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राहुल को कमान मिलना तय, कुर्सी तोड़ने वाले नेताओं की कुर्सी जाएगी

आकाश बिष्ट | Updated on: 2 June 2016, 23:15 IST
(कैच हिंदी)
QUICK PILL
  • कांग्रेस में राहुल गांधी को प्रेसिडेंट बनाए जाने की मांग फिर से मजबूत हुई है. हालांकि पिछली बार की तरह इस बार भी पुराने और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को कमान दिए जाने का विरोध कर रहे हैं.
  • दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी, सीपी जोशी, शकील अहमद, बीके हरिप्रसाद और मुकुल वासनिक जैसे नेताओं की छुट्टी की जा सकती है.
  • पुराने नेताओं की जगह ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय माकन, सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, रणदीप सुरजेवाला, जितिन प्रसाद, प्रकाश जोशी और कुछ अन्य युवा नेता टीम राहुल में अहम चेहरे हो सकते हैं.

राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनाए जाने की सुगबुगाहट के बीच पार्टी ने बुधवार को अपनी प्रवक्ता सुष्मिता देव को मैदान में उतार दिया. देव ने मोदी सरकार की नीतियों की जमकर बखिया उधेड़ी. 

मीडिया से बातचीत के दौरान जब देव से राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनाए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता राहुल गांधी को प्रेसिडेंट बनाए जाने का इंतजार कर रहे हैं. हम चाहेंगे कि राहुलजी हमारा नेतृत्व करें.'

तो क्या यह मान लिया जाए कि देव ने अपनी दिल की बात सामने रखी, जिन्हें कांग्रेस में राहुल गांधी को बड़ी जिम्मेदारी दिए जाने का इंतजार है? पंजाब कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी सोनिया गांधी के बदले राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनाए जाने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं.

चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत के दौरान सिंह ने कहा, 'सोनिया गांधी बेहद तेज नेता हैं. वह पिछले 20 सालों से काम करती रही हैं. अगर उन्हें लगता है कि समय नई पीढ़ी को नेतृत्व देने का है तो उन्हें यह जिम्मेदारी देनी चाहिए और हम राहुल गांधी का पूरा समर्थन करेंगे.'

पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह भी राहुल गांधी को प्रेसिडेंट बनाए जाने का समर्थन कर चुके हैं

राहुल गांधी को कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनाया जाना तय है. माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में इस बारे में औपचारिक तौर पर फैसला लिया जाएगा. कांग्रेस के एक नेता ने कहा, 'इस बात की संभावना है कि यह सब कुछ 11 जून को राज्यसभा के चुनाव के बाद हो.'

राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान दिए जाने के फैसले को  लेकर युवा कार्यकर्ता और नेता उत्साहित हैं. वहीं वरिष्ठ नेता इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं. 

वजह साफ है कि उन्हें लगता है कि नए नेतृत्व में उन्हें हाशिए पर धकेल दिया जाएगा. वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी का चुनावी रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है और उनका काम करने का तरीका कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के लिए जिम्मेदार है.

कांग्रेस का वरिष्ठ नेतृत्व राहुल गांधी को पार्टी की कमान दिए जाने का विरोध कर रहा है

कांग्रेस के बड़े नेताओं ने 2014 लोकसभा चुनाव के बाद भी पार्टी में बदलाव का विरोध किया था. उन्होंने कांग्रेस को मिली महज 44 सीटों के लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार ठहराया.

हालांकि राहुल गांधी के करीबी सूत्रों के मुताबिक इस बारे में फैसला लिया जा चुका है और जिन नेताओं की वजह से पार्टी को हारना पड़ा, उनकी जवाबदेही भी तय की जा चुकी है. 

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के बावजूद उन्होंने एक पद से इस्तीफा दिया और दूसरे शक्तिशाली पद पर जा बैठे. राहुल गांधी अब कांग्रेस को नई पहचान देना चाहते हैं. 

सोनिया जी के रिटायरमेंट के बाद उनके वफादारों को भी ठिकाने लगाया जाएगा क्योंकि वह कई मोर्चे पर काम करने में विफल रहे हैं. बदले में उन्होंने कई दफे पार्टी नेतृत्व को गुमराह किया है, जिससे पार्टी के हितों को नुकसान हुआ है.'

संगठन में बदलाव

इस बीच संगठन में किए जाने वाले बड़े फेरबदल से कांग्रेस के बड़े नेताओं को नुकसान उठाना पड़ सकता है. दिग्विजय सिंह, जनार्दन द्विवेदी, सीपी जोशी, शकील अहमद, बीके हरिप्रसाद और मुकुल वासनिक जैसे नेताओं की छुट्टी की जा सकती है. बदले में इन नेताओं को उनके राज्यों में लौटने के लिए कहा जा सकता है.

वास्तव में दिग्विजय सिंह का बड़ी सर्जरी वाला बयान पार्टी को नागवार गुजरा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री केसी देव ने 15-20 नेताओं को कुछ सालों के लिए अनिवार्य छुट्टी पर भेजे जाने की सलाह दी है. 

कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने वरिष्ठ नेताओं को सलाहकार की भूमिका दिए जाने की बात की है. सिंघवी ने सार्वजनिक तौर पर बयान दिए जाने के मामले में दिग्विजय सिंह की भी आलोचना की. कई ट्वीट कर सिंघवी ने संगठन में बदलाव करने और नई कार्यकारिणी के गठन का सुझाव दिया.

राहुल गांधी की टीम में शामिल होने वाले एक नेता ने कहा, 'हम आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में हाशिए पर चले गए. तब उन्होंने (दिग्विजय सिंह) सर्जरी की बात क्यों नहीं की? क्या वह मध्य प्रदेश में पार्टी को चुनाव जिताने में मदद कर सकते हैं, जहां वह दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं.'

अन्य महासचिव वी नारायणसामी के प्रदर्शन से भी पार्टी को पूर्वोत्तर के राज्यों में नुकसान हुआ है. उनके प्रभार के दौरान पूर्वोत्तर के कई राज्यों में पार्टी के खिलाफ बगावत हुई जबकि वह अपने आप को पुडुचेरी का मुख्यमंत्री बनाए जाने की जुगत मेें भिड़े रहे. सामी के कार्यकाल के दौैरान कांग्रेस को अरुणाचल प्रदेश की सरकार गंवानी पड़ी.

राहुल की टीम में शामिल किए जाने वाले एक अन्य नेता ने कहा, 'उनका प्रदर्शन बेहद बुरा रहा लेकिन फिर भी उन्हें पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के तौर पर नामजद किया गया. पार्टी में यही बड़ी गलती है. हमें इस संस्कृति को रोकना होगा.'

सीपी जोशी, मुकुल वासनिक, बी के हरिप्रसाद, मोहन प्रकाश और शकील अहमद को पार्टी से किनारे किया जा सकता है. वहीं उत्तराखंड की प्रभारी अंबिका सोनी और उत्तर प्रदेश के प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री अपने पद पर बने रहेंगे. इन दोनों राज्यों में अगले साल चुनाव होने है और ऐसे में इन्हें हटाए जाने की कम ही संभावना है.

मोतीलाल वोरा की जगह अहमद पटेल और मिलिंद देवड़ा को खजांची बनाया जा सकता है

कांग्रेस के खजांची मोतीलाल वोरा सेवानिवृत्त होंगे और उनकी जगह कौन लेगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है. सूत्रों की माने तो अहमद पटेल और मिलिंद देवड़ा के नाम पर पार्टी गंभीरता से विचार कर रही है. 

कांग्रेस के एक अन्य नेता ने कहा, 'सोनिया गांधी के रिटायर होने के बाद पटेल पहले की तरह शक्तिशाली नहीं रह जाएंगे. पटेल में फंड जुटाने की अदभुत काबिलियत है और अगर वह हामी भरते हैं तो पार्टी उन्हें यह जिम्मेदारी दे सकती है.'

इसके अलावा कुछ चर्चित महासचिव, कुछ सचिव और राज्य कांग्रेस प्रमुखों को बदला जा सकता है. मसलन बिहार कांग्रेस औरर कर्नाटक कांग्रेस के प्रमुख को पिछले चुनाव के बाद से नहीं बदला गया है.

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को जगह देने के लिए कुछ नेताओं ने बीजेपी की तरह मार्गदर्शक मंडल बनाए जाने का प्रस्ताव रखा है. 

बहरहाल इस बीच पुराने नेताओं की जगह ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय माकन, सचिन पायलट, आरपीएन सिंह, रणदीप सुरजेवाला, जितिन प्रसाद, प्रकाश जोशी और कुछ अन्य युवा नेता टीम राहुल में अहम चेहरे होंगे. यह सभी  राहुल गांधी के समर्थक माने जाते हैं. गांधी को कांग्रेस का प्रेसिडेंट बनाए जाने की मांग लंबे समय से उठ रही है. गांधी के प्रेसिडेंट बनने के बाद कांग्रेस में सत्ता के दो केंद्रों के युग का भी खात्मा होेगा.

First published: 2 June 2016, 23:15 IST
 
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