुल को इस अवमानना मामले में भिवन्डी की अदालत में पेशी से छूट दे. दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने इससे इनकार कर दिया.

घटनाक्रम

छह मार्च, 2014 को गांधी ने भिवंडी, महाराष्ट्र में आयोजित एक सार्वजनिक रैली में कहा था, ‘‘आरएसएस के लोगों ने गांधी जी को गोली मारी’’; इसके कुछ दिन बाद ही आरएसएस ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना का मामला दायर कर दिया. तभी से यह मामला अदालतों में विचाराधीन है.

मई 2015 में गांधी ने उनके खिलाफ अवमानना मामला रद्द करने की अपील खारिज करने के बॉम्बे उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी.

बाद में 19 जुलाई 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने गांधी को आदेश दिया था कि वे या तो अपने बयान पर अफसोस जताएं या अदालती कार्यवाही का सामना करने के लिए तैयार रहें. उन्हें सुनवाई में शामिल हो कर साबित करना होगा कि उनका बयान ऐतिहासिक तथ्योें पर आधारित है.

सिब्बल ने कहा, ‘‘यह एक ऐतिहासिक तथ्य है. दरअसल नाथूराम गोडसे के भाई गोपाल गोडसे ने कहा था कि उनके भाई के संबंध आरएसएस से हैं. हम भारतीयता की संघ की विचारधारा से अलग अपनी भारतीयता की विचारधारा पर कायम हैं. हम अंत तक लड़ेंगे.''

First published: 4 September 2016, 7:59 IST
 
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