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कांग्रेस के नए अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने हैं यह पांच बड़ी चुनौतियां

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 11 December 2017, 17:51 IST

लंबे समय से चली आ रही खींचतान के बाद राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष चुन लिए गए हैं. सोमवार को पार्टी ने इस बात का एलान किया और बताया कि राहुल 16 दिसंबर को पार्टी अध्यक्ष पद की शपथ लेंगे. राहुल गांधी इस पद के लिए इसलिए भी दावेदार रहे हैं क्योंकि उन्होंने गुजरात चुनाव प्रचार में जमकर मेहनत की है. इसके अलावा भी राहुल ने तमाम चुनौतियों को पार किया है.

इसके बावजूद भी कहा जा रहा है कि एक बार फिर से पार्टी अध्यक्ष पद गांधी परिवार के सिर पर सजा है. गौरतलब है कि पार्टी ने हाल ही में दिग्गज नेता मणिशंकर अय्यर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए उपयोग किए गए 'नीच' शब्द के बाद सस्पेंड कर दिया था. कहा जा रहा है कि ये फैसला खुद राहुल गांधी का था और उन्होंने ही मणिशंकर को पीएम मोदी से माफी मांगने को कहा था.

राहुल गांधी को मिले अध्यक्ष पद के बाद कांग्रेस पार्टी के कई बड़े नेताओं को मायूसी हाथ लगी है. हालांकि महाराष्ट्र के कांग्रेसी नेता शहजाद पूनावाला ने इसका बहिष्कार किया था. इसकी चर्चा पीएम मोदी ने गुजरात में एक जनसभा के दौरान भी की थी. उनके अलावा किसी ने कुछ ज्यादा नहीं कहा. हालांकि अंदरखाने नेता सोनिया गांधी के इस फैसले से नाखुश हैं.

यूं तो राहुल गांधी अब कांग्रेस पार्टी के मुखिया बन गए हैं. लेकिन अब उन्हें इन पांच चुनौतियों से निपटना होगा, जिससे वे अपने नेतृत्व को साबित कर सकें.

नए नेता बनाना

हाल ही में मणिशंकर अय्यर ने कहा था कि कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के दावेदार दो ही हैं, "मां और बेटा". इस बयान से साफ़ जाहिर होता है कि गांधी परिवार के अलावा पार्टी का कोई भी नेता इस पद के लायक नहीं है. राहुल भी पुराने नेताओं पर न भरोसा करके नए नेता बनाने का प्रयास कर रहे हैं और इस कड़ी में उन्होंने सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया को एक नेता के रूप में उभारा है.

लेकिन अब जब राष्ट्र बदलाव के मुंहाने पर आ खड़ा हुआ है और भाजपा ने इसे जमकर चुनौती दी है, तो राहुल को भी नए नेता सामने लाने होंगे. हालांकि, सोनिया के विश्वस्त और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को लेकर राहुल का क्या सोचना है, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.

सोशल मीडिया इमेज

इन दिनों राहुल गांधी भी भारतीय जनता पार्टी की तरह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं. यहां तक कि वो सोशल मीडिया के सवालों का जवाब सोशल मीडिया से ही दे रहे हैं. इसके साथ पीएम मोदी की भाषा में वो नए-नए फुलफॉर्म बना रहे हैं.

हाल ही में उन्होंने GST को गब्बर सिंह टैक्स बताकर सबको अपनी ओर आकर्षित किया था. लेकिन सोशल मीडिया पर खुद और पार्टी की छवि को बरकरार रखने के साथ ही इसे सकारात्मक बनाना और चमकाना अब राहुल के हाथ है. कैसे वे अपनी सोशल मीडिया टीम को बढ़ाते हैं और सोशल मीडिया इमेज बनाते हैं, एक बड़ी चुनौती से कम नहीं है.

अपनी पुरानी छवि को तोड़ना और जनता से जुड़ना

राहुल गांधी इन दिनों अपने दादा जवाहर लाल नेहरू के नक़्शे कदम पर चल रहे हैं और लोगों से संवाद कर रहे हैं. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी के पास ये हुनर बहुत समय से हैं लेकिन राहुल भी वोटरों तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश में जुटे हैं. उनकी समझ में आने लगा है कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस पिछड़ रही है जिसे नए आयाम देने हैं.

इसलिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं तक पहुंच बनाना, जनता से संवाद करना, क्षेत्रीय नेताओं से संपर्क समेत खुद को सीमित की जगह आसानी से उपलब्ध बनाना, उनकी छवि को हरदिल अजीज बनाने में मदद कर सकता है. राहुल जो अब तक सीमित रहे हैं, कैसे यह बदलाव लेकर आते हैं, किसी चुनौती से कम नहीं है.

युवा जोश के साथ होश

इस साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष पद पर आसीन हुए थे, उसी तरह राहुल भी नए जोश और जूनून के साथ कांग्रेस के अध्यक्ष पद पर बैठ गए हैं. ऐसे में अगर वह युवा वर्ग को लुभा सकते हैं तो उनके और पार्टी के लिए बहुत लाभकारी होगा.

लेकिन इसके लिए उन्हें संयम, विवेकशील, गंभीर, सलाहकार और नेतृत्व जैसे गुणों का विकास करना होगा. पार्टी के नेताओं के साथ सहयोगात्मक रवैया और नए चेहरों को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ाने का गुर जरूरी होगा.

गुजरात चुनाव

जिस तरह राहुल ने गुजरात में पसीना बहाया है उसके मुताबिक अगर कांग्रेस की सत्ता गुजरात में आती है तो वो तमाम आलोचकों का मुंह बंद कर सकते हैं. लेकिन गुजरात चुनाव का पहला चरण पूरा हो चुका है और आगामी 14 दिसंबर को दूसरे चरण के पूरा होने के बाद राहुल 16 दिसंबर को अध्यक्ष पद संभालेंगे. ऐसे में गुजरात में उनके द्वारा किया गया होमवर्क कितना कामयाब होता है, यह तो चुनाव परिणाम वाले दिन ही पता चलेगा.

लेकिन दूसरे चरण के चुनाव में वे अब क्या कर सकते हैं इसके लिए अब उनके पास कुछ घंटे ही बचे हुए हैं. गुजरात चुनाव उनकी अध्यक्ष पद की ताजपोशी के बाद उनकी पार्टी मुखिया की भूमिका की अहम कड़ी बन सकता है.

First published: 11 December 2017, 17:51 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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