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रेलवे के पास नहीं है पटरियों की मरम्मत करने वाले कर्मचारी, कैसे रुकेंगी रेल दुर्घटनाएं ?

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 October 2018, 12:53 IST

उत्तर प्रदेश के रायबरेली में आज एक बड़ा ट्रेन हादसा हो गया. ट्रेन की पटरियों के टूटे होने के कारण आज ये बड़ा रेल हादसा हुआ. इस एक्सीडेंट न्यू फरक्का एक्सप्रेस के 6 डिब्बे पटरी से उत्तर गए. इस हादसे में अब तक 6 यात्रिओं के मरने की खबर आ चुकी है. इतना ही नहीं इस हादसे में अब तक 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. रेलवे इस तरह की दुर्घटनाओं को रोकने के प्रयास में लगा हुआ है.

इस मामले में 20 नवंबर 2017 को एनडीटीवी वेबसाइट पर प्रकाशित हो चुकी रिपोर्ट रेल संरक्षा केकई दावों को सवालों के दायरे में लाकर खड़ा कर देती है. रेलवे में ट्रेन की पटरियों की चेकिंग और मरम्मत का काम जिन कर्मचारियों द्वारा किया जाता है. उन्हें रेलवे में गैंगमैन कहते हैं. चौकाने वाली बात ये हैं कि सुरक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण इस काम को करने के लिए रेलवे के पास कर्मचारी ही नहीं है. रेलवे में सिर्फ गैंगमैन के 60 हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं. बाकी अन्य 1.31 पद भी खाली हैं. ऐसे में रेलवे ट्रेन दुर्घटनाओं पर कैसे काबू पाएगी ये बड़ा सवाल खड़ा होता है.

रिपोर्ट की मानें तो रेल विभाग में कर्मचारियों की संख्या लगातार घटती जा रही है. ट्रेन की पटरियों की समय समय पर चेकिंग और उनकी मरम्मत के लिए रेलवे के पास गैंगमैन ही नहीं है. यह बात खुद रेल विभाग ने स्वीकार की है. इस मामले में संसद की स्थायी समिति ने रेल बोर्ड के साथ चर्चा की थी. गौरतलब है कि रेल हादसों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए संसद की स्थायी समिति ने रेलवे बोर्ड के बड़े अफसरों को तलब किया था. एनडीटीवी को मिली जानकारी के मुताबिक, ''रेलवे बोर्ड के अफसरों ने संसदीय समिति के सामने माना कि भारतीय रेल में 1.31 लाख पद खाली पड़े हैं. इन खाली पदों में करीब 60,000 गैंगमैन के पद हैं, जिन्हें रेल लाइनों की निगरानी करनी होती है.''

इस मामले में पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने भी एनडीटीवी से कहा था की रेलवे ने जल्द से जल्द भर्तियां नहीं की तो सुरक्षा का मामला गंभीर हो सकता है. त्रिवेदी ने कहा, ''गैंगमेन हमारे रेलवे का फाउंडेशन है. वो खुद अपनी जान देते हैं, लेकिन हादसे नहीं होने देते हैं. उनका काम ही है रेलवे की पटरी की जांच करना...और अगर वैकेंसी है तो ऐसे में उन जगहों पर कोई जांच नहीं हो पाती है.''

First published: 10 October 2018, 12:53 IST
 
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